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दुनिया अजय देवगन को ‘सिंघम’ और ‘एक्शन हीरो’ के तौर पर जानती है, लेकिन बॉक्स ऑफिस का इतिहास कुछ और ही कहानी कहता है. जब भी अजय देवगन ने पर्दे पर अपनी हीरो वाली इमेज छोड़कर ‘विलेन’ बनने का रिस्क लिया है, उन्होंने कामयाबी की नई ऊंचाइयां हासिल की हैं. ‘दीवानगी’ में अपने खूंखार अंदाज से लेकर ‘खाकी’ में अपने डरावने किरदार तक, अजय देवगन ने साबित कर दिया है कि वह सिर्फ एक एक्शन हीरो ही नहीं, बल्कि एक मंझे हुए विलेन भी हैं. यहां तक कि उनके नेगेटिव रोल भी अक्सर कमाई के मामले में शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार से आगे निकल गए हैं.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में ‘एक्शन हीरो’ अक्सर अपनी साफ-सुथरी इमेज को लेकर हिचकिचाते हैं, लेकिन अजय देवगन ने अपने करियर की शुरुआत से ही इस डर को चुनौती दी है. अजय देवगन उन कुछ एक्टर्स में से एक हैं जिन्होंने साबित किया है कि ‘विलेन’ का रोल करके भी वह अकेले हिट हो सकते हैं. 2002 की फिल्म ‘दीवानगी’ से लेकर’ खाकी’ तक, अजय का ‘डार्क फेज’ हमेशा एक माइलस्टोन रहा है.

‘दीवानगी’: अनीस बज्मी की ‘दीवानगी’ (2002) अजय देवगन के करियर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट थी. लीड रोल में अक्षय खन्ना थे, लेकिन पूरी फिल्म अजय देवगन के इर्द-गिर्द घूमती थी. अजय ने ‘तरंग भारद्वाज’ का किरदार निभाया, जो एक ऐसा विलेन है जो स्प्लिट पर्सनैलिटी होने का नाटक करता है. जब फिल्म के आखिर में उसकी असली पहचान सामने आती है, तो दर्शक हैरान रह जाते हैं. फिल्म स्लीपर हिट रही, जिससे अजय देवगन को अपने पहले नेगेटिव रोल के लिए फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड मिला. इंडस्ट्री को एक ऐसा विलेन मिल गया था जो चिल्लाता नहीं था, बल्कि अपनी आंखों से डराता था.

खाकी: 2004 में अजय देवगन ने ‘खाकी’ में यशवंत आंग्रे का रोल किया था. यह वह समय था जब शाहरुख खान की लैंडमार्क फिल्म ‘स्वदेस’ थिएटर में लगी थी. आज ‘स्वदेस’ को एक कल्ट क्लासिक माना जाता है, लेकिन कमर्शियल आंकड़ों के मामले में अजय देवगन के खूंखार स्टाइल वाली फिल्मों ने उस दौर में मास सर्किट (छोटे शहरों और सिंगल स्क्रीन) में ज्यादा कमाई की. फिल्म में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार और प्रकाश राज जैसे दिग्गज थे, लेकिन अजय देवगन ने एक बागी पुलिसवाले का रोल किया जो सिस्टम को उखाड़ फेंकना चाहता है. उनके किरदार की क्रूरता ने उन्हें अपने समय का सबसे स्टाइलिश विलेन बना दिया.
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काल: अजय देवगन ने न सिर्फ एक बेरहम विलेन के रोल से बल्कि एक एंटी-हीरो के रोल से भी बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई. फिल्म ‘काल’ में अजय ने एक रहस्यमयी और डरावने विलेन का रोल किया. एक टाइगर रिजर्व के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म में अजय के लुक और व्यवहार ने फिल्म को एक अलग लेवल पर पहुंचा दिया.

वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई: सुल्तान मिर्जा का किरदार नेगेटिविटी और उसूलों के बीच झूलता रहा. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और इसने साबित कर दिया कि विलेन जैसा किरदार भी लोगों का पसंदीदा बन सकता है. अजय का विलेन बनने का सफल फॉर्मूला<br />अजय देवगन के विलेन वाले रोल की सबसे खास बात उनकी खामोशी है.

जहां 90 के दशक के विलेन जोर-जोर से हंसते थे और अजीब हरकतें करते थे, वहीं अजय ने विलेन को एक समझदार और शांत इंसान के तौर पर दिखाया. उनके छोटे लेकिन दमदार डायलॉग, जैसे ‘दुआ में याद रखना’ या ‘दीवानगी’ का आखिरी सीन, दर्शकों के मन में गहराई तक बैठ गए. इस फॉर्मूले की वजह से उनकी विलेन वाली फिल्मों ने मल्टीप्लेक्स से लेकर सिंगल स्क्रीन तक, हर जगह रिकॉर्ड तोड़ कमाई की.

ट्रेड एक्सपर्ट्स की मानें तो एक समय ऐसा भी था जब अजय देवगन अगर किसी फिल्म में सपोर्टिंग विलेन के तौर पर भी दिखते थे, तो लीड एक्टर को उनके स्क्रीन स्पेस की चिंता होती थी. ऐसा अजय की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस की वजह से था. उन्होंने दिखाया कि विलेन सिर्फ पिटने के लिए नहीं होता, बल्कि कहानी का हीरो भी हो सकता है. शाहरुख खान, अक्षय कुमार और यहां तक कि अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करते हुए भी, अजय ने अपने ‘नेगेटिव शेड्स’ के लिए सबसे ज्यादा तारीफें बटोरीं.
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