प्रदेश सरकार ने बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों व उनके आश्रितों को बड़ा तोहफा दिया है। प्रदेश कैबिनेट ने इन लगभग 15 लाख से अधिक शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा दिए जाने पर बृहस्पतिवार को मुहर लगा दी है। इससे इन शिक्षकों, कर्मचारियों व उनके परिजनों में खुशी का माहौल है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश के माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मी और उनके आश्रित परिवार सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे। इससे लाभांवित होने वाले 15 लाख से अधिक शिक्षक व अन्य पर लगभग 448 करोड़ रुपये का व्यय होगा।
योजना के तहत शिक्षक व कर्मी पांच लाख रुपये तक का कैशलेश इलाज करा सकेंगे। कैशलेस इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ साचीज से जुड़े निजी अस्पतालों में भी मिलेगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार होंगी।
आश्रितों को भी इसका लाभ मिलेगा
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों व परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों (अनुदानित एवं स्ववित्त पोषित) में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कार्यरत वार्डेन, पूर्ण कालिक, अंशकालिक शिक्षकों व पीएम पोषण योजना के तहत रसोइयों और उनके आश्रितों को भी इसका लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि इस योजना से बेसिक शिक्षा परिषद के 11.95 लाख से अधिक शिक्षक व कर्मी लाभांवित होंगे। सरकार की इस पहल से प्रति कर्मी करीब 3000 रुपये सालाना प्रीमियम के हिसाब से कुल 358.61 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च अनुमानित है।













