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महिमा चौधरी को शानदार डेब्यू के बावजूद काफी स्ट्रगल का सामना करना पड़ा था. वे ‘परदेस’ की सफलता के बाद कानूनी विवादों से घिर गई थीं. फिर साल 1999 में उनका कार एक्सीडेंट हुआ, जिसमें उनका चेहरा बुरी तरह जख्मी हो गया था. चेहरे में 67 कांच के टुकड़े घुसने के बाद सालों तक उन्हें धूप और कैमरा से दूर रहना पड़ा. उन्होंने निजी जीवन में टूटी शादी और ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर चुनौतियों के बावजूद हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी कमियों को ढंकने के लिए इस्तेमाल किए गए ‘डायमंड डॉट्स’ को फैशन बना दिया.
महिला चौधरी ने ‘परदेस’ से किया डेब्यू. (फोटो साभार: Instagram@mahimachaudhry1)
नई दिल्ली: महिमा चौधरी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है, लेकिन इसमें ग्लैमर से कहीं ज्यादा दर्द और स्ट्रगल छिपा है. महिमा को उनके करियर की शुरुआत ही कानूनी पचड़ों से हुई थी. एक गलतफहमी की वजह से उन्हें कोर्ट के चक्कर काटने पड़े और कई बड़े प्रोजेक्ट्स उनके हाथ से निकल गए, क्योंकि इंडस्ट्री में अफवाह फैल गई थी कि वह किसी खास कॉन्ट्रैक्ट में बंधी हैं. अभी वह इस तनाव से जूझ ही रही थीं कि 1999 में फिल्म ‘दिल क्या करे’ की शूटिंग के दौरान उनका एक भयानक एक्सीडेंट हो गया. इस हादसे में उनके चेहरे मे कांच के 67 टुकड़े घुस गए थे. जब अगले दिन उनका चेहरा बुरी तरह सूज गया, तो उनके दोस्तों को लगा कि शायद उनका किसी से झगड़ा हुआ है और वे उनके जख्मों का मजाक उड़ाने लगे. उस वक्त महिमा को लगा था कि शायद उनका करियर अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है.
महिमा के लिए हादसे के बाद का समय किसी बुरे सपने जैसा था. उन्हें घंटों माइक्रोस्कोप के नीचे बैठकर चेहरे से कांच के बारीक टुकड़े निकलवाने पड़े. महिमा ने सिद्धार्थ कन्नन को दिए इंटरव्यू में बताया कि वे धूप में बाहर नहीं निकल सकती थीं क्योंकि यूवी किरणों से उनके चेहरे पर गहरे निशान पड़ने का डर था. सालों तक उन्हें घर में बंद रहना पड़ा और सर्जरी के टांके ठीक होने का इंतजार करना पड़ा. लेकिन महिमा ने हार नहीं मानी.
‘परदेस’ में महिमा चौधरी ने लीड रोल प्ले किया और फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई.
‘लकी मैस्कॉट’ का मिला टैग
जब महिमा ने काम पर वापसी की, तो लोग उन्हें सिर्फ गानों के ऑफर देने लगे और उन्हें ‘लकी मैस्कॉट’ का टैग दे दिया गया. महिमा को डर था कि कहीं वह सिर्फ एक ‘आइटम गर्ल’ बनकर न रह जाएं. अपने चेहरे के निशानों को छिपाने के लिए उनकी डिजाइनर बाईं तरफ डायमंड डॉट्स लगाती थीं, जो बाद में एक फैशन ट्रेंड बन गया. लोग उसे स्टाइल समझ रहे थे, जबकि वह महिमा के जख्मों को ढकने की एक मजबूरी थी.
‘लज्जा’ से की दमदार वापसी
महिमा चौधरी ने न केवल अपने एक्सीडेंट और करियर की गिरावट से लड़ाई लड़ी, बल्कि अपनी पर्सनल लाइफ में भी बहुत उतार-चढ़ाव देखे. एक मुश्किल शादी से लेकर ब्रेस्ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी तक, उन्होंने हर मुश्किल का डटकर सामना किया. उन्होंने दोबारा वापसी की और ‘लज्जा’ जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग से साबित कर दिया कि एक कलाकार को उसके चेहरे के निशानों से नहीं, बल्कि उसके टैलेंट से पहचाना जाना चाहिए. आज जब वह पीछे मुड़कर देखती हैं, तो वह एक ऐसी सर्वाइवर के रूप में उभरती हैं जिन्होंने अपनी कमियों को ही अपनी ताकत बना लिया.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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