Makar Sankranti 2026: इस वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया गया. वहीं कुछ स्थानों में आज 15 जनवरी को भी मकर संक्रांति मनाई जा रही है. हर वर्ष मकर संक्रांति की तिथि को लेकर 14 या 15 जनवरी के बीच असमंजस की स्थिति रहती है. इस साल भी कुछ ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हुई थी.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति हमेशा से 14 या 15 जनवरी को ही नहीं मनाई जाती रही है. बल्कि सालों पहले मकर संक्रांति का पर्व 22 दिसंबर को भी मनाया गया था. भले ही यह बात आज लोगों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन पूरी तरह सच है. इसके पीछे मजबूत खगोलीय और ज्योतिषीय कारण भी है.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक डॉ. अनीष व्यास बताते हैं कि, सूर्य जब धनु राशि से मकर राशि में गोचर करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है. इस समय राशि के साथ ही सूर्य की दिशा में भी परिवर्तन होता है. सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते ही दक्षिणायण से उत्तरायण में आ जाते हैं. साथ ही मकर संक्रांति के दिन से ही खरमास भी समाप्त होता है.
22 दिसंबर को मनाई गई थी मकर संक्रांति
वैज्ञानिक मतो के अनुसार, करीब 1700 साल पहले मकर संक्रांति 22 दिसंबर को मनाई गई थी. इसका कारण यह है कि, पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमते गुए 72 से 90 सों में एक अंश पीछे रह जाती है, जिससे कि मकर राशि में प्रवेश करने के लिए सूर्य को एक दिन की देरी हो जाती है. इसी गणना के आधार पर मकर संक्राति 1700 साल पहले 22 दिसंबर को मनाई जाती थी और इसी देरी की वजह से 19वीं सदी में मकर संक्रांति की तिथि 13 से 14 जनवरी हो गई और 21वीं सदी में 14 और 15 जनवरी की तिथि में शिफ्ट हो गई. लेकिन दो तिथियों के बीच हर साल असमंजस बना रहता है.
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