07:08 AM, 26-Aug-2025
हरतालिका तीज व्रत कथा Hartalika Teej Vrat Katha
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार कैलाश पर्वत पर माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि उन्हें ऐसा कौन-सा पुण्य मिला, जिससे वे शिव को पति रूप में प्राप्त कर सकीं। इस पर भगवान शिव ने उन्हें उनकी ही तपस्या की स्मृति दिलाई। माता पार्वती ने बचपन से ही शिव को अपने मन में पति रूप में स्वीकार कर लिया था और इसी संकल्प के साथ उन्होंने 12 वर्षों तक कठोर तप किया। उन्होंने जंगल में रहकर पेड़ों के पत्ते खाए, अन्न का त्याग किया और हर मौसम की कठिनाइयों को सहा। उनके इस तप को देखकर उनके पिता, हिमालय राज चिंतित हो उठे। उसी समय नारद ऋषि भगवान विष्णु का रिश्ता लेकर आए, जिसे हिमालय राज ने स्वीकार कर लिया। जब पार्वती जी को यह बताया गया, तो वे अत्यंत दुखी हुईं और अपने मन की बात सखियों से साझा की। उन्होंने कहा कि वे तो पहले ही भगवान शिव को पति रूप में स्वीकार कर चुकी हैं और किसी और से विवाह नहीं करेंगी। यह सुनकर सखियों ने उनका अपहरण कर लिया और उन्हें एक गुफा में छुपा दिया। वहीं पार्वती जी ने भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हस्त नक्षत्र में मिट्टी से शिवलिंग बनाकर शिव जी की आराधना की और रातभर जागरण किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी प्रकट हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार कर लिया। तब से यह व्रत उन महिलाओं द्वारा रखा जाता है जो अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, और अविवाहित कन्याएं योग्य वर पाने की इच्छा से यह उपवास करती हैं।
06:55 AM, 26-Aug-2025
तीज व्रत में रंगों का महत्व
हरितालिका तीज में रंगों का भी विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक शृंगार करती हैं और शुभ रंगों के वस्त्र धारण करती हैं। लाल रंग देवी पार्वती का प्रिय है, जो प्रेम और शक्ति का प्रतीक है। हरा रंग हरियाली और समृद्धि का संकेत देता है, जबकि गुलाबी रंग सौम्यता और आपसी समझ का प्रतीक माना जाता है, विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए जिनके बीच कोई मतभेद हो। इसके विपरीत, काला, नीला, सफेद और क्रीम रंग वर्जित माने जाते हैं।
06:46 AM, 26-Aug-2025
हरतालिका तीज पर बन रहे 4 शुभ योग
परंपरा के अनुसार हरितालिका तीज का व्रत सौभाग्यवती महिलाओं के लिए अखंड सुहाग का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत उनके पति के लंबे जीवन और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना के साथ रखा जाता है। वहीं अविवाहित कन्याएं इस व्रत को मनचाहा और योग्य वर पाने की कामना से करती हैं। हरितालिका तीज पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि, शोभन, गजकेसरी और पंचमहापुरुष जैसे चार शुभ योग बन रहे हैं।
06:36 AM, 26-Aug-2025
हरतालिका तीज शुभ योग
ज्योतिषियों के मुताबिक हरतालिका तीज पर साध्य योग बन रहा है, जो प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 09 मिनट तक है। इसके बाद शुभ योग की शुरुआत होगी। वहीं रवि योग पूरे दिन रहने वाला है। इसके साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, गजकेसरी और पंचमहापुरुष जैसे संयोग भी रहेंगे।
06:24 AM, 26-Aug-2025
इस बार शिव-पार्वती की पूजा के लिए कई शुभ संयोग बने हुए हैं, जो ज्योतिष दृष्टि से भी खास है। दरअसल, हरतालिका तीज पर शनि मीन और शुक्र मिथुन राशि में विराजमान होंगे है। इस दौरान दोनों 120 डिग्री पर आकर नवपंचम योग का निर्माण करेंगे। इसके अलावा इस तिथि पर सूर्य अपनी राशि सिंह में रहकर कृपा बरसाएंगे, तो चन्द्र कन्या राशि में संचरण करेंगे। वहीं इस दिन हस्त नक्षत्र का संयोग भी रहने वाला है, जिसके स्वामी चंद्रमा है। ऐसे में ग्रहों की कृपा से कुछ राशि वालों को करियर, व्यापार और रिश्तों में शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती हैं।
06:00 AM, 26-Aug-2025
इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 25 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से हो रही है। इसका समापन 26 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर माना जा रहा है। इस तरह से उदयातिथि के आधार पर 26 अगस्त 2025 को हरतालिका तीज मान्य है।
05:54 AM, 26-Aug-2025
Hartalika Teej Live: हरतालिका तीज आज, जानें शिव गौरी पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, कथा और मंत्र
Hartalika Teej 2025 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Paran Time: हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का त्योहार मनाया जाता है। मुख्य रूप से उत्तर भारत के कई राज्यों में सुहागिन स्त्रियां इस व्रत का पालन करती हैं। इसे कठिन व्रतों में गिना जाता है क्योंकि इसमें दिनभर बिना जल और अन्य ग्रहण किए उपवास रखा जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं अच्छे और मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती के कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए इस दिन महिलाएं श्रृंगार कर शाम के समय भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की विधिवत पूजा करती हैं। माना जाता है कि इस व्रत और पूजा को करने से सौभाग्य, वैवाहिक सुख और जीवन में समृद्धि की प्राप्ति होती है।