लखनऊ/एबीएन न्यूज। देशभर में यात्रा की मांग में हो रही तीव्र वृद्धि को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने अगले 5 वर्षों में प्रमुख शहरों में नई रेल गाड़ियों के संचालन की क्षमता दोगुनी करने की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दिया है। रेलवे का लक्ष्य वर्ष 2030 तक संचालन क्षमता को दोगुना करते हुए यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना और नेटवर्क पर दबाव को कम करना है। इसके लिए मौजूदा ढांचे को उन्नत करने के साथ-साथ नए प्रोजेक्ट्स को गति दी जा रही है।
2030 तक क्षमता दोगुनी करने की रणनीति
योजना के अंतर्गत निम्न कार्य प्रमुख रूप से शामिल हैं—
मौजूदा टर्मिनलों पर नए प्लेटफॉर्म, स्टेबलिंग लाइन, पिट लाइन और शंटिंग सुविधाएं विकसित करना।
शहरी क्षेत्रों में नए टर्मिनलों की पहचान एवं निर्माण।
मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स एवं आधुनिक रखरखाव केंद्रों का विकास।
सिग्नलिंग अपग्रेडेशन, मल्टीट्रैकिंग और यातायात सुविधा सुधार के माध्यम से अनुभागीय क्षमता में बढ़ोतरी।
रेलवे के अनुसार योजना को तत्काल, अल्पकालिक और दीर्घकालिक चरणों में लागू किया जाएगा ताकि क्षमता विस्तार के लाभ अगले कुछ वर्षों में ही दिखना शुरू हो जाएं।
उत्तर रेलवे के 10 स्टेशन चुने गए अपग्रेड के लिए
रेल संचालन और संरचना को मजबूत बनाने के लिए उत्तर रेलवे के 10 प्रमुख स्टेशनों को इन्फ्रास्ट्रक्चर उन्नयन के लिए चयनित किया गया है— जिनमें दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, चंडीगढ़, लुधियाना, अमृतसर, जम्मू, हरिद्वार और बरेली।
इन स्टेशनों को आधुनिकीकृत कर ऐसे स्वरूप में तैयार किया जा रहा है कि भविष्य में अधिक ट्रेनों का संचालन संभव हो सके और यात्रियों को सुविधाजनक एवं सुगम यात्रा अनुभव मिल सके।
केंद्रीय रेल मंत्री एवं सूचना प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा— “हम यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने और भीड़भाड़ को कम करने के लिए विभिन्न शहरों में कोचिंग टर्मिनलों का विस्तार कर रहे हैं। अनुभागीय एवं परिचालन क्षमताओं में वृद्धि से हमारा रेलवे नेटवर्क अधिक सक्षम और राष्ट्रव्यापी संपर्क बेहतर होगा।”
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