Gangaur Puja 2026: गणगौर पर्व की शुरुआथ वैसे तो होली के अगले दिन से ही शुरू हो जाती है और 16 दिनों तक चलती है. लेकिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर इस पर्व का खास महत्व होता है. इस वर्ष गणगौर पूजा शनिवार, 21 मार्च 2026 को की जाएगी.
गणगौर शब्द का अर्थ शिव और गौरी से मिला हुआ है. इसलिए यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, वैवाहिक जीवन और समर्पण को दर्शाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखकर पूजा-पाठ करती हैं. साथ ही कुंवारी कन्याएं भी योग्य जीवनसाथी के लिए यह व्रत रखकर शिव-गौरी की पूजा करती हैं.
गणगौर पूजा का शुभ मुहूर्त (Gangaur Puja 2026 Muhurat)
- शुभ मुहूर्त (उत्तम)- सुबह 07:77 से 09:26 बजे
- लाभ मुहूर्त (उन्नति)- दोपहर 02:00 से 03:31 बजे
- अमृत मुहूर्त (सर्वोत्तम)- दोपहर 03:31 से शाम 05:02 बजे
- लाभ मुहूर्त (उन्नति)- शाम 06:33 से रात 08:02 बजे
गणगौर पूजा देशभर के कई राज्यों में मनाई जाती है. मध्य प्रदेश के देवास जिले के बागली अनुभाग के आदिवासी समाज में गणगौर पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखकर पूजा करती हैं. वहीं कुंवारी कन्या माता गणगौर की स्थापना और पूजा करती हैं. लेकिन इसी जिले में गणगौर पूजा की अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जोकि काफी अलग और चौंकाने वाला भी है.
पति को डंडे से पीटती है पत्नी
गणगौर पूजा पर पत्नियां एक ओर जहां पति की लंबी आय़ु के लिए व्रत रखती हैं तो वहीं दूसरी ओर डंडे लाठी से उनकी पिटाई भी करती हैं. इस रस्म के पछे स्थानीय लोगों की गहरी आस्था भी जुड़ी है. परंपरा के अनुसार, गुड़ तोड़ने की प्रथा है, जिसके लिए एक ऊंची लकड़ी के सिरे में नारियल या गुड़ लगी पोटली को बांधा जाता है. इस पोटली को पतियों की टोली को लेना होता है. वहीं दूसरी ओर महिलाएं पुरुषों को पोटली लेने से रोकती है.
पोटली लेने से रोकने के लिए पत्नियां इमली के पेड़ की लकड़ी से मारती है. अपने बचाव के लिए पुरुष भी ढाल का इस्लेमाल करते हैं. खेल की यह प्रकिया पूरे सात बार होती है, जिसमें पुरुषों को चोट भी लगती है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि, पतियों को लगा चोट माता का आशीर्वाद होता है.
क्या है परंपरा के पीछे की मान्यता
पत्नियों द्वारा पीटे जाने पर पतियों को चोट भी आती है, लेकिन वे बुरा नहीं मानते. दरअसल इस परंपरा के पीछे ऐसी मान्यता है कि, पत्नी घर की लक्ष्मी होती है. पूरे सल पति उस पर हुकुम चलाता है, गुस्सा करता है, भला-बुरा कहता है. इसलिए यह एक दिन पत्नियों का होता है, जब वो पति पीटकर पूरे साल की भूलचूक को माफ कर देती है.
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