आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते हुए सामाजिक और पेशेवर पृष्ठभूमि के लिहाज से कई वर्गों को साधने की कोशिश की है। पार्टी ने कुल 144 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए
हैं, जिनमें राजनीति के साथ-साथ शिक्षा, समाजसेवा, स्वास्थ्य, मीडिया और सेना से जुड़े लोगों को भी टिकट दिया गया है।
पार्टी की सूची में पेशे के आधार पर 23 शिक्षक, 8 सामाजिक कार्यकर्ता, 6 अधिवक्ता, 5 डॉक्टर और 3 पत्रकार शामिल हैं। इसके अलावा 3 आध्यात्मिक नेता और 3 सेवानिवृत्त सैनिकों को भी उम्मीदवार बनाया गया है। सूची में एक क्रिकेटर, एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, एक लोकगायक और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े एक प्रमुख व्यक्ति को भी टिकट दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक भाजपा ने इन वर्गों को शामिल कर अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाई है।
सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश
सामाजिक वर्ग के आधार पर भी पार्टी ने संतुलन बनाने की कोशिश की है। घोषित उम्मीदवारों में 62 सामान्य वर्ग से, 20 अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से, 48 अनुसूचित जाति और 14 अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं। वहीं सीटों के हिसाब से 99 सामान्य, 32 अनुसूचित जाति और 13 अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की गई है। राजनीतिक अनुभव के लिहाज से सूची में 41 मौजूदा विधायक, 3 पूर्व विधायक और 2 पूर्व सांसद शामिल हैं।
36 सीटों पर युवा उम्मीदवार शामिल
इसके साथ ही भाजपा ने युवाओं और महिलाओं को भी जगह देने की कोशिश की है। पार्टी ने 11 सीटों पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है, जबकि 36 सीटों पर 40 वर्ष से कम उम्र के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है। इस सूची की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर मानी जा रही है, जहां नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनौती देंगे। वहीं नैहाटी सीट से ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार से आने वाले सौमित्र चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाया गया है। माना जा रहा है कि भाजपा ने पहली सूची के जरिए सामाजिक, पेशेवर और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है।











