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साउथ इंडियन सिनेमा के दिग्गज एक्टर ‘नटभूषण’ सोभन बाबू ने चार दशकों तक तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री पर राज किया. 200 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले सोभन बाबू अपनी रोमांटिक इमेज के बावजूद असल जिंदगी में बेहद अनुशासित और रिजर्व थे. उन्होंने अपने करियर में हमेशा ‘नो-किसिंग पॉलिसी’ का पालन किया और अपने परिवार को चकाचौंध से दूर रखा. वे शुरुआती असफलता की वजह से सिनेमा छोड़ने वाले थे, लेकिन 1965 की सुपरहिट फिल्म ‘वीरभिमन्यु’ ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया.
पर्दे पर रोमांटिक लेकिन असल जिंदगी में बेहद सख्त थे सोभन बाबू
नई दिल्ली: साउथ इंडियन सिनेमा के इतिहास में जब भी किसी ऐसे सुपरस्टार का जिक्र होता है जिसने अपनी सादगी और स्टाइल से करोड़ों दिलों पर राज किया, तो ‘नटभूषण’ सोभन बाबू का नाम सबसे ऊपर आता है. आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले से निकलकर पर्दे का चमकता सितारा बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. 1959 में फिल्म ‘देवा बालम’ से कदम रखने वाले सोभन बाबू ने लगभग चार दशकों तक तेलुगु सिनेमा पर राज किया. दिलचस्प बात यह है कि उस दौर में जहाँ बड़े-बड़े स्टार्स अपनी इमेज को लेकर फिक्रमंद रहते थे, सोभन बाबू ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा के दम पर पाँच बार सर्वश्रेष्ठ एक्टर का खिताब जीता. उन्हें तेलुगु सिनेमा के उन चार स्तंभों में गिना जाता था, जिनके बिना फिल्म इंडस्ट्री अधूरी मानी जाती थी. उनकी पहचान एक ऐसे रोमांटिक हीरो की थी, जिसकी एक मुस्कुराहट पर फैंस फिदा हो जाते थे.
सोभन बाबू की फिल्मी पारी जितनी रंगीन और कामयाब थी, असल जिंदगी में उनके नियम उतने ही पक्के और सख्त थे. पर्दे पर दर्जनों रोमांटिक फिल्में करने के बावजूद उन्होंने पूरी जिंदगी ‘नो-किसिंग पॉलिसी’ का पालन किया. वे अपने परिवार और निजी मूल्यों को लेकर इतने गंभीर थे कि कभी भी अपनी प्रोफेशनल लाइफ को घर की दहलीज पार नहीं करने दी. वे एक ‘रिजर्व’ किस्म के इंसान थे और उन्होंने जानबूझकर अपने बच्चों को फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध और शोर-शराबे से दूर रखा. उनकी हिट फिल्मों की लिस्ट बहुत लंबी है, जिसमें ‘मंचि मनुशुलु’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में शामिल हैं. यह फिल्म हिंदी की ‘आ गले लग जा’ का रीमेक थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे झंडे गाड़ दिए थे. उनके अभिनय में वो जादू था कि वे एक्शन से लेकर भक्ति रस तक, हर किरदार में जान फूंक देते थे.
‘वीरभिमन्यु’ ने पलट दी किस्मत
बहुत कम लोग जानते हैं कि कामयाबी के शिखर पर पहुंचने से पहले सोभन बाबू के मन में एक वक्त ऐसा भी आया था जब वे हार मान चुके थे. करियर के शुरुआती 5-6 सालों में सफलता न मिलने की वजह से उन्होंने सिनेमा छोड़ने का मन बना लिया था. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. 1965 में आई फिल्म ‘वीरभिमन्यु’ ने उनकी पूरी जिंदगी ही पलट कर रख दी. महाभारत के अभिमन्यु पर आधारित इस फिल्म ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. उन्होंने 20 मार्च 2008 को भले ही दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके नियम, उनकी सादगी और पर्दे पर उनका वो रोमांटिक अंदाज आज भी साउथ इंडियन सिनेमा के प्रेमियों की यादों में जिंदा है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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