वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट ने मध्यम वर्ग और वेतनभोगी करदाताओं को निराश किया है। जहां एक तरफ महंगाई और ब्याज दरें बढ़ रही हैं, वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया और न ही कोई नई छूट दी है। 72% करदाता नई रिजीम में शिफ्ट हो चुके हैं, इसके बावजूद पुरानी रिजीम को लेकर संशय बरकरार है। आइए, इस बजट के बाद आपके मन में उठ रहे टैक्स से जुड़े हर सवाल का जवाब चार्टर्ड अकाउंटेंट शुभ नारायण सिंह से आसान भाषा में जानते हैं।
सवाल: बजट 2026 में वेतनभोगी वर्ग को टैक्स में क्या राहत मिली है?
जवाब: सच कहा जाए तो मध्यम वर्ग और वेतनभोगियों को इस बजट से कुछ खास हासिल नहीं हुआ है। उम्मीद थी कि ‘नई टैक्स रिजीम’ को आकर्षक बनाने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जाएगी, लेकिन वित्त मंत्री सीतारमण ने इसे जस का तस रखा है। यानी आपको मौजूदा ₹75,000 की छूट पर ही संतोष करना होगा। इसके अलावा टैक्स स्लैब में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सवाल: 72% लोग नई रिजीम में आ चुके हैं, तो सरकार ने पुरानी रिजीम को खत्म क्यों नहीं किया?
जवाब: यह एक बड़ा सवाल है। चार्टर्ड अकाउंटेंट शुभ नारायण सिंह के अनुसार, सरकार के लिए पुरानी रिजीम को एक झटके में खत्म करना आसान नहीं है क्योंकि अभी भी एक बड़ा और प्रभावशाली वर्ग है जिसके लिए पुरानी रिजीम ही बेहतर है। सरकार का मानना है कि पुरानी रिजीम को बंद करने का एलान करने के बजाय, इसे समय के साथ खुद-ब-खुद खत्म होने दिया जाए। जब लोग खुद नई रिजीम को बेहतर मानकर उसे चुनेंगे, तो पुरानी व्यवस्था अपने आप अप्रासंगिक हो जाएगी।
सवाल: मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरे लिए नई रिजीम सही है या पुरानी? इसका गणित क्या है?
जवाब: इसका फैसला एक साधारण से गणित पर टिका है। विशेषज्ञों के अनुसार, 12.75 लाख रुपये तक की सालाना आय वालों के लिए नई कर व्यवस्था निस्संदेह बेहतर विकल्प है। लेकिन अगर आपकी आय 20 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो आपको यह देखना होगा कि आप साल भर में कुल कितनी टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। अगर आप 80C, 80D, एचआरए (एचआरए) और होम लोन ब्याज को मिलाकर 3.75 लाख रुपये से अधिक की कटौती का दावा कर सकते हैं, तो आपके लिए ‘पुरानी रिजीम’ में टैक्स कम बनेगा। ऐसे में आपके लिए पुरानी रिजीम अब भी नई टैक्स रिजीम से बेहतर है।












