पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार रात चुनाव आयोग के अधिकारियों ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर चार शीर्ष राज्य अधिकारियों के अचानक ट्रांसफर पर गहरी चिंता और आश्चर्य जताया।
मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि उन्हें यह पत्र लिखने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि 15 और 16 मार्च को आयोग ने कई वरिष्ठ अधिकारियों के एकतरफा स्थानांतरण के निर्देश जारी किए। इनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। ममता बनर्जी ने कहा ऐसे व्यापक ट्रांसफर बिना किसी ठोस कारण, चुनाव से जुड़े किसी उल्लंघन या गलत आचरण के आरोप के बिना किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने रविवार रात राज्य के शीर्ष नौकरशाहों मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना के ट्रांसफर के आदेश दिए। सोमवार को जारी अगले आदेश में डीजीपी पीयूष पांडे और कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतीम सरकार को भी बदल दिया गया। आदेश के तुरंत बाद राज्य सरकार ने भी कई वरिष्ठ IPS अधिकारियों के स्थानांतरण की अधिसूचना जारी की।
संविधान और प्रशासनिक परंपरा पर सवाल
मुख्यमंत्री ने संविधान की धारा 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान अधिकारियों को आयोग के अधीन मानते हुए उनका स्थानांतरण राज्य सरकार की सलाह से होना चाहिए। उन्होंने कहा पिछले चुनावों में आयोग ने हमेशा ऐसी ट्रांसफर के लिए राज्य सरकार से परामर्श किया है। आम तौर पर आयोग राज्य सरकार से तीन अधिकारियों की सूची मांगता था, जिनमें से वह किसी एक को चयनित करता था। ममता बनर्जी ने कहा कि यह गहरी चिंता और आश्चर्य की बात है कि राज्य प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों को विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के कुछ ही घंटों में हटाया गया।
भविष्य के लिए अनुरोध
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया कि भविष्य में इस तरह के एकतरफा कदम न उठाए जाएं। उनका कहना है कि इससे आयोग की प्रतिष्ठा और संविधान की मूलभूत संवैधानिक भावना पर असर पड़ता है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे और वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।
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