जब जिम्बाब्वे क्रिकेट अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था, तब देश को एक नए चेहरे, एक नई उम्मीद की तलाश थी। बड़े नाम विदा ले चुके थे, सपने बिखर चुके थे और भरोसा डगमगा रहा था। ऐसे समय में हरारे के एक साधारण घर से उठी गेंद-बल्ले की आवाज अब विश्व मंच तक गूंज रही है। 22 वर्षीय ब्रायन बेनेट आज जिम्बाब्वे की नई सुबह का प्रतीक बन चुके हैं। वह जिम्बाब्वे क्रिकेट के टूटते सपनों के बीच एक नई किरण बनकर उभरे हैं। वह न तो किसी अकादमी से उभरे, न किसी बड़े वादे से जाने गए, बल्कि घर के पिछले हिस्से में लगे छोटे से नेट पर अभ्यास कर विश्व मंच तक पहुंचे। उस नेट में वह और उनके भाई घंटों क्रिकेट खेलते थे, बिना यह सोचे कि एक दिन वह देश की नई उम्मीद बन जाएंगे।
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ब्रायन बेनेट
– फोटो : IANS
क्यों चर्चा में हैं ब्रायन बेनेट?
जब से टी20 विश्वकप टूर्नामेंट (2007 से) शुरू हुआ है, कभी ऐसा नहीं हुआ कि कागज पर कमजोर दिखने वाली टीम का बल्लेबाज टूर्नामेंट के शीर्ष पांच सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में शामिल हो। पर ब्रायन बेनेट ने यह कर दिखाया।
वह टूर्नामेंट के इस संस्करण में सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने पांच मैचों की पांच पारियों में 277 की औसत से 277 रन बनाए। इनमें तीन अर्धशतक शामिल हैं। उनका स्ट्राइक रेट 135.78 का रहा।
इस दौरान उन्होंने 31 चौके और छह छक्के लगाए। ये सभी छह छक्के उन्होंने गुरुवार को भारत के खिलाफ पारी के दौरान लगाए हैं। भारत के खिलाफ उन्होंने 59 गेंद में आठ चौके और छक्के की मदद से और 164.41 के स्ट्राइक रेट से नाबाद 97 रन की पारी खेली।
22 साल का यह लड़का ओपनिंग करने उतरा और नॉटआउट रहा। यह पहली बार नहीं था कि ब्रायन ओपनिंग करने उतरे और आखिरी तक नॉटआउट रहे। इस विश्वकप में उनकी पांच पारियों में चार बार ऐसा हुआ, जब वह नॉटआउट पवेलियन लौटे।
वह एक बार आउट सिर्फ वेस्टइंडीज के खिलाफ हुए। 22 साल में इतनी मैच्योरिटी शायद ही किसी बल्लेबाज में दिखी हो। उनकी बाकी पारियों में एक भी छक्का नहीं था, लेकिन भारत की मजबूत गेंदबाजी लाइन अप के सामने उन्होंने यह कमी भी पूरी कर दी।
वह शतक से चूक गए, लेकिन पूरी दुनिया के फैंस के दिल जीत गए। इस विश्वकप में ब्रायन की पारियां- नाबाद 48 रन, नाबाद 64 रन, नाबाद 63 रन, पांच रन और नाबाद 97 रन की रही हैं।
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ब्रायन बेनेट और उनके भाई डेविड बेनेट
– फोटो : IANS
ब्रायन बेनेट ने कैसे थामा बल्ला?
ब्रायन बेनेट कभी टीवी के सामने बैठकर कवर ड्राइव गिनने वाला बच्चों में नहीं गिने जाते थे। न ही दीवारों पर क्रिकेटरों के पोस्टर लगाने वालों में रहे, न ही उन्होंने बचपन में कोई बड़ी घोषणा कि मैं देश के लिए खेलूंगा, ये करूंगा, वो करूंगा। उनके लिए क्रिकेट की शुरुआत घर के पिछले हिस्से में लगे एक छोटे से नेट से हुई, जहां सामने उनके जुड़वां भाई खड़े होते थे और गेंद-बल्ले की आवाज घंटों गूंजती रहती थी। आज वही 22 वर्षीय ब्रायन बेनेट जिम्बाब्वे क्रिकेट की नई पहचान बन चुके हैं।
टी20 विश्वकप 2026 में पांच में से चार पारियों
में नॉटआउट रहे बेनेट
खिलाफ
पारियां
गेंदबाजी
मैदान
भारत
97*
0/16
चेन्नई
वेस्टइंडीज
5
—
मुंबई
श्रीलंका
63*
—
कोलंबो
ऑस्ट्रेलिया
64*
—
कोलंबो
ओमान
48*
0/18
कोलंबो
नोट: (*) का मतलब नॉटआउट
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ब्रायन बेनेट
– फोटो : IANS
साधारण शुरुआत, असाधारण सफर
हंबनटोटा में ट्रेनिंग कैंप के दौरान बेनेट ने कहा, ‘मैं बचपन में क्रिकेट को ज्यादा फॉलो नहीं करता था। स्कूल में अपने भाइयों और पिताजी के साथ खेलता था। अंडर-19 के आसपास आकर ही मैंने जिम्बाब्वे क्रिकेट को गंभीरता से फॉलो करना शुरू किया।’ उनके पिता, जो एक ब्लूबेरी किसान हैं, खुद क्लब क्रिकेट खेल चुके हैं और यंग मशोनालैंड के लिए कुछ फर्स्ट क्लास मैच भी खेले। बेनेट बताते हैं, ‘उन्होंने एंड्रयू वॉलर, डेव हॉटन, एंडी फ्लावर, ग्रांट फ्लावर जैसे खिलाड़ियों के साथ खेला था। हीथ स्ट्रीक और हेनरी ओलोंगा के किस्से सुनाते थे।’ घर के पिछले हिस्से में लगा नेट ही उनका पहला कोच था। ब्रायन बताते हैं, ‘मेरा एक जुड़वां भाई है। पिताजी ने हमारे लिए घर पर नेट लगाया था। स्कूल के बाद और छुट्टियों में हम घंटों खेलते थे, एक बल्लेबाजी करता, दूसरा गेंदबाजी।’
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ब्रायन बेनेट
– फोटो : IANS
बहुमुखी प्रतिभा वाले खिलाड़ी हैं ब्रायन
क्रिकेट के अलावा बेनेट ने हॉकी, स्क्वैश और रग्बी भी खेला। स्कूल में दो खेल जरूरी थे, गर्मियों में क्रिकेट और सर्दियों में हॉकी। यही अनुभव उनकी फिटनेस और मानसिक मजबूती की नींव बना। कोविड के कारण स्कूल के आखिरी दो साल प्रभावित हुए, तो 2022 में वह दक्षिण अफ्रीका के किंग्सवुड कॉलेज चले गए, ताकि ज्यादा मैच खेल सकें। ब्रायन ने बताया, ‘कोविड में खेल नहीं हो पा रहे थे, इसलिए वहां जाकर फिर से लय मिली।’