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Manoj kumar Superhit Movies : फिल्में समाज का आईना होती है. कई बार समाज फिल्मों से प्रभावित होता है तो कई बार समाज से प्रभावित होकर फिल्में बनाई जाती हैं. जो सिनेमा समाज को बदल दे, ऐसी आइकॉनिक फिल्में जब-जब बॉक्स ऑफिस पर आईं, मील का पत्थर साबित हुईं. 45 साल पहले ऐसी ही एक यादगार मूवी सिनेमाघरों में आई थी जिससे चार फिल्मों ने जन्म लिया. दिलचस्प बात यह है कि ये चारों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर जबर्दस्त हिट रहीं. एक तो ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर निकली. इसी फिल्म की कहानी से प्रभावित होकर विदेश में रहने वाले कई भारतीयों ने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपने देश लौट आए. ये आइकॉनिक मूवी कई फिल्मों का आधार बन गईं. इन्हीं आईकॉनिक फिल्मों से कई दूसरी कहानियों का जन्म हुआ. यह आइकॉनिक फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं……
1970 में सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म आई थी जिसका टाइटल एक साथ नहीं था. फिल्म का टाइटल दो हिस्सों में था. 15 मिनट तक फिल्म निकलने के बाद फिल्म का आधा टाइटल सामने आता है. फिर आधे घंटे बाद फिल्म के टाइटल का दूसरा हिस्सा देखने को मिलता है. इस आइकॉनिक फिल्म से बॉलीवुड को एक ऐसा गीतकार मिला, जिसके गानों पर आज भी पूरा जमाना झूमता है. इस फिल्म का इतना ज्यादा इंपैक्ट हुआ कि कई भारतीय विदेश से नौकरी छोड़कर वापस लौट आए. हम बात कर रहे हैं मनोज कुमार की एक फिल्म जिसमें आरती-भजन, भारतीय संस्कृति का बखान, प्यार-सदभाव था. पूर्व और पश्चिम संस्कृति का भेद साफ तौर पर दिखाया गया था. फिल्म का नाम था : पूरब और पश्चिम. इससे इंस्पायर्ड होकर हिंदी सिनेमा में कई फिल्में बनाई गईं. आइये जानते हैं इस आइकॉनिक फिल्म से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स……..

सबसे पहले पूरब और पश्चिम मूवी से जुड़े तथ्यों की बात करते हैं. इस फिल्म में मनोज कुमार, सायरा बानो, प्राण, अशोक कुमार, निरूपा रॉय, प्रेम चोपड़ा, कामिनी कौशल, भारती, और विनोद खन्ना नजर आए थे. फिल्म में म्यूजिक कल्याण जी आनंद जी का था. इस फिल्म के निर्माण का किस्सा और भी दिलचस्प है. मनोज कुमार जब लाहौर से दिल्ली आए तो उन्हें लाहौर की याद आती थी. फिर जब वह मुंबई आ गए तो दिल्ली से मीठी यादें उन्हें आती रहती थीं. परिवार में वो अपनी पुरानी यादों से जुड़ी बातें करते रहते थे. ऐसे में उनकी पत्नी शशि गोस्वामी ने उन्हें एक फिल्म बनाने का आइडिया दिया. मनोज को यह आइडिया पसंद आया. फिल्म में उन्होंने अपनी पत्नी शशि को स्टोरी का क्रेडिट भी दिया. इस तरह से पूरब और पश्चिम फिल्म के बनने की शुरुआत हुई.

पूरब और पश्चिम फिल्म का नाम पहले ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ रखा जाना था. मनोज कुमार ने यह टाइटल रजिस्टर्ड भी करा लिया था. उन्हीं दिनों देवानंद को ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ जैसा टाइटल अपनी फिल्म के लिए चाहिए था. जब उन्हें पता चला कि यह टाइटल मनोज कुमार के पास है, तो उन्होंने अनुरोध किया. मनोज ने यह टाइटल देवानंद को दे दिया. देवानंद ने इसी टाइटल से मूवी बनाई जो कि 1971 में रिलीज हुई थी. इस मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया था. जीनत अमान पर फिल्माया गया का एक गाना ‘दम मारो दम, मिट जाए गम, बोलो सुबह-शाम, हरे कृष्णा हरे राम’ आज भी पब-क्लब-पार्टी में सुनाई दे जाता है.
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इस फिल्म के निर्माण के दौरान एक और ब्लॉकबस्टर मूवी का आधार बना. दरअसल, पूरब और पश्चिम फिल्म के लिए सायरा बानो को साइन करने के लिए मनोज कुमार उनके घर पर पहुंचे. दिलीप कुमार ने मनोज कुमार को देखकर समझा कि वो उन्हें साइन करने के लिए आए हैं. मनोज कुमार ने जब कहा कि वो सायरा बानो को साइन करने के लिए आए हैं तो दिलीप साहब मायूस हो गए. मनोज कुमार ने दिलीप कुमार से साथ में एक फिल्म बनाने का वादा किया. मनोज कुमार ने अपना वादा निभाया. दिलीप कुमार के साथ क्रांति फिल्म बनाई जो 1981 में आई थी. 6 फरवरी 1981 को रिलीज हुई क्रांति एक मल्टी स्टारर फिल्म थी. स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीतबद्ध गाने ‘जिंदगी की ना टूटे लड़ी, प्यार कर ले घड़ी तो घड़ी’ और ‘चना जोर गरम’, ‘मारा ठुमका बदल गई चाल मितवा’ खूब पॉप्युलर हुए. इसी फिल्म से दिलीप कुमार की पर्दे पर दोबारा वापसी हुई थी. क्रांति फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. यह बात अलग है कि इस फिल्म के बाद दोनों के बीच ऐसी खटाए आई कि दोनों ने फिर कभी साथ में काम नहीं किया.

