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Bollywood Cult Hit Movie : यह सच है कि बॉलीवुड में फिल्मों की सफलता और असफलता को बॉक्स ऑफिस पर हुए प्रदर्शन के आधार पर आंका जाता है लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती है जो कालजयी होती हैं. समय भी इन्हें अपने बंधन में नहीं बांध पाता. ये फिल्में हमेशा के लिए दर्शकों के जेहन में बस जाती हैं. इन फिल्मों के एक-एक सीन, एक-एक डायलॉग दर्शकों की जुबान पर रट जाते हैं. ऐसी फिल्मों का एक खास दर्शक वर्ग होता है. एक फैन फॉलोइंग होती है. ये फैंस एक बार नहीं बल्कि 50-50 बार ऐसी फिल्मों को देखते हैं. हर बार उन्हें फिल्म नई सी लगती है. ऐसी फिल्में कई साल में एक-दो बार ही बन पाती हैं. 1998 में ऐसी ही एक फिल्म आई थी. यह फिल्म शुरुआत में फ्लॉप समझी गई थी, बाद में बहुत बड़ी हिट निकली. इस फिल्म ने बॉलीवुड का ट्रेंड ही बदल दिया. रियलिस्टिक फिल्मों का नया दौर शुरू किया. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…
वैसे तो 1998 में बॉक्स ऑफिस पर रहा लव स्टोरी पर बेस्ड फिल्मों का बोलबाला रहा था. कुछ-कुछ होता है, प्यार तो होना ही था, सोल्जर, बड़े मियां छोटे मियां, और प्यार किया तो डरना क्या जैसी टॉप 5 फिल्में थीं. इसी साल जुलाई महीने में क्राइम पर बेस्ड एक ऐसी फिल्म आई जिसे वर्षों से याद किया जा रहा है. यह फिल्म कल्ट मूवी साबित हुई. इस फिल्म को रामगोपाल वर्मा ने बनाया था. नाम था सत्या. सत्या फिल्म ने मनोज बाजपेई को हमेशा-हमेशा के लिए भीखू म्हात्रे की पहचान दी. इस फिल्म को शुरुआत में फ्लॉप समझा गया. पूरे एक हफ्ते तक दर्शकों के लिए तरसती रही. फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ की दर्शकों की भीड़ उमड़ने लगी. थिएटर फुल होने लगे. इस फिल्म का प्लॉट 1972 में आई हॉलीवुड मूवी द गॉडफादर से इंस्पायर्ड था. फिल्म की कहानी मुंबई अंडरवर्ल्ड पर भी बेस्ड थी. इस मूवी का एक-एक सीन, लोकेशन इतना रियल था कि दर्शक असली और नकली का फर्क भूल गए थे.

<br />साल 1998 की बात है. महीने की शुरुआत में 3 जुलाई को रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘सत्या’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई. इस फिल्म के एक हफ्ते बाद 10 जुलाई को गोविंदा-रवीना टंडन की कॉमेडी फिल्म दूल्हे राजा, 17 जुलाई को विधु विनोद चोपड़ा की करीब, 24 जुलाई को अंगारे और प्यार तो होना ही था जैसी फिल्में रिलीज हुई थीं. कॉमेडी-एक्शन-रोमांटिक फिल्मों के बीच सत्या को शुरुआत में दर्शक ही नहीं मिले. मेकर्स को लगा कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी. अचानक एक हफ्ते बाद चमत्कार हुआ और सत्या मूवी ने रफ्तार पकड़ी. प्यार तो होना ही था जहां इस साल की दूसरे सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी, वहीं सत्या का जादू साल-दर-साल बढ़ता गया. आज यह फिल्म बेस्ट क्राइम मूवी में शुमार है. सत्या फिल्म 1998 में बॉक्स ऑफिस पर पैसे कमाने के मामले में छठवें नंबर पर रही.

