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आदित्य कृपलानी के निर्देशन में बनी टिकली और लक्ष्मी बम ने लोगों का दिल जीत लिया था. मुंबई की वेश्याओं के जीवन पर आधारित ये एक विचार करने वाली फिल्म है. यह महिलाओं के संघर्ष को दर्शाती है.
नई दिल्ली. ‘टिकली एंड लक्ष्मी बॉम्ब’ एक हैरान करने वाली फिल्म है, जो मुंबई के रेड लाइट एरिया में वेश्याओं के लाइफ पर बेस्ड है. आदित्य कृपलानी के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म उनके 2015 में प्रकाशित नाम के उपन्यास पर आधारित है.

साल 2017 में रिलीज हुई ये फिल्म अब ओटीटी पर ट्रेंड कर रही है. 31 जुलाई 2018 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज, हुई यह फिल्म हिंदी ऑडियो में अंग्रेजी सबटाइटल्स के साथ स्ट्रीम हो रही है. 2 घंटे 30 मिनट की इस फिल्म को IMDb पर 7.0/10 की रेटिंग मिली है.

इस फिल्म की कहानी का खास विषय मुंबई के एस.वी. रोड पर वेश्याओं का जीवन है. 40 वर्षीय लक्ष्मी मालवणकर लगभग दो दशकों से इस पेशे में हैं. जीवन से निराश होकर, वह पल्लू नाम के एक आदमी के प्रति वफादार हो जाती है. पल्लू इलाके की लड़कियों को अपने वश में रखता है और उनकी रक्षा करने का दावा करता है. दूसरी , वह दूसरे पुरुषों के साथ मिलकर उनका शोषण भी करता है.

इस फिल्म की कहानी का खास विषय मुंबई के एस.वी. रोड पर वेश्याओं का जीवन है. 40 वर्षीय लक्ष्मी मालवणकर लगभग दो दशकों से इस पेशे में हैं. जीवन से निराश होकर, वह पल्लू नाम के एक आदमी के प्रति वफादार हो जाती है. पल्लू इलाके की लड़कियों को अपने वश में रखता है और उनकी रक्षा करने का दावा करता है. दूसरी , वह दूसरे पुरुषों के साथ मिलकर उनका शोषण भी करता है.

लेकिन टिकल एक विद्रोही युवती है. वह पुरुष वर्चस्व पर सवाल उठाती है और इस बात पर शक जताती है कि जो सुरक्षा देने का वादा करते हैं लेकिन खुद ही शिकारी बन जाते हैं, मुंबई की दो सेक्स वर्कर यह तय करती हैं कि वे इस धंधे से पुरुषों को बाहर कर देंगी और एक सहकारी संस्था शुरू करेंगी, जिसे महिलाएं चलाएंगी और महिलाओं के लिए होगी. इस तरह वे खुद ही सेक्स ट्रेड का संचालन करती हैं.

एक हिंसक घटना के बाद, दोनों मिलकर ‘टिकली और लक्ष्मी बम’ नाम से एक महिला सहकारी संस्था बनाती हैं. इस व्यवस्था में, बिचौलियों का सफाया कर दिया जाता है और वेश्याएं अपने ग्राहकों और अपनी कमाई पर खुद कंट्रोल रखती हैं. कस्टूमर को अट्रेक्ट करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने के अलावा, वे सुरक्षा और सम्मान को भी प्राथमिकता देने लगती हैं.

शुरुआत में यह सहकारी व्यवस्था कामयाब होती है, लेकिन जैसे-जैसे और वेश्याएं जुड़ती जाती हैं, धंधा फैलता जाता है. लेकिन मथरे, उसके साथी और भ्रष्ट पुलिव्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं. पुतुल पर हिंसक हमले होते हैं. लक्ष्मी अराजकता में फंस जाती है. आखिरकार कहानी एक ऐसे मोड़ पर आ जाती है, कि टिकली और लक्ष्मी का विद्रोह किस हद तक सफल होगा? उनके द्वारा खड़ी की गई मुश्किलें क्या परिणाम लेकर आएंगी? यह फिल्म में बेहतरीन तरीके से दिखाया गया है.

कुल मिलाकर, ‘टिकली एंड लक्ष्मी बॉम्ब’ एक अनोखी कहानी है जो महिला सशक्तिकरण और पुरुष प्रधान के विरोध में बात करती हैं. वेश्याओं के वास्तविक जीवन के संघर्षों को गहराई से दर्शाती यह फिल्म, नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.