पूरब और पश्चिम में मनोज कुमार को चंद्रा बारोट ने असिस्ट किया था. चंद्रा बारोट का काम मनोज कुमार को इतना पसंद आया कि उन्होंने अपनी फिल्म ‘रोटी कपड़ा और मकान’ के डायरेक्शन का जिम्मा उन्हें सौंप दिया था. डिस्ट्रीब्यूटर्स को जब पता चला तो उन्होंने मनोज कुमार से कहा कि फिल्म उनके नाम से बिकती है. ऐसे में मजबूरन मनोज कुमार को फिल्म डायरेक्ट करनी पड़ी. मजेदार बात यह है कि ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में मनोज कुमार-अमिताभ बच्चन साथ नजर आए थे. इसी फिल्म के निर्माण के दौरान ‘डॉन’ मूवी को बनाने पर भी विचार किया गया था.

‘रोटी कपड़ा और मकान’ के कैमरामैन नरीमन ईरानी पर 12 लाख का कर्जा था. ऐसे में अमिताभ बच्चन-जीनत अमान-प्राण ने उन्हें एक और फिल्म बनाने, हर संभव मदद करने और फ्री में काम करने का भरोसा दिलाया. नरीमन ने सलीम-जावेद की ‘डॉन’ की रिजेक्टेड स्क्रिप्ट फाइनल की. चंद्रा बारोट ने इसका डायरेक्शन किया था. नरीमन का डॉन फिल्म के निर्माण के दौरान निधन हो गया था. चंद्रा बारोट ने अपनी बहन से 40 हजार का कर्जा लेकर फिल्म कंप्लीट की. फिल्म पूरी तो उन्होंने अपने गुरु मनोज कुमार को मूवी दिखाई. उन्होंने दूसरे हाफ में एक गाना जोड़ने के लिए कहा. 1978 में आई फिल्म डॉन का पहला हफ्ता ठंडा गया. फिर तो फिल्म ने इतिहास ही रच दिया. किशोर कुमार-आशा भोसले और अमिताभ बच्चन को फिल्म फेयर अवॉर्ड मिला था. अमिताभ ने अपना अवॉर्ड प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी को समर्पित किया था.

पूरब और पश्चिम फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म के पॉप्युलर गानों में ‘कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे’, पूर्वा सुहानी आई रे, ट्विंकल-ट्विकल लिटिल स्टार, ‘भारत का रहने वाला हूं’ बहुत मकबूल हुए. फिल्म में ‘ओम जय जगदीश हरे’ आरती, ‘रघुपति राघव राजाराम’ भजन थी. जब यह आरती-भजन सिनेमाघरों में चलते थे तो मंदिर की फीलिंग आती थी. फिल्म का सबसे मार्मिक सॉन्ग ‘है प्रीत जहां की रीत सदा..भारत का रहने वाला हूं’ का फिल्म की कहानी के मुताबिक लंदन में चलता है लेकिन यह सॉन्ग असल में महबूब स्टूडियो में फिल्माया गया था.

पूरब और पश्चिम फिल्म के फिल्मांकन की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि आजादी से पहले के सीन ब्लैक एंड व्हाइट थे. आजादी के बाद के सीन रंगीन थे. स्क्रीन पर फिल्म का नाम भी एकसाथ नहीं दिखाया गया था. 17 मिनट की फिल्म निकलने के बाद आजादी के सीन के बाद स्क्रीन पर ‘पूरब’ लिखा आता है. 35 मिनट की फिल्म निकलने के बाद जब मनोज कुमार विदेश पहुंच जाते हैं और सायरा बानो सिगरेट पीते हुए स्क्रीन पर नजर आती हैं तो वहां पर ‘और पश्चिम’ लिखा आता है. फिल्म के जरिये मनोज कुमार ने पश्चिम संस्कृति के खोखलापन को दिखाया. यह भी दिखाया कि केवल आजादी काफी नहीं. पश्चिम में लालच-वासना-भ्रष्टाचार है जबकि भारत में प्यार-सम्मान-सदाचार-सच्चाई है. पूरब और पश्चिम देखकर विदेश में रहने वाले कई भारतीय देश वापस लौट आए थे. यह मूवी 1970 की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी. फिल्म ने भारत में 2.7 करोड़ का कलेक्शन किया था.

पूरब और पश्चिम की यही कालजयी थीम दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, परदेस, और नमस्ते लंदन फिल्म में दिखाई दी. ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में लंदन में रहने वाला लड़का लड़की के माता-पिता की अनुमति से ही शादी करता है. फिल्म में भारतीय संस्कृति को दिखाया गया है. शाहरुख खान ने इस किरदार को निभाया. 1997 की फिल्म ‘परदेस’ की थीम भी इसी पर बेस्ड है. महिमा चौधरी सगाई हो जाने के बावजूद शाहरुख को दिल दे बैठती हैं. 2007 में आई अक्षय कुमार-कटरीना कैफ की फिल्म ‘नमस्ते लंदन’ में भी यही सब देखने को मिलता है. नमस्ते लंदन जहां सेमी हिट रही, वहीं दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे तो ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म में शुमार है. परदेस सुपरहिट रही थी.
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