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Amitabh Bachchan Rekha Hit Movies : बॉलीवुड की कई फिल्मों में तवायफों की जिंदगी दिखाई गई. गुरुदत्त की आइकॉनिक फिल्म प्यासा (1957) में वहीदा रहमान ने गुलाबो नाम की तवायफ का रोल निभाया था. यह फिल्म हिंदी सिनेमा के इतिहास की मास्टरपीस फिल्म मानी जाती है. 70-80 के दशक में एक एक्ट्रेस ने सिर्फ दो साल के अंतराल में चार फिल्मों में तवायफ का रोल किया. दिलचस्प बात यह है कि इन चार फिल्मों में से दो मूवी ब्लॉकबस्टर रहीं. एक फ्लॉप होकर भी दर्शकों के दिल में उतर गई और आज यह फिल्म कल्ट मूवी में शुमार हैं. ये चारों फिल्में कौन सी हैं और वो एक्ट्रेस कौन सी है, आइये जानते हैं……
<br />बॉलीवुड की कई फिल्मों की स्क्रिप्ट में तवायफ का इमोशनल कर देने वाला किरदार जब जोड़ा गया तो सिनेमाघरों में दर्शक भी हैरान रह गई. बॉलीवुड की एक लेडी सुपरस्टार ने सिर्फ दो साल के भीतर चार फिल्मों में तवायफ का रोल करके सबको चौंका दिया था. हर रोल बहुत ही खूबसूरती से लिखा गया था. इन चार फिल्मों में से दो मूवी बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रहीं जबकि एक फिल्म फ्लॉप होकर भी दर्शकों का दिल जीत ले गई. यह फिल्म आज कल्ट क्लासिक मूवी की लिस्ट में शुमार है. इसकी पॉप्युलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका रीमेक भी बनाय गया है. ये चारों फिल्में थीं : मुकद्दर का सिकंदर (1978), कर्मयोगी (1978), सुहाग (1979) और उमराव जान (1981). इन चारों फिल्मों में तवायफ का रोल खूबसूरत अदाकारा रेखा ने निभाया था. उमराव जान तो हमेशा के लिए उनकी पहचान बन गई.

सबसे पहले 27 अक्टूबर 1978 को रिलीज हुई फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ की बात करते हैं. 1978 का साल सही मायने में अमिताभ का था. इस साल अमिताभ की कई बड़ी फिल्में आईं. वो पर्दे पर छा गए. 1978 में त्रिशूल और डॉन में उन्होंने शानदार किरदार निभाया था. डॉन के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला. इसी साल अमिताभ की एक और फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ आई, जो कि इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. फिल्म की कहानी विजयकांत शर्मा ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले विजय कौल ने लिखा थे और दिल को झकझोर देने वाले डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. प्रकाश मेहरा फिल्म के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर थे. गीतकार अनजान-प्रकाश मेहरा थे. संगीतकार कल्याण जी – आनंद जी थे. प्रकाश मेहरा की यह सबसे बेस्ट फिल्म मानी जाती है. सबसे ज्यादा कामयाब भी यही फिल्म रही. फिल्म में रेखा ने जोहरा बाई नाम की तवायफ का रोल निभाया था.

प्रकाश मेहरा दिलीप कुमार की देवदास और राज कपूर की ‘संगम’ फिल्म से बहुत इंस्प्यार्ड थे. इन दोनों फिल्मों की कहानी को मिलाकर कहानी तैयार की गई. फिल्म के सदाबहार गानों ने मूवी में चार चांद लगा दिए. रेखा पर ‘सलाम-ए-इश्क मेरी जां, जरा कबूल कर लो, तुम हमसे प्यार करने की जरा सी भूल कर लो’ आइकॉनिक सॉन्ग फिल्माया गया था. सच्चा प्यार किसी को नहीं मिलता, फिल्म का बेसिक आइडिया इसी पर बेस्ड था. फिल्म में दिखाया गया है कि अमजद खान रेखा को एकतरफा प्यार करते हैं. रेखा अमिताभ को प्यार करती है. अमिताभ बचपन की फ्रेंड राखी को प्यार करते हैं और राखी विनोद खन्ना को प्यार करती हैं. फिल्म में अमिताभ का डेथ सीन दर्शकों की आंखों में आंसू ला देता है. फिल्म का बजट 1 करोड़ था और मूवी ने 8.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह मूवी बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी.
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मुकद्दर का सिकंदर अमिताभ बच्चन-विनोद खन्ना की जोड़ी की आखिरी फिल्म थी. फिर दोनों ने साथ में काम नहीं किया. इस फिल्म के लिए विनोद खन्ना ने अमिताभ बच्चन के बराबर ही पैसे लिए थे. फिल्म की शूटिंग के दौरान सीन के मुताबिक, अमिताभ बच्चन ने गुस्से में गिलास फेंका जो विनोद खन्ना की ठोड़ी पर लगा. उन्हें चोट आई और छह टांके लगाने पड़े. फिल्म के दौरान अमिताभ बच्चन ‘ओ साथी रे’ गाना गाने से पहले एक स्पीच देते हैं. यह स्पीच कादर खान ने 16 पेज में लिखी थी. यह उनकी जिंदगी के दर्द पर थी लेकिन अमिताभ ने जब 16 पेज की स्पीच देखी तो उन्होंने इस सीन को करने से इनकार कर दिया. कादर खान सेट पर आए और पूरी स्पीच सुना दी. यह देखकर अमिताभ भी भावुक हो गए और कादर खान को गले लगा लिया.

