12:42 PM, 19-Mar-2026
Chaitra Navratri 2026 Ashtami And Navmi: चैत्र नवरात्रि पर इस दिन है अष्टमी-नवमी तिथि
चैत्र नवरात्रि आज से शुरू है जो 27 मार्च तक चलेगी। नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन कन्या पूजन और हवन का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष 26 मार्च को अष्टमी और 27 मार्च को नवमी तिथि होगी। कुछ लोग अष्टमी तो कुछ लोग नवमी तिथि पर कन्या पूजन और हवन आदि करते हैं।
12:13 PM, 19-Mar-2026
Chaitra Navratri 2026:दुर्गा सप्तशती पाठ
ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता।।
सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते॥
शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते॥4॥
सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते॥
रोगानशेषानपंहसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति॥
सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम्॥
Chaitra Navratri 2026: मां दुर्गा को करना है प्रसन्न तो नवरात्रि में जरूर करें दुर्गा सप्तशती का पाठ
12:00 PM, 19-Mar-2026
Maa Shailputri Katha: मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया। जब माता सती को इस यज्ञ के बारे में पता चला, तो उन्होंने वहां जाने की इच्छा जताई। भगवान शिव ने उन्हें समझाया कि बिना निमंत्रण जाना उचित नहीं है, लेकिन सती के आग्रह पर उन्होंने अनुमति दे दी। जब माता सती अपने मायके पहुंचीं, तो वहां उनका सम्मान नहीं हुआ। उनकी बहनों ने उनका मजाक उड़ाया और राजा दक्ष ने भी भगवान शिव के प्रति अपमानजनक बातें कहीं। अपने पति का अपमान सती सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने क्रोध व दुःख में आकर योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। इस घटना से भगवान शिव अत्यंत दुखी और क्रोधित हुए। उन्होंने यज्ञ का नाश कर दिया। बाद में माता सती ने पुनर्जन्म लिया और पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्मीं, जिन्हें मां शैलपुत्री कहा गया। आगे चलकर उनका विवाह फिर से भगवान शिव से हुआ। इसी कारण नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा विशेष रूप से की जाती है और उन्हें घी का भोग अर्पित किया जाता है।
11:39 AM, 19-Mar-2026
Maa Shailputri Aarti: मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार।
करें देवता जय जयकार।।
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।।
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।।
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।।
जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।।
11:29 AM, 19-Mar-2026
Maa Shailputri Puja Vidhi: मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को अच्छी तरह शुद्ध करें।
- शुभ समय में विधिपूर्वक कलश स्थापना से पूजा की शुरुआत करें।
- मिट्टी के पात्र में सात प्रकार के अनाज बोकर उस पर जल से भरा कलश स्थापित करें।
- कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते डालकर ऊपर नारियल रखें।
- मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें कुमकुम, अक्षत, सफेद पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।
- श्रद्धा भाव से मंत्र जाप करें और चाहें तो दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ भी करें।
11:19 AM, 19-Mar-2026
Maa Shailputri Mantra: मां शैलपुत्री बीज मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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11:14 AM, 19-Mar-2026
Chaitra Navratri Day 1 Color: मां शैलपुत्री का प्रिय रंग
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, जो खुशहाली, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है।
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11:02 AM, 19-Mar-2026
Maa Shailputri Puja Vidhi: मां शैलपुत्री पूजा विधि
- प्रथम नवरात्रि के दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।
- इसके बाद विधिपूर्वक कलश स्थापना करें। माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें गंगाजल से शुद्ध करें।
- इसके पश्चात रोली, अक्षत, पुष्प और विशेष रूप से सुगंधित फूल अर्पित करें।
- माता को सफेद वस्त्र, घी का दीपक और नैवेद्य के रूप में शुद्ध घी या उससे बने प्रसाद का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
- पूजा के दौरान ‘ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः’ मंत्र का जप करें और श्रद्धा भाव से आरती करें।
- अंत में अपनी मनोकामना के साथ देवी का ध्यान करें।
10:59 AM, 19-Mar-2026
Chaitra Navratri Vrat Niyam: नवरात्रि व्रत नियम
- नवरात्रि के पहले दिन विधि-विधान से कलश स्थापना अवश्य करनी चाहिए। मान्यता है कि, इससे घर में देवी दुर्गा का वास बना रहता है।
- व्रत रखने वाले व्यक्ति को नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए और मन, वचन व कर्म की पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।
- नवरात्रि के दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिए।
- प्रतिदिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना करें और दुर्गा चालीसा का पाठ पढ़ें। इससे विशेष पुण्य फल मिलता है।
- नवरात्रि के दौरान अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें।
- पूजा स्थल को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए। इसके पास जूते-चप्पल या गंदगी जैसा कोई भी सामान न रखें।
- नवरात्रि के समय घर में मांसाहार और शराब का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना गया है।
- अगर अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो भूलकर भी घर को खाली न छोड़े।
10:55 AM, 19-Mar-2026
Chaitra Navratri 2026 Muhurat: चैत्र नवरात्रि योग
पंचांग के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र, शुक्ल योग, नाग करण और मीन राशि में चंद्रमा है।











