बीना/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। जनपद के ककरी–बीना खड़िया क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को लेकर स्थानीय नागरिकों में गहरी चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि औद्योगिक गतिविधियों में निरंतर वृद्धि हो रही है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपेक्षित और प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप आमजन का स्वास्थ्य तेजी से