सत्या फिल्म की कहानी फिल्मी होकर भी इतनी रियल लगती है कि हर कोई उससे पहले सीन से जुड़ जाता है. ‘मुंबई का किंग कौन? भीखू म्हात्रे.’ यह डायलॉग दर्शकों के दिल-दिमाग में आज भी ताजा है. यह बात अलग है कि जब मनोज बाजपेयी ने यह डायलॉग बोला था तो अनुराग कश्यप उनके पैर पकड़े हुए थे. इस फिल्म ने राम गोपाल वर्मा, अनुराग कश्यप और सौरभ शुक्ला की तिकड़ी के लिए सफलता के नए दरवाजे खोले. बॉलीवुड में रियलिस्टिक सिनेमा का ट्रेंड स्थापित किया. अनुराग कश्यप ने आगे चलकर हार्ड हिटिंग रियल्टी पर अपनी फिल्में बनाईं.
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सत्या फिल्म के ज्यादातर एक्टर्स नए थे. रामगोपाल वर्मा ने आगे चलकर अंडरवर्ल्ड की दुनिया पर कंपनी जैसी एक और कल्ट मूवी बनाई. सत्या फिल्म को अनुराग कश्यप और सौरभ शुक्ला ने मिलकर लिखा था. फिल्म में अंडरवर्ल्ड की दुनिया को करीब से दिखाया गया था. सत्या एक ऐसी फिल्म है जो थिएटर्स-टीवी-यूट्यूब पर मूवी खत्म होने के बाद समाप्त नहीं होती. दरअसल यह फिल्म यहीं से शूरू होती है. भीखू म्हात्रे, कल्लू मामा, सत्या के किरदार रह-रहकर दिल-दिमाग में आते हैं.

सत्या फिल्म में मनोज बाजपेयी, जेडी चक्रवर्ती, सौरभ शुक्ला, परेश रावल, उर्मिला मातोंडकर, गोविंद नामदेव, शैफाली शाह, नीरज वोरा, सुशांति सिंह अहम भूमिकाओं में थे. विशाल भारद्वाज के संगीत निर्देशन में बने गाने ‘सपनों में मिलती है, वो कुड़ी मेरी सपनों में मिलती है’ को भला कौन भुला सकता है. यह गाना आज भी डीजे पर बजाया जाता है.

मनोज बाजपेयी ने ही अनुराग कश्यप और रामगोपाल की दोस्ती करवाई थी. पहली मुलाकात में तीनों ने मिलकर शराब पार्टी की. इस दौरान अनुराग कश्यप ने रामगोपाल वर्मा की फिल्मों की आलोचना की. अनुराग के इस व्यवहार से मनोज डर गए थे लेकिन रामगोपाल वर्मा को अपनी आलोचना पसंद आई. तीनों की दोस्ती और गहरी हो गई.

सत्या फिल्म की कहानी लिखने के लिए अनुराग कश्यप ने सौरभ शुक्ला से संपर्क किया था. दोनों की मुलाकात दिल्ली में हुई थी. दरअसल, अनुराग सत्या की स्टोरी को पूरा नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में रामगोपाल वर्मा ने उनसे एक और राइटर तलाशने के लिए कहा. अनुराग ने उनसे संपर्क किया. रामू ने कल्लू मामा का रोल ऑफर किया और कहानी सुनाई. सौरभ कहानी लिखने के मूड में नहीं थे लेकिन रोल मिलने की बात पर खुश हो गए.

सत्या फिल्म मनोज बाजपेयी के करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी. भीखू म्हात्रे का नाम उनके साथ हमेशा के लिए जुड़ गया. मनोज ने भीखू म्हात्रे के आइकॉनिक रोल के लिए खास तैयारी की थी. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि यह रोल उन्होंने अपने शहर बेतिया के एक बड़े क्रिमिनल से इंस्पायर्ड होकर किया था. बदन में नीचे बनियान, शर्ट के खुले बटन…यह सबकुछ उन्होंने अपने किरदार में डाला. दिलचस्प बात यह है कि सत्या फिल्म में रोल मिलने की जानकारी मनोज बाजपेयी ने किसी को नहीं दी थी.
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