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बॉलीवुड स्टार की थ्रिलर फिल्मों का अलग ही क्रेज है. वे एक्टिंग अपनी आंखों और खामोशी से भी बहुत कुछ कह जाते हैं. उन्होंने रोमांटिक हीरो के तौर पर हिंदी सिनेमा में कदम रखा. मगर थ्रिलर और सस्पेंस फिल्मों में तो उनका कोई मुकाबला नहीं है. उन्होंने अपने करियर में कई बार पुलिस अफसर, तेज-तर्रार वकील और खूंखार विलेन के किरदार निभाए हैं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा है. उन्हें विलेन के रोल में जितनी सराहना मिली, उतनी हीरो के रोल में नहीं.
नई दिल्ली: अक्षय खन्ना ने हीरो बनकर हिंदी सिनेमा में कदम रखा. 90 के दौर में रोमांटिक रोल निभाए, फिर ‘हंगामा’ जैसी फिल्मों में कॉमेडी का लोहा मनवाया, लेकिन दर्शकों ने उन्हें सबसे ज्यादा पसंद जटिल और निगेटिव किरदारों में ही किया. ‘छावा’ में औरंगजेब बने, तो ‘धुरंधर’ में रमान डकैत. ‘दृश्यम’ में उनके पुलिसवाले का रोल कौन भूल सकता है.

फिल्म ‘दृश्यम 2’ में अक्षय खन्ना ने आईजी तरुण अहलावत का जो किरदार निभाया, उसने फिल्म में जान फूंक दी. अजय देवगन के विजय सालेगांवकर वाले शातिर दिमाग को टक्कर देने के लिए जिस तरह के ‘माइंड गेम्स’ अक्षय ने खेले, वह काबिल-ए-तारीफ था. उनकी एंट्री और बात करने का अंदाज ही इतना असरदार था कि दर्शकों का ध्यान उनसे हटाना मुश्किल हो गया.

2019 की फिल्म ‘सेक्शन 375’ को भला कौन भूल सकता है, जिसमें अक्षय खन्ना ने एक ऐसे डिफेंस लॉयर की भूमिका निभाई जो सच और झूठ की महीन लकीर पर चलता है. कोर्ट रूम ड्रामा में उनकी दलीलें और चेहरे के हाव-भाव इतने सधे हुए थे कि उन्होंने साबित कर दिया कि एक पावरफुल स्क्रिप्ट को कैसे लीड किया जाता है.
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2017 में आई ‘इत्तेफाक’ और ‘मॉम’ जैसी फिल्मों में भी अक्षय ने अपनी छाप छोड़ी. ‘इत्तेफाक’ में वे एक ऐसे पुलिस ऑफिसर बने जो एक उलझी हुई मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. दूसरी तरफ, श्रीदेवी की फिल्म ‘मॉम’ में एक क्राइम इन्वेस्टिगेटर के रूप में उनकी भूमिका बहुत ही अहम थी, जहां उन्होंने अपनी सूझबूझ से कहानी को आगे बढ़ाया.

अगर विलेन के तौर पर अक्षय खन्ना की सबसे यादगार परफॉर्मेंस की बात करें, तो 2008 की फिल्म ‘रेस’ का नाम सबसे पहले आता है. इस फिल्म में उन्होंने एक शातिर और धोखेबाज भाई का रोल प्ले किया था. ‘रेस’ में उनके किरदार में जो स्वैग और चालाकी थी, उसने उन्हें उस दौर का सबसे कूल विलेन बना दिया. आज भी थ्रिलर फिल्मों के शौकीनों के लिए यह फिल्म एक क्लासिक मानी जाती है.

अक्षय ने ‘स्टेट ऑफ सीज: टेम्पल अटैक’ जैसी फिल्मों में एक्शन थ्रिलर का स्वाद भी चखाया है. सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने एक मेजर का रोल निभाया, जो आतंकवादियों के खिलाफ मोर्चा संभालता है. उनकी बॉडी लैंग्वेज और आवाज ने एक सैनिक के किरदार में सच्चाई भर दी थी.

अक्षय खन्ना ने ’36 चाइना टाउन’ तक हर फिल्म में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. चाहे वो साइकोलॉजिकल थ्रिलर हो या फिर कोई मर्डर मिस्ट्री, अक्षय का होना ही फिल्म की क्वालिटी की गारंटी बन जाता है. उनकी बारीकियों पर पकड़ और किरदारों को जीने की कला उन्हें हिंदी सिनेमा का नायाब नगीना बनाता है.

फिल्म ‘धुरंधर’ में रहमान डकैत के रोल से दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए. लोग उनके खौफनाक अंदाज की खूब तारीफ कर रहे हैं. इस स्पाई एक्शन थ्रिलर में अक्षय एक बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आए हैं.
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