15 दिसंबर 1978 को रेखा-राजकुमार, जीतेंद्र-माला सिन्हा स्टारर एक एक्शन ड्रामा फिल्म आई थी जिसका नाम ‘कर्मयोगी’ था. स्क्रीनप्ले बिनॉय चटर्जी-सीजे पावरी, डायलॉग सागर सरहदी ने लिखे थे. गीतकार वर्मा मलिक ने संगीतकार कल्याण जी -आनंद जी थे. प्रोड्यूसर अनिल सूरी थे. डायरेक्टर राम महेश्वरी थे. इस फिल्म में भी रेखा ने एक तवायफ का रोल निभाया था. वह एक क्लब में डांसर करती हैं और अपनी बहन (रीना रॉय) की पढ़ाई के लिए पैसे भेजती है. यह 1978 की 15वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी. फिल्म में राज कुमार बाप-बेटा के रोल में थे. पूरी फिल्म में राज कुमार छाए रहे थे. 1 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 1.7 करोड़ का कलेक्शन किया था. फिल्म सेमी हिट साबित हुई थी.

रेखा ने 1979 में आई मनमोहन देसाई की फिल्म ‘सुहाग’ आई थी. फिल्म में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, रेखा, परवीन बॉबी, निरूपा रॉय, अमजद खान, कादर खान, रंजीत और जीवन लीड रोल में थे. फिल्म में रेखा ने एक बार फिर से तवायफ का रोल निभाया था. वह फिल्म में परवीन बॉबी की बड़ी बहन थी. रेखा अपनी बहन से अपनी पहचान छिपाती हैं. ऐसा ही रोल उन्होंने ‘कर्मयोगी’ में किया था. उसमें वह रीना रॉय की बड़ी बहन बनी हुई थीं. मुकद्दर का सिकंदर में भी रेखा ने तवायफ का रोल किया था. मनमोहन देसाई इस फिल्म का टाइटल ‘मां कसम’ रखना चाहते थे लेकिन वो टाइटल प्रकाश मेहरा के पास था. ऐसे में उन्होंने ‘सुहाग’ नाम से फिल्म बनाई. स्टोरी आइडिया का क्रेडिट मनमोहन देसाई की पत्नी जीवन प्रभा देसाई को दिया गया. इस फिल्म की रिलीज से पहले उनका निधन हो गया था. फिल्म की कहानी प्रयागराज ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले केके शुक्ला और डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था.

सुहाग फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म का एक गाना ‘तेरी रब ने बना दी जोड़ी’ लंदन में शूट हुआ था. इस फिल्म की धुन पंजाबी फॉक सॉन्ग से इंस्पायर्ड है. 1946 की फिल्म ‘मां-बाप की लाज’ के एक सॉन्ग ‘आई मस्त जवानी आई, काहे प्रीतम से हम प्रीत रचाएं’ से प्रेरित था. गीतकार अल्ला रक्खा कुरैशी थे. सुहाग के कई सीन मनमोहन देसाई की 1977 की फिल्म ‘परवरिश’ से मिलते-जुलते थे. दोनों फिल्मों में हीरो के नाम एक जैसे थे. सुहाग ऐसी पहली फिल्म थी जब वो प्रोड्यूसर नहीं थे. अमिताभ लगातार तीसरी साल टॉप हीरो थे. शोले फिल्म के दो सीन इस फिल्म में थे. शोले फिल्म की तरह यहां पर भी अमिताभ अपने दोस्त शशि कपूर की लड़की की मां के सामने बुराई करते हैं. शोले फिल्म की तरह टंकी में यहां पर धर्मेंद्र की तरह अमिताभ मंदिर के शिखर पर चढ़े थे. एक करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 5 करोड़ का कलेक्शन किया था.

रेखा ने एक और फिल्म ‘उमराव जान’ में भी तवायफ का रोल निभाया था. यह फिल्म 2 जनवरी 1981 को रिलीज हुई थी. उमराव जान एक पीरियड म्यूजिक ड्रामा फिल्म थी. फिल्म का डायरेक्टर-प्रोड्यूसर मुजफ्फर अली थे. उमराव जान फिल्म की कहानी 19वीं सदी की एक तवायफ अमीरन की है जो बाद में उमराव जान के नाम से फेमस होती है. अमीरन का अपहरण कर कोठे पर बेच दिया जाता है. फिर वह एक कुशल गायिका-नृत्यांगना बनती है. नवाबों और अमीरों से प्यार करती है लेकिन बदले में उसे अकेलापन-उपेक्षा ही मिलती है. खूबसूरती, कला-कविता के बावजूद दुखद जीवन जीने को मजबूर होती है. यह कहानी मिर्जा हादी रुसवा के 1899 के उर्दू नॉवेल उमराव जान अदा पर बेस्ड थी. फिल्म एक नारी के शोषण और सामाजिक बाधाओं को बखूबी दर्शाती है. उमराव का म्यूजिक खय्याम ने तैयार किया था.

उमराव जान फिल्म में कुल 10 गाने थे. ‘दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए’, ‘इन आंखों की मस्ती’ आज भी रूह में उतर जाते हैं. उमराव जान बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी. गुजरते समय के साथ फिल्म की लोकप्रियता बढ़ती गई. आज यह फिल्म कल्ट क्लासिक मूवी में शुमार है. उमराव जान को 4 नेशनल अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड रेखा को मिला था. रेखा के करियर की यह सबसे बेस्ट फिल्म में शुमार है. 2006 में इस फिल्म का रीमेक भी बनाया गया था. ऐश्वर्या राय-अमिताभ बच्चन इस मूवी में नजर आए थे लेकिन यह फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई थी.
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