साउथ-वेस्ट डिस्ट्रिक्ट की साइबर सेल पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर ठग गैंग का पर्दाफाश किया है, जिसका सीधा लिंक कंबोडिया में बैठे फ्रॉडस्टर्स से जुड़ा मिला. इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान माणिक अग्रवाल (25), अब्दुल्ला उर्फ लूसिफर (23), मोहम्मद आमिर उर्फ रॉकी (26) और शानमिया खान के रूप में हुई है.
ये सभी यूपी के बुलंदशहर, अलीगढ़ और एमपी के इंदौर के रहने वाले हैं. पुलिस ने इनके कब्जे से चार हाई-टेक मोबाइल फोन बरामद किए हैं. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गैंग फर्जी ट्रेडिंग और IPO ऐप्स के जरिए लोगों से करोड़ों की ठगी कर चुका है.
व्हाट्सएप ग्रुप से रची गई ठगी की साजिश
डीसीपी अमित गोयल के मुताबिक इस पूरे गोरखधंधे का पता तब चला जब शिकायतकर्ता टी. सिंह को 10 जून 2025 को “101 Shoonya Wealth Circle” नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया. खुद को किसी बड़े निवेश अधिकारी का असिस्टेंट बताने वाली अनाया कपूर ने उन्हें सुनिश्चित मुनाफे और 34 लाख रुपये के फर्जी IPO आवंटन के वादों के साथ लुभाया और आरोपी गैंग ने पहले पीड़ित के बैंक खाते में 5,000 रुपये भेजकर भरोसा जीतने की कोशिश की.
बाद में ऐप पर फर्जी IPO अलॉटमेंट और झूठी लोन एंट्री दिखाकर पीड़ित पर दबाव बनाया. जिस पर 11 अगस्त को धमकियों और झूठे पेनल्टी के डर से शिकायतकर्ता ने 8.04 लाख रुपये IDFC बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए. लेकिन इसके बाद उनका पैसा फंस गया और निकासी ब्लॉक कर दी गई. ठगी का एहसास होने पर उन्होंने इसकी शिकायत साइबर पुलिस को दी.
ऐसे पकड़ में आए 4 आरोपी
डीसीपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक और एसीपी विजय पाल तोमर की देखरेख में एक विशेष टीम का गठन किया गया. तकनीकी निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट और मनी ट्रेल की मदद से पुलिस ने सबसे पहले आरोपी माणिक अग्रवाल को बुलंदशहर से दबोचा. पूछताछ में सामने आया कि गैंग में अब्दुल्ला उर्फ लूसिफर और मोहम्मद आमिर उर्फ रॉकी भी शामिल हैं. दोनों को छापेमारी के दौरान खुर्जा और अलीगढ़ से गिरफ्तार किया गया. जिसके बाद शानमिया खान को पुलिस ने इंदौर से दबोचा. वह विदेश में बैठे जैक नाम के हैंडलर से सीधा संपर्क रखता था और फर्जी खातों की सप्लाई करता था.
कंबोडिया में बैठा मास्टरमाइंड, दिल्ली से वारदात को दे रहे थे अंजाम
गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन से ऐसे चैट्स और डेटा मिले, जो सीधे कंबोडिया स्थित ऑपरेटर्स से जुड़े हुए हैं. सीसीटीवी फुटेज से भी पता चला कि आरोपी दिल्ली के होटलों में ठहरकर ठगी का संचालन करते थे. पुलिस के मुताबिक, माणिक अग्रवाल बी.कॉम ग्रेजुएट है और प्राइवेट कंपनी में अकाउंटेंट का काम करता है. उसने अपने बैंक खाते का इस्तेमाल इस ठगी में किया था.
वहीं, अब्दुल्ला उर्फ लूसिफर लॉ स्टूडेंट है और साइबर कैफे चलाता है. वह फ्रॉड अकाउंट टेस्टिंग करता था. मोहम्मद आमिर उर्फ रॉकी ने 12वीं तक पढ़ाई की है और फ्रॉड अकाउंट्स चलाता और कमीशन लेता था. जबकि शानमिया खान स्क्रैप डीलर है और विदेश में बैठे जैक से जुड़ा हुआ था और वह अकाउंट सप्लाई करने का काम करता था.
16 शिकायतें और 3 करोड़ की ठगी का खुलासा
पुलिस जांच में IDFC बैंक खाते से जुड़े 16 NCRP कम्प्लेंट्स मिले हैं, जिनमें तीन दिनों के भीतर करीब 3 करोड़ रुपये के फर्जी ट्रांजैक्शन हुए हैं. ये शिकायतें कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ी हैं. फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और विदेश में बैठे मास्टरमाइंड जैक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. पुलिस के मुताबिक यह साइबर फ्रॉड नेटवर्क देशभर में सक्रिय है और कई लोगों को अब तक अपना शिकार बना चुका है. इस मामले में आगे की जांच जारी है.










