What Is Leap Year: इस साल फरवरी का महीना 28 दिन का है। ऐसा इसलिए क्योंकि लीप ईयर हर चार साल में एक बार आता है और उस साल फरवरी में 29 तारीख होती है। यह दिन बाकी वर्षों से अलग इसलिए खास माना जाता है। कई लोग इसे सिर्फ कैलेंडर का एक अतिरिक्त दिन समझते हैं, लेकिन इसका महत्व इससे कहीं ज्यादा है।
अगर यह अतिरिक्त दिन न जुड़ता तो हमारे कैलेंडर और वास्तविक समय में बड़ा अंतर आने लगता। दुनिया के कई हिस्सों में मौसम, त्योहार, खेती और हमारे रोज़मर्रा के कार्यक्रमों पर इसका असर पड़ सकता है। यही वजह है कि लीप ईयर और 29 फरवरी को विज्ञान और समाज दोनों के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके पीछे की क्या वजह है, इस लेख में हम आपको डिटेल में समझाएंगे।

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इस साल क्यों नहीं है 29 फरवरी?
– फोटो : Adobe stock
लीप ईयर की वजह क्या है?
असल में पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 365 दिन नहीं बल्कि लगभग 365.2422 दिन लगते हैं। यानी हर साल 365 दिनों के साथ लगभग 6 घंटे बचते रहते हैं। अगर हर चार साल में यह अतिरिक्त समय कैलेंडर में न जोड़ा जाए, तो धीरे-धीरे हमारी तारीखें मौसम से पीछे चलने लगेंगी। इसे संतुलित करने के लिए हर चार साल में एक दिन यानी 29 फरवरी जोड़ा जाता है।

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इस साल क्यों नहीं है 29 फरवरी?
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अगर 29 फरवरी न हो तो क्या होगा?
अगर लीप डे न जोड़ा जाए तो समय के साथ मौसम और कैलेंडर के बीच अंतर बढ़ेगा। जिसकी वजह से त्योहार फसल बोने और काटने का समय गड़बड़ा सकता है। इसके कारण ही लंबे समय में दिसंबर में गर्मी और जून में सर्दी जैसी असंगत स्थिति बन सकती है।

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लीप ईयर के गणना का नियम क्या है?
हर चार साल में लीप ईयर आता है, लेकिन सटीक गणना के लिए जो साल 100 से विभाजित होते हैं वे लीप ईयर नहीं होते। जबकि 400 से विभाजित साल लीप ईयर माने जाते हैं। इससे कैलेंडर और पृथ्वी की परिक्रमा के बीच संतुलन बना रहता है।

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इस साल नहीं तो अब कब है लीप ईयर?
आपको बता दें कि वर्ष 2020 में लीप ईयर में आया था, जिसके चार साल बाद यानी 2024 में लीप ईयर था। वहीं अब अगला लीप ईयर 2028 में आएगा।
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