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हम जिस हीरो की बात कर रहे हैं, वह अपनी सादगी, दमदार अभिनय और हीरोइक इमेज के लिए मशहूर थे. एक्टर को फैंस प्यार से ‘बॉलीवुड का गोल्डन बॉय’ कहते थे. उन्होंने अभिनय के लिए नेशनल अवॉर्ड भी जीता था. हालांकि, एक सेट पर थर्ड डिग्री बर्न का शिकार बन गए थे.
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा की मशहूर शख्सियत ने 1960 और 1970 के दशक में खूब काम किया. वे हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता, निर्माता और निर्देशक में से एक थे, जिन्होंने फिल्म इंडस्ट्री पर गहरा असर छोड़ा था. ‘बॉलीवुड का गोल्डन बॉय’ के नाम से मशहूर इस अभिनेता ने अपने दौर में शानदार लुक्स, दमदार आवाज और बेहतरीन स्क्रीन प्रेजेंस के साथ फैंस के दिलों में जगह बनाई थी.

3 जनवरी 1941 को कर्नाटक में जन्मे एक्टर को फिल्मों का शौक बचपन से ही था. कहते हैं कि उन्होंने 12 साल की उम्र में राज कपूर की फिल्म ‘आवारा’ देखी और तभी फिल्मों में करियर बनाने का फैसला कर लिया. फिल्मों में काम करने के जुनून के साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘टार्जन गोज टू इंडिया’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की. अब भी सोच रहे हैं कौन हैं? यह दिग्गज शख्स हैं संजय खान, जिन्हें शाह अब्बास खान के नाम से भी जाना जाता है.

1964 में संजय खान ने चेतन आनंद की वॉर क्लासिक ‘हकीकत’ में छोटे रोल से एक्टिंग डेब्यू किया था. इसी साल, उनकी दूसरी फिल्म ‘दोस्ती’ रिलीज हुई, जिसने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई. यह फिल्म न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही, बल्कि नेशनल अवॉर्ड भी जीतने में कामयाब रही.
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संजय खान ने इसके बाद 60 और 70 के दशक में कई हिट फिल्में दीं. ‘दस लाख’, ‘दिल्ली’, ‘बेटी’, ‘अभिलाषा’, ‘एक फूल दो माली’, ‘इंतकाम’, ‘उपासना’, ‘नागिन’, ‘मेला’, ‘चोरी चोरी’ और ‘काला धंधा गोरे लोग’ जैसी फिल्मों ने उनकी स्टारडम को मजबूत किया.

संजय खान ने एक्टिंग के अलावा ‘चांदी सोना’ (1977) और ‘अब्दुल्ला’ जैसी फिल्मों के साथ निर्देशक और निर्माता के तौर पर भी काम किया, फिर टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा. टेलीविजन में उन्होंने ‘द स्वॉर्ड ऑफ टीपू सुल्तान’ के साथ इतिहास रच दिया. इस प्रोजेक्ट में संजय खान ने निर्देशन के साथ-साथ टीपू सुल्तान का किरदार भी निभाया, जो 18वीं सदी के मैसूर के मशहूर शासक थे.

दूरदर्शन पर प्रसारित यह शो अपने समय के सबसे लोकप्रिय और आइकॉनिक सीरियल्स में गिना जाता है. लेकिन 8 फरवरी 1989 को मैसूर के प्रीमियर स्टूडियोज में, जहां शो की शूटिंग चल रही थी, भीषण आग लग गई. इस हादसे में 52 क्रू मेंबर्स की जान चली गई और संजय खान गंभीर रूप से घायल हो गए, उनके शरीर का 65 प्रतिशत हिस्सा थर्ड डिग्री बर्न से प्रभावित हुआ.

अभिनेता-निर्देशक को 73 सर्जरी से गुजरना पड़ा और 13 महीने अस्पताल में बिताने पड़े, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सीरियल को पूरा किया.

संजय खान ने ‘जय हनुमान’ और ‘1857 क्रांति’ जैसे ऐतिहासिक सीरियल्स बनाए, जिससे उन्हें सिनेमा से परे भी जीवनभर सम्मान और सफलता मिली. संजय खान ने होटल और रियल एस्टेट जैसे बिजनेस सेक्टर में भी काम किया था.
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