राजधानी लखनऊ में रविवार को बीएसपी के संस्थापक कांशीराम की जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें नमन किया। साथ ही बहुजन समाज के लोगों का आह्वान किया कि वह बसपा से जुड़कर मिशनरी अंबेडकरवादी बनें। सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करें। ताकि, बहुजनों के हित, कल्याण व उत्थान के लिए संविधान में दिए गए अधिकारों को ज़मीन पर लागू किया जा सके।
मायावती ने कहा कि बहुजन समाज के कल्याण व उत्थान के लिए बसपा ही असली पार्टी है। सपा समेत अन्य विरोधी पार्टियों की कथनी-करनी में अंतर है। उनके सत्ता में आने से लाभ कम हानि अधिक होती है। सपा का पीडीए प्रेम विशुद्ध छलावा है। इनको हमारे महापुरुषों की याद केवल चुनावी स्वार्थ है। सरकार बनने पर इन्हें तिरस्कृत कर देती हैं।
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि यह आरोप नहीं, बल्कि इन पार्टियों का इतिहास है। मुस्लिम और विशेषकर ब्राह्मण समाज के भी बीएसपी से जुड़ने से सपा की राजनीतिक व जातिवादी बैरता और तीव्र होती दिखाई देती है। उन्होंने एक बार फिर सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति मूवमेंट को मजबूत बनाने व पूरी ज़िद के साथ चुनावी सफलता अर्जित करने के संकल्प को दोहराया।
मायावती ने कहा कि ये पार्टियां सांसदी व विधायकी का प्रलोभन देकर बहुजन समाज के वोट की शक्ति को कमज़ोर करती हैं। साथ ही निजी लाभ व स्वार्थ के लिए दगा करती हैं। ऐसे लोगों से उचित दूरी और सतर्कता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस द्वारा संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित नहीं करने की तरह ही वर्तमान में केंद्र की बीजेपी सरकार बुहजन नायक कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करने में देरी न करे।











