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सचिन देव बर्मन यानी एसडी बर्मन ने भारतीय सिनेमा के लिए अमूल्य संगीत रचा. यह महान संगीतकार अपने समय के सबसे बहुमुखी और प्रतिभाशाली संगीतकारों में से एक थे. चाहे वह बहुत प्रसिद्ध ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी’ हो या ‘महबूबा, महबूबा’ जैसा जोशीला गाना, उनके गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं.
एसडी बर्मन ने अपने चार दशक लंबे करियर में, उन्होंने ‘प्यासा’, ‘कागज के फूल’, ‘बहारें फिर भी आएंगी’, और ‘गाइड’ जैसी कई फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया. उनकी गिनती भारते के बेस्ट म्युजिशियंस में होती है, लेकि उन्हें भी रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था.

एसडी बर्मन के एक गाने को गुरु दत्त ने ‘कमजोर’ कहकर खारिज कर दिया, जिससे दोनों के बीच एक मौन दरार पैदा हो गई. गुरु दत्त ने जब धर्मेंद्र के साथ फिल्म ‘बहारें फिर भी आएंगी’ बनाने का फैसला किया, तो उन्होंने एसडी बर्मन को फिल्म का म्युजिक तैयार करने के लिए चुना.

जब एसडी बर्मन गाना बना रहे थे, तब उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें आराम करने की सलाह दी गई. उन्हें उम्मीद थी कि गुरु दत्त इस कठिन समय में उनका सपोर्ट करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने, एसडी बर्मन को फिल्म से हटा दिया और एक नए संगीतकार की तलाश शुरू कर दी, जिससे बर्मन को गहरा आघात पहुंचा.
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गुरु दत्त ने पहले से रिकॉर्ड किए गए टाइटल ट्रैक को भी रिजेक्ट कर दिया, जिसे मोहम्मद रफी ने गाया था. उन्होंने इस गाने को कमजोर कहकर रिजेक्ट कर दिया और फिर ओपी नैय्यर से फिल्म का म्युजिक तैयार करने के लिए संपर्क किया.

समय के साथ, एसडी बर्मन की सेहत में सुधार हुआ और वे काम पर लौट आए. उन्होंने आखिर रिजेक्ट किए गए म्युजिक को देव आनंद की साल 1967 में आई फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ में इस्तेमाल किया. जो गाना मूल रूप से ‘बहारें फिर भी आएंगी’ में रफी द्वारा गाया गया था, उसे किशोर कुमार की आवाज में नया जीवन मिला.

यह गाना ‘ये दिल ना होता बेचारा’ तुरंत हिट हो गया. गाने का ऑरिजनल वर्जन कभी सामने नहीं आया और गुरु दत्त इसके सफलता को देखने के लिए जीवित नहीं रहे. उन्हें अक्टूबर 1964 में अपने कमरे में मृत पाया गया. उनकी उम्र मात्र 39 वर्ष थी.

वहीं, विजय आनंद के डायरेक्शन में बनी ‘ज्वेल थीफ’ 1967 में सिनेमाघरों में आई और बॉक्स ऑफिस पर हिट रही. इसमें देव आनंद के अलावा अशोक कुमार, वैजयंतीमाला, तनुजा, हेलेन, फरयाल, अंजू महेंद्रू, नजीर हुसैन और सप्पू भी थे.

एसडी बर्मन का 1975 में निधन हो गया. एसडी बर्मन, ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘मिली’ के गाने ‘बड़ी सूनी सूनी है’ की रिहर्सल के बाद कोमा में चले गए थे. इसके बाद वह कभी काम पर नहीं लौट सके. लेकिन उनके गाने आज भी लोगों की जुबां पर हैं..
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