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BR chopra Baghbaan Film : बॉलीवुड फिल्मों में पर्दे के पीछे कहानी बिल्कुल अलग होती है. पर्दे पर जो हमें नजर आता है, कई बार वह एक्टर-एक्ट्रेस, प्रोड्यूसर-डायरेक्टर की जिंदगी का भी सच होता है. 1990 में आई ‘आशिकी’ फिल्म की स्टोरी तो डायरेक्टर महेश भट्ट की लव लाइफ पर ही बेस्ड थी. ऐसे ही 2003 में एक फिल्म रिलीज हुई थी जिसे बहुत सराहा गया था. भारतीय समाज के संस्कारों को फिल्म में अहमियत दी गई थी. इस फिल्म का एक गाने का मुखड़ा सुनते ही प्रोड्यूसर रो पड़े थे. उन्होंने गीतकार का हाथ पकड़ लिया था. आइये जानते हैं यह मार्मिक किस्सा……
बॉलीवुड फिल्मों के मेलोडियस सॉन्ग हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं. हमारे मन-मस्तिष्क में कई तरह की कल्पनाओं को जन्म देते हैं. इन गानों के पीछे की कहानी कई बार उतनी ही मार्मिक होती है. 2003 में बीआर चोपड़ा ने एक फिल्म प्रोड्यूस की थी. इस फिल्म का नाम था : बागबान. फिल्म का निर्देशन उनके बेटे रवि चोपड़ा ने किया था. म्यूजिक आदेश श्रीवास्तव का था. फिल्म को बहुत सराहा गया था. इस फिल्म के गीत समीर अंजान ने लिखे थे. फिल्म के एक गाने का मुखड़ा सुनते ही प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा फफक-फकरकर रो पड़े थे. गीतकार समीर ने एक इंटरव्यू में यह मार्मिक किस्सा सुनाया था.

समीर ने आगे बताया, ‘उस समय बीआर चोपड़ा 90 साल के थे. गाने को सुनते ही उनके मन में यादें उमड़ने लगीं. उनकी पत्नी प्रकाश चोपड़ा का निधन हो गया था. बीआर चोपड़ा अपनी पत्नी को बहुत प्यार करते थे. उन्होंने मुझसे कहा कि इस गाने में उनकी जिंदगी समाई हुई है. उन्होंने मुखड़ा सुनते ही गाना पास कर दिया और फिल्म में रख लिया. कभी-कभी तो वो भूल भी जाते थे. फिर भी उन्होंने गाने को सुनकर अपना रिएक्शन दिया. आदेश श्रीवास्तव ने बहुत ही खूबसूरत धुन बनाई थी. थिएटर पर इस गाने को सुनकर लोग उसी तरह रोए, जैसे बीआर चोपड़ा रोए थे. इसीलिए वह लीजेंडरी थे. उन्हें पता चल जाता था कि कौन सा गाना कितना वजन रखता है, कितना अच्छा है, उसका रिएक्शन क्या होगा?’

बागवान फिल्म में यह गाना अमिताभ और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया है. अमिताभ बच्चन और अल्का यागनिक ने अपनी आवाज दी है. इस गाने को बहुत पसंद किया गया था. फिल्म का यह गाना कपल के निश्छल प्रेम को दर्शाता है.

बीआर चोपड़ा की यह अंतिम फिल्म थी जो 3 अक्टूबर 2003 को रिलीज हुई थी. बागबान में पारिवारिक मूल्यों, माता-पिता और संतान के रिश्तों को समझाने वाली एक मूवी पर्दे पर आई थी. नाम था : बागवान. यह फिल्म शुरुआत के 4 दिन नहीं चली थी. फिल्म को रवि चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था. बीआर चोपड़ा ने प्रोड्यूस किया था. ‘बागबान’ फारसी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘बाग का रखवाला’.

बीआर चोपड़ा की पत्नी प्रकाश चोपड़ा ने एक बार अपने एक इंटरव्यू में बीआर चोपड़ा को एक बहुत ही इंसान बताते हुए कहा था कि वो बहुत अच्छे पति हैं. वह हमेशा खुश रहना चाहते हैं, इसलिए समाज को संदेश देने वाली फिल्में बनाते हैं. उन्होंने जितनी भी फिल्में बनाईं, उनमें एक खास तरह के मैसेज को लोगों तक बहुत ही खूबसूरती के साथ पहुंचाया. वह सुबह 9 बजे से शूटिंग शुरू करते थे और शाम 6 बजे तक ही काम करते थे. उनकी शूटिंग बहुत ही प्लांड तरीके की होती हैं.

बागबान फिल्म से अमिताभ बच्चन का करियर फिर से पटरी पर लौटा था. फिल्म का म्यूजिक बहुत अच्छा था और इसके गाने बहुत पॉप्युलर हुए थे. इन पॉप्युलर गानों में ‘पहले कभी ना मेरा हाल ऐसा हुआ…कुछ तो होने लगा..’ ‘होली खेलें रघुबीरा अवध में..’ ‘मैं यहां तू वहां, जिंदगी है कहां..’ ‘चली चली फिर चली-चली..चली इश्क दी हवा चली, शामिल थे. 10 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने इंडिया में फिल्म ने 20 करोड़ का बिजनेस किया था. फिल्म ने वर्ल्ड वाइड 43 करोड़ का कलेक्शन किया था.

फिल्म मे एंडिंग सीन बहुत ही दिल को छू लेने वाला था. अमिताभ बच्चन की स्पीच ने दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिए थे. यही फिल्म के लिए सबसे बड़ा टर्निंग पाइंट साबित हुई. यह फिल्म चार दिन तक नहीं चली थी. पूरे चार दिन फिल्म ने रफ्तार पकड़ी थी. सिनेमा फिल्म के डायरेक्टर रवि चोपड़ा की पत्नी रेनू चोपड़ा ने खुद इसका खुलासा किया था.

<br />बागबान फिल्म को 2003 में चार अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था. फिल्म समाज को गहरा संदेश देने, बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करने, उनकी देखभाल और प्यार करने का मैसेज देने में कामयाब हुई थी.
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