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Jatadhara Movie Review: सोनाक्षी सिन्हा और सुधीर बाबू स्टारर फिल्म ‘जटाधारा’ 7 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. अगर आप इस फिल्म को देखने का प्लान बना रहे हैं तो उससे पहले जान लीजिए कैसी है फिल्म? ‘जटाधारा’ विज्ञान, आस्था और प्राचीन रहस्यों का बेहतरीन मेल दिखाती है, जो इसे बाकी फिल्मों से अलग और खास बनाता है.
जटाधारा 3.5
Starring: सुधीर बाबू, सोनाक्षी सिन्हा, दिव्या खोसला, शिल्पा शिरोडकर, इंदिरा कृष्णा, राजीव कनकला और अन्यDirector: वेणकट कल्याण और अभिषेक जैसवालMusic: राजीव राज
अगर आप सुपरनैचुरल और माइथोलॉजिकल फिल्मों के शौकीन हैं तो आपने अक्सर देखा होगा कि कई फिल्मों में सिर्फ डर और सस्पेंस पर जोर होता है, लेकिन जटाधारा इन सबको एक नए अंदाज में पेश करती है. ज़्यादातर फिल्मों में रहस्य और डर तक ही कहानी सीमित रहती है. वहीं जटाधारा विज्ञान, आस्था और प्राचीन रहस्यों का बेहतरीन मेल दिखाती है, जो इसे बाकी फिल्मों से अलग और खास बनाता है. कहना होगा कि जी स्टूडियोज और प्रेरणा अरोड़ा की पेशकश ‘जटाधारा’ दूसरे सुपरनैचुरल और माइथोलॉजिकल फिल्मों से बिल्कुल अलग और अनोखी है.
फिल्म की कहानी शुरू होती है एक प्राचीन ‘पिशाच बंधन’ से, जिसे खोए हुए खजानों की रक्षा के लिए बनाया गया था. जब कोई लालची इंसान इसे तोड़ देता है तो धन पिशाचिनी (सोनाक्षी सिन्हा) जाग उठती है. अब घोस्ट हंटर शिवा (सुधीर बाबू) को उस रहस्यमय और अलौकिक दुनिया का सामना करना पड़ता है, जिसे वह पहले कभी स्वीकार नहीं करते थे. धीरे-धीरे शिवा अपने तर्क और शक को छोड़कर विश्वास और आध्यात्मिक अनुभव की ओर बढ़ता है. कहानी में ऐसे कई पल हैं जब शिवा अंजान ताकतों से टकराता है, जो रोमांच और डर दोनों का मेल पैदा करते हैं और दर्शक को पूरी तरह स्क्रीन से बांधे रखते हैं.
सुधीर बाबू ने शिवा के किरदार में अपनी पूरी ताकत और सहजता दिखाई है, जिससे उनका रोल बिल्कुल रियल लगता है. बता दें कि सोनाक्षी सिन्हा पहली बार तेलुगु स्क्रीन पर धना पिशाची के रूप में अपनी जबरदस्त एंट्री की है और उनका हाव-भाव, आंखों की नजाकत और डर पैदा करने वाला अंदाज फिल्म में गहराई जोड़ देता है. वहीं, दूसरी तरफ दिव्या खोसला सितारा के रूप में शांत, खूबसूरत और आकर्षक नजर आती हैं, जबकि शिल्पा शिरोडकर और इंदिरा कृष्णा अपने रोल में इमोशंस का तड़का लगाते हैं. राजीव कनकला, रवि प्रकाश और सुभालेखा सुधाकर की बात करें तो उन्होंने अपनी परफॉर्मेंस से कहानी को रियल बनाते हैं.
वेणकट कल्याण ने स्क्रीनप्ले में कमाल कर दिया है. पुराने किस्सों को उन्होंने आज के समय की सोच के साथ जोड़ा है, जिससे हर सीन में रोमांच और रहस्य बना रहता है. कहानी का हॉट पॉइंट है पिशाच बंधन, जो खजाने की रक्षा के लिए आत्माओं को बांधता है. डायलॉग्स इतने आसान और सीधे हैं कि आप तुरंत जुड़ जाते हैं, फिर भी इनका असर लंबे समय तक रहता है. समीर कल्याणी का कैमरा वर्क वाकई शानदार है. मंदिर के पेचीदा इंटीरियर्स, कीआरस्क्यूरो लाइटिंग और केरल के हवाई शॉट्स कहानी को जीवंत और रोमांचक बना देते हैं. हर अनुष्ठान का सीन अपने आप में खास है.
राजीव राज का संगीत और साउंड डिजाइन फिल्म में एक अलग ही माहौल बनाता है. हर सीन में तनाव और रहस्य को महसूस करना आसान हो जाता है. क्लासिकल राग और इलेक्ट्रॉनिक बीट्स का सही मिश्रण फिल्म को पूरी तरह जीवंत बनाता है. “शिव स्तोत्रम” और “पल्लो लटके” जैसे गाने कहानी में जोश और भावनाओं की चमक जोड़ते हैं. वहीं, स्टंट और एक्शन भी दर्शकों को रोमांच में डुबो देते हैं. मंदिर के डांस सीन में दिव्या खोसला की अनुष्ठानिक मूवमेंट्स बहुत आकर्षक हैं, और सुधीर बाबू के भूतों के सीन, हथियारों के मुकाबले और अंतिम क्लाइमैक्स सीन फिल्म को और यादगार बना देते हैं. मार्शल आर्ट्स और अलौकिक ताकतों का यह साथ आना फिल्म के थ्रिल को बढ़ाता है.
हालांकि, फिल्म की कमी की बात की जाए तो वो है इसकी गति है, जो थोड़ा खटकता है. फिल्म का पहला भाग धीमी गति से चलता है, लेकिन इंटरवल के बाद गति पकड़ लेता है. ‘जटाधारा’ वेणकट कल्याण और अभिषेक जैसवाल की एक ऐसी फिल्म है जो आम थ्रिलर से बिल्कुल अलग है. इसमें डर, रहस्य और आध्यात्मिकता का मिश्रण है, जो हर सीन को रोमांचक बनाता है. अगर आप एक ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको सस्पेंस में रखे और रोमांच का पूरा मजा दे, तो जटाधारा मिस नहीं करनी चाहिए. मेरी ओर से फिल्म को 5 में 3.5 स्टार.

Pratik Shekhar is leading the entertainment section in News18 Hindi. He has been working in digital media for the last 12 years. After studying from Makhanlal Chaturvedi National University of Journalism and Co…और पढ़ें
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