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Bollywood Cult Classic Film Unknown Facts : कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिन्हें आप बार-बार देखेंगे फिर भी मन नहीं भरेगा. ऐसी ही एक फिल्म 1987 में रुपहले पर्दे पर आई थी. यह फिल्म नहीं बल्कि खूबसूरत अहसास थी. फिल्म में रिलेशनशिप-शादी की जटिलताओं को खूबसूरती के साथ दिखाया गया था. फिल्म के डायलॉग-म्यूजिक दिल को छू लेने वाले थे. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमाल तो नहीं दिखा सकी लेकिन आज यह फिल्म कल्ट क्लासिक का स्टेटस पा चुकी है. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं इससे जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स…..
गीतकार गुलजार बॉलीवुड के जाने-माने फिल्मकार में से एक हैं. उन्होंने कई फिल्मों की कहानी लिखी, स्क्रीनप्ले लिखे हैं.डायलॉग लिखे हैं. कई फिल्मों का डायरेक्शन किया है. उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत ही यही है कि वो दर्शकों के दिल-दिमाग में अपना असर छोड़ गई. 1987 में गुलजार ने ऐसी ही एक आर्ट फिल्म बनाई थी. फिल्म का कहानी-म्यूजिक दिल को सुकून देने वाला था. इस फिल्म का नाम ‘इजाजत’ था जिसे 11 सितंबर 1987 को रिलीज किया गया था.

इजाजत फिल्म एक अहसास है. जज्बात से भरी एक कहानी है. इजाजत फिल्म एक प्यार और त्याग की कहानी है. निश्छल प्रेम की कहानी है. रिश्तों की जटिलता को खूबसूरती से दिखाती है. शादी जैसे संवेदनशील मुद्दे को सामने रखती है. यह एक म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म थी जिसका डायरेक्शन गुलजार ने किया था. फिल्म की कहानी बंगाली कहानी जतुगृहा पर बेस्ड थी जिसे सुबोध घोष ने लिखा था. इस पर इसी नाम से 1964 में एक बंगाली फिल्म बनाई गई थी.

इजाजत फिल्म में रेखा, नसीरुद्दीन शाह, अनुराधा पटेल लीड रोल में थे. शशि कपूर का कैमियो था. फिल्म एक ऐसे कपल की कहानी दिखाती है जो आपसी सहमति से अलग हो जाते हैं और फिर संयोगवश एक रेलवे स्टेशन पर मिलते हैं. ट्रेन का इंतजार करने के दौरान दोनों को एकदूसरे की जिंदगी से जुड़े राज पता चलते हैं. यह एक आर्ट फिल्म थी. म्यूजिक कैटेगरी में मूवी को बेस्ट फिल्म का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म का आखिरी सीन एक देखने के लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए. यह सीन कालजयी माना जाता है.
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फिल्म के डायलॉग दिल को छू लेने वाले थे. आरडी बर्मन का म्यूजिक फिल्म की आत्मा के जैसे हैं. फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है’ था. इस गाने के लिए आशा भोसले को फिल्म फेयर अवॉर्ड और नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. यह गाना फिल्म की भावना-भाव को और अधिक गहरा कर देते हैं.

फिल्म दर्शकों की भावनाओं को अंदर तक झकझोर देती है. यह गीत गुलजार ने ही लिखा था. फिल्म में रेखा ने संवेदनशील ढंग से अपना किरदार निभाया था. तीनों की एक्टिंग फिल्म को एक अलग लेवल पर पहुंचा देते हैं. इजाजत फिल्म हर दर्शक को अपने से जोड़ लेती है. हर दर्शक को लगता है जैसे यह उसकी ही कहानी हो. यह फिल्म हर उस दर्शक के लिए है जिसने किसी ना किसी रूप में प्रेम को महसूस किया हो. बॉलीवुड में ऐसी खूबसूरत कम ही बनी हैं.

नसीरुद्दीन का रोल सबसे पहले संजीव कुमार को जबकि अनुराधा पटेल का रोल पहले स्मिता पाटिल को ऑफर हुआ था. जब यह फिल्म रिलीज हुई तो दोनों ही इस दुनिया से जा चुके थे. दोनों का दुखद निधन हो चुका था. फिल्म में रेखा का रोल एक प्रोगेसिव महिला के रूप में था. जो अपने फैसले खुद ले सकती है. जो पति को दूसरी लड़की के प्यार में देखकर वो उसे छोड़कर जीवन में आगे बढ़ जाती है. रेखा ने अपने अभिनय से इस किरदार में जान डाल दी थी.

इस फिल्म में शम्मी कपूर और शशि कपूर दोनों भाइयों ने भी काम किया था. दोनों का स्पेशल अपीयरेंस था. गुलजार ने भी पहली बार दोनों के साथ काम किया था. यश जौहर इस फिल्म को विनोद खन्ना, हेमा मालिनी और रेखा के साथ 1979 में बनाना चाहते थे लेकिन विनोद ने फिल्मों से संन्यास ले लिया था. 1985 में फिल्म के प्रोड्यूसर बदले. वो शत्रुघ्न सिन्हा के साथ इस फिल्म को बनाना चाहते थे लेकिन गुलजार ने इस आइडिया को खारिज कर दिया. उन्होंने नसीरुद्दीन के साथ यह फिल्म बनाई.

फिल्म का एक गाना ‘खाली हाथ शाम आई है, खाली हाथ जाएगी, आज भी ना आया कोई, खाली लौट जाएगी’ बहुत ही दर्दभरा -दिल को छू लेने वाला सॉन्ग था. इस गाने की धुन आरडी बर्मन ने अपने पिता एसडी बर्मन के बंगाली सॉन्ग ‘अमी छीनू अका’ से इंस्पायर्ड होकर बनाई थी.
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