असम कैबिनेट ने चर्चित जुबीन गर्ग मौत मामले की सुनवाई तेज करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह कदम परिवार के अनुरोध पर उठाया गया है। कैबिनेट ने गौहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से विशेष अदालत गठित करने का आग्रह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
परिवार की मांग पर लिया गया निर्णय
मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार मौजूदा अदालत की कार्यप्रणाली से संतुष्ट थी, लेकिन पीड़ित परिवार की इच्छा सर्वोपरि है। गौरतलब है कि प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की पिछले वर्ष 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में शामिल होने गए थे। मामले में कई आरोपियों की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। सरकार का कहना है कि सामान्यतः ऐसे मामलों में कुछ महीनों में जमानत मिल जाती है, लेकिन यहां अदालत ने सख्ती दिखाई है।
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‘साजिश’ का भी लगाया आरोप
मुख्यमंत्री ने हाल ही में आरोप लगाया था कि कुछ मीडिया संस्थान और विपक्षी दल मामले को चुनाव से पहले राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा था कि जज बदलवाकर आरोपियों को राहत दिलाने की साजिश रची जा रही है। हालांकि अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह परिवार की मांग को आगे बढ़ाएगी और अंतिम निर्णय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे।
चुनाव से पहले चाय बागान मजदूरों की दिहाड़ी में 30 रुपये की बढ़ोतरी
कैबिनेट बैठक में एक और बड़ा फैसला लेते हुए सरकार ने चाय बागान मजदूरों की दैनिक मजदूरी 30 रुपये बढ़ाने की घोषणा की। 1 अप्रैल से ब्रह्मपुत्र घाटी में मजदूरी 280 रुपये और बराक घाटी में 258 रुपये प्रतिदिन हो जाएगी। इससे पहले अक्टूबर 2023 में 18 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। असम, जो देश का सबसे बड़ा चाय उत्पादक राज्य है, वहां विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल में प्रस्तावित हैं। ऐसे में इस फैसले को अहम माना जा रहा है।
ओरुनोदई योजना के तहत 39.7 लाख लाभार्थियों को राशि
कैबिनेट ने यह भी तय किया कि 10 मार्च को ‘ओरुनोदोई’ योजना के तहत 39.7 लाख लाभार्थियों को एकमुश्त 9,000 रुपये जारी किए जाएंगे। इस पर एक दिन में लगभग 3,600 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि नए श्रम कानूनों के लागू होने के बाद मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से अधिक हो सकती है।












