बीना/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। करीब 25 वर्ष पूर्व जाड़े के मौसम में एक गरीब परिवार का कच्चा मकान गिराकर उसे बेघर करने के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) आलोक यादव की अदालत ने शनिवार को सुनवाई पूरी करते हुए 11 अभियुक्तों को दोषसिद्ध पाते हुए प्रत्येक को दो-दो वर्ष की सश्रम कैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर साढ़े चार हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में प्रत्येक को एक-एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि अर्थदंड की धनराशि में से 25 हजार रुपये पीड़ित को दिए जाएंगे।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़ित इजराइल अहमद पुत्र सुबहान, निवासी परासी पांडेय, थाना रॉबर्ट्सगंज, जनपद सोनभद्र ने 5 जनवरी 2001 को थाने में तहरीर देकर बताया था कि उसने गांव के लन्दर पुत्र शिवनाथ से 8000 रुपये में एक बिस्वा जमीन खरीदकर उस पर कच्चा मकान बनवाया था, जिसमें वह अपने परिवार और बच्चों के साथ रह रहा था। आरोप है कि 5 जनवरी 2001 को शाम लगभग चार बजे गांव के ही समई, प्रभु, हरी, सुरेश उर्फ गुड्डू, नरेश, मुन्ना, राजमनी, जियावन, गोपाल, कल्लू बेचू, रामसूरत उर्फ जगत्तर, बंशी और राममूरत एकराय होकर उसके घर पहुंचे। आरोपियों ने परिवार और बच्चों को गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी, घर का सामान बाहर निकाल दिया और कच्चे मकान को गिरा दिया।
पीड़ित मजदूरी करने रॉबर्ट्सगंज गया हुआ था। शाम को लौटने पर उसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली। घटना के समय गांव के कई लोगों ने इस घटना को देखा और सुना था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर विवेचना की और पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान तीन अभियुक्तों राजमनी, बेचू और बंशी की मृत्यु हो गई।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने, गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अपराध को गंभीर प्रकृति का मानते हुए 11 अभियुक्तों समई, प्रभु, हरी, सुरेश उर्फ गुड्डू, नरेश, मुन्ना, जियावन, गोपाल, कल्लू, रामसूरत उर्फ जगत्तर और राममूरत को दोषी करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी सतीश वर्मा ने प्रभावी बहस प्रस्तुत की।
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