केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कई उपायों की घोषणा भी की है। अमेरिका से व्यापार समझौते पर अनिश्चितता और टैरिफ के कारण भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों को हो रहे नुकसान के बीच उन्होंने इनपुट पर सीमा शुल्क में कटौती, विभिन्न क्लस्टरों में विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करने, कंटेनर निर्माण और टैक्सटाइल क्षेत्र में मशीनरी के आधुनिकीकरण के लिए पूंजीगत मदद की घोषणा की। कुल मिलाकर, बजट की घोषणाओं में वैश्विक व्यापार में अस्थिरता को दूर करने पर खास जोर दिया गया है।
विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए रियायत
विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) में रोजगार पर असर नहीं पड़े, इसके लिए वित्त मंत्री ने पात्र विनिर्माण इकाइयों को घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री की सुविधा देने के लिए विशेष एकमुश्त उपाय का एलान किया। उन्होंने कहा, डीटीए में रियायती शुल्क दरों पर बिक्री की मात्रा इन इकाइयों के निर्यात के निर्धारित अनुपात तक सीमित होगी। इन उपायों को लागू करने के लिए नियमों में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। जून 2025 तक, भारत में 370 एसईजेड हैं।
सरकार इन क्षेत्रों को सरलीकृत सरकारी मंजूरी प्रणाली की सुविधा के साथ ही, निवेश और विनिर्माण को बढ़ावा देने के मकसद से अन्य लाभ भी देती है। एसईजेड विभिन्न श्रम-प्रधान क्षेत्रों में 31 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं। अमेरिकी बाजार पर निर्भर कई एसईजेड इकाइयां अमेरिकी टैरिफ के कारण बंद होने के कगार पर हैं। अमेरिकी टैरिफ के कारण सितंबर और अक्तूबर में भारतीय वस्तुओं के निर्यात में गिरावट देखी गई है। ऐसे में बजट में मिली रियायत एसईजेड की इकाइयों के लिए मददगार हो सकती है।
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