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बॉलीवुड के कई स्टार्स की जीवन की दर्दवान कहानी आपने सुनी होगी. लेकिन क्या आप उस डायरेक्टर की कहानी को जानते हैं, जिन्होंने एक नहीं बल्किन कई स्टार्स की किस्मत का ताला खोला और उन्हें सुपरस्टार बना दिया. बचपन का संघर्ष से उन्होंने सीख ली और जो ठाना वो करके माना और बॉलीवुड का ‘मसाला किंग’कहलाया. जानते हैं वो कौन हैं?
नई दिल्ली. राज कपूर, गुरु दत्त, विजय आनंद, यश चोपड़ा, सुभाष घई जैसे कई हिट डायरेक्टर्स की कहानी आप जानते होंगे, लेकिन ये उस ‘मसाला किंग’ डायरेक्टर की कहानी है, जिसने सिर से सिर्फ चार साल की उम्र में पिता का साया उठ गया. परिवार पर इतना कर्ज था कि घर और जमीन तक बेचनी पड़ी. बचपन खेल-कूद में नहीं, बल्कि संघर्ष और जिम्मेदारियों के साए में बीता. हालात ने जल्दी बड़ा कर दिया, लेकिन इन्हीं मुश्किलों ने एक ऐसे सपने को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर हिंदी सिनेमा की दिशा बदल दी. जिंदगी की कड़वाहट को उन्होंने पर्दे पर भावनाओं, एक्शन, कॉमेडी और बिछड़े परिवारों के मिलन में ढाल दिया. उनकी फिल्मों में मां-बाप से बिछड़े बच्चे, खोए हुए भाई और आखिर में होने वाला भव्य मिलन दर्शकों की आंखें नम कर देता था. 70 और 80 के दशक में उनका ऐसा जलवा रहा कि बॉक्स ऑफिस पर मानो उनका ही राज हो. लगातार 7 सिल्वर जुबली और 4 गोल्डन जुबली फिल्मों का रिकॉर्ड आज भी उनकी कामयाबी की गवाही देता है. संघर्ष से उठकर ‘मसाला किंग’ बनने तक का उनका सफर किसी प्रेरक कहानी से कम नहीं. फोटो साभार-रेडिट

हिंदी सिनेमा 70 और 80 के दशक में जब तेजी से बदल रहा था, तब निर्देशक मनमोहन देसाई ने ऐसी मनोरंजक फिल्में बनाई थीं, जिनमें एक्शन था, इमोशन था, कॉमेडी थी और परिवार का मेल-मिलाप भी था. यही वजह रही कि उनका बॉक्स ऑफिस पर लंबे समय तक राज रहा. वे ऐसे निर्देशक माने जाते हैं, जिन्होंने लगातार 7 सिल्वर जुबली और 4 गोल्डन जुबली फिल्में दीं, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है. फोटो साभार-रेडिट

मनमोहन देसाई का जन्म 26 फरवरी 1937 को मुंबई में हुआ था. उनके पिता, कीकूभाई देसाई, फिल्म प्रोड्यूसर थे, और उन्होंने अपना स्टूडियो भी शुरू किया था, लेकिन जब मनमोहन सिर्फ चार साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया. परिवार पर भारी कर्ज था, जिसके कारण घर और जमीन तक बेचनी पड़ी. बचपन में ही उन्होंने संघर्ष देखा. यही संघर्ष आगे चलकर उनकी फिल्मों में दिखा, जहां परिवार का बिछड़ना और फिर मिलना एक अहम हिस्सा बन गया. फोटो साभार-रेडिट
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बड़े भाई सुभाष देसाई ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का मौका दिलाया. मनमोहन देसाई ने शुरुआत में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया. उनकी पहली बड़ी फिल्म ‘छलिया’ थी, जिसमें राज कपूर और नूतन ने काम किया. यह फिल्म सफल रही, और इसके ‘बाजे पायल छुन छुन’, ‘तेरी राहों में खड़े हैं’, और ‘डम डम डिगा डिगा’ जैसे गाने बेहद पसंद किए गए. इसी फिल्म से उन्हें एक अलग पहचान मिली. फोटो साभार-रेडिट

इसके बाद, उन्होंने कई हिट फिल्में बनाईं, लेकिन 1977 उनके करियर का सबसे बड़ा साल साबित हुआ. इस साल उनकी चार फिल्में रिलीज हुईं, जिनमें ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘धरम वीर’, ‘चाचा भतीजा’ और ‘परवरिश’ शामिल हैं. चारों फिल्में जबरदस्त हिट रहीं. खासकर ‘अमर अकबर एंथनी’ ने तो इतिहास रच दिया. इस फिल्म ने कई सिनेमाघरों में सिल्वर जुबली मनाई और आज भी इसे क्लासिक माना जाता है.

उस दौर में सिल्वर जुबली का मतलब था कि फिल्म 25 हफ्ते तक सिनेमाघरों में चली और गोल्डन जुबली का मतलब 50 हफ्ते फिल्म पर्दे पर रही. उनके नाम लगातार 7 सिल्वर जुबली और 4 गोल्डन जुबली फिल्मों का रिकॉर्ड है. फोटो साभार-रेडिट

मनमोहन देसाई ने निजी जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखें. पत्नी के निधन के बाद वे काफी टूट गए थे. बाद में उन्होंने अभिनेत्री नंदा से सगाई की, लेकिन शादी से पहले ही 1 मार्च 1994 को मुंबई में घर की बालकनी से गिरकर उनका निधन हो गया. फाइल फोटो.
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