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12 से ज्यादा प्रोड्यूसर्स ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट देखकर हाथ खड़े कर दिए और तीन बड़े सुपरस्टार्स ने भी ग्रे शेड वाले किरदार को ठुकरा दिया. कहानी जोखिम भरी मानी जा रही थी और किसी को भरोसा नहीं था कि दर्शक इसे अपनाएंगे. तभी यह स्क्रिप्ट एक ऐसे अभिनेता के हाथ लगी, जिसने मौके को पहचाना और चुनौती स्वीकार कर ली. दमदार अभिनय और अलग अंदाज ने फिल्म को पहचान दिलाई और यह सिनेमा की धारा बदलने वाली मिसाल बन गई.
नई दिल्ली. करीब आधा दर्जन से ज्यादा दरवाजों से लौटाई गई एक स्क्रिप्ट, तीन-तीन बड़े सितारों की साफ मनाही और लगातार नाकामी का डर… इस फिल्म की शुरुआत कुछ ऐसी ही रही. कहानी एक ऐसे किरदार पर आधारित थी, जो हीरो होते हुए भी पूरी तरह मासूम नहीं था. यही वजह थी कि कई प्रोड्यूसर्स को यह विषय जोखिम भरा लगा और उन्होंने इससे दूरी बना ली. बड़े सितारों को भी ग्रे शेड वाला रोल रास नहीं आया. लेकिन, जब यह स्क्रिप्ट एक ऐसे अभिनेता के हाथ लगी, जो तब अपने करियर के निर्णायक मोड़ पर था तो तस्वीर बदल गई. उसने कहानी की ताकत पहचानी और बिना हिचक इसे स्वीकार कर लिया. शूटिंग के दौरान आर्थिक संकट, निजी नुकसान और कमजोर ओपनिंग जैसी मुश्किलें भी आईं, लेकिन दमदार अभिनय और यादगार संगीत ने दर्शकों को बांध लिया. नतीजा यह हुआ कि जो फिल्म कभी नकार दी गई थी, वही आगे चलकर बॉलीवुड की दिशा बदलने वाली मिसाल बन गई.

बॉलीवुड की क्लासिक फिल्मों में ‘डॉन’ का नाम सुनते ही अमिताभ बच्चन का वो डायलॉग ‘डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है’ याद आ जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह फिल्म बनने से पहले कितनी रिजेक्शन झेल चुकी थी? सलीम-जावेद की लिखी इस स्क्रिप्ट को 12 प्रोड्यूसर्स ने ठुकरा दिया था और देव आनंद, धर्मेंद्र, जीतेंद्र जैसे 3 सुपरस्टार्स ने लीड रोल निभाने से इनकार कर दिया. आखिरकार, अमिताभ बच्चन ने इसे अपनाया और फिल्म को ब्लॉकबस्टर बना दिया. फाइल फोटो.

1978 में रिलीज हुई यह क्राइम थ्रिलर चंद्रा बारोट द्वारा निर्देशित थी. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने डॉन और उसके लुकअलाइक विजय का डबल रोल निभाया, जबकि जीनत अमान, प्राण, इफ्तेखार, हेलेन, ओम शिवपुरी, मैक मोहन, सत्येन कप्पू और पिंचू कपूर जैसे कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं कीं. कहानी एक वांटेड क्रिमिनल की मौत के बाद उसके हमशक्ल द्वारा उसके गैंग को एक्सपोज करने की थी. उस दौर में जहां रिवेंज ड्रामा और इमोशनल फिल्में छाई हुई थीं, ‘डॉन’ एक क्लटर-ब्रेकर साबित हुई. फाइल फोटो.
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सलीम-जावेद ने स्क्रिप्ट लिखी, लेकिन इसे इंडस्ट्री में हर जगह रिजेक्ट किया गया. देव आनंद, धर्मेंद्र और जीतेंद्र को ऑफर किया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया. दिलचस्प बात यह कि जीतेंद्र ने खुद अमिताभ बच्चन को यह रोल सुझाया. जीतेंद्र ने डायरेक्टर और प्रोड्यूसर से अमिताभ का नाम सिफारिश की और खुद फोन करके उन्हें मनाया. अमिताभ ने स्क्रिप्ट सुनी और हामी भर दी. फिल्म की सफलता के बाद अमिताभ ने जीतेंद्र को धन्यवाद दिया और उनकी स्क्रिप्ट चॉइस की तारीफ की. फाइल फोटो.

कास्टिंग के अलावा प्रोडक्शन में भी मुश्किलें आईं. सलीम-जावेद ने स्क्रिप्ट को ‘ब्रेकफास्ट स्क्रिप्ट’ कहा क्योंकि इसे ब्रेकफास्ट के दौरान जल्दी-जल्दी लिखा गया था. 12 प्रोड्यूसर्स ने इसे रिजेक्ट किया, लेकिन फिर नरीमन ईरानी ने इसे अपना. नरीमन उस समय 12 लाख रुपये के कर्ज में थे, क्योंकि उनकी पिछली फिल्म ‘जिंदगी जिंदगी’ फ्लॉप हो गई थी। सलीम-जावेद ने उनकी हालत देखकर स्क्रिप्ट फ्री में दी. फाइल फोटो.

शूटिंग के दौरान ट्रेजडी हुई. 1977 में ‘करिश्मा कु्दरत का’ के सेट पर छत गिरने से नरीमन गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई. फिल्म आधी रह गई, लेकिन उनकी पत्नी सलमा ईरानी ने कमान संभाली. उन्होंने घर गिरवी रखा और फिल्म पूरी की. अमिताभ बच्चन और जीनत अमान ने फीस नहीं ली, लेकिन फिल्म हिट होने के बाद सलमा ने प्रॉफिट से उन्हें पेमेंट किया. पूरी कास्ट ने फाइनेंशियल सपोर्ट दिया. फाइल फोटो.

फिल्म की शुरुआत सुस्त रही. रिलीज से एक हफ्ते पहले अमिताभ की ‘त्रिशूल’ रिलीज हुई थी, जो सुपरहिट चल रही थी. लेकिन वर्ड ऑफ माउथ से ‘डॉन’ ने पेस पकड़ी और ब्लॉकबस्टर बनी. बजट 1 करोड़ रुपये था, इंडिया में 3.60 करोड़ और वर्ल्डवाइड 7.20 करोड़ कमाए. आइकॉनिक गाना ‘खइके पान बनारस वाला’ आज भी हिट है. फाइल फोटो.

लीगेसी को आगे बढ़ाते हुए, फरहान अख्तर ने 2006 में शाहरुख खान के साथ रीमेक बनाया, फिर 2011 में ‘डॉन 2’. अब रणवीर सिंह ‘डॉन 3’ में लीड रोल निभाएंगे, जो एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनेगी. ‘डॉन’ ने बॉलीवुड में ग्रे शेड कैरेक्टर्स का ट्रेंड सेट किया और अमिताभ को ‘एंग्री यंग मैन’ से आगे ‘डॉन’ का टैग दिया. फाइल फोटो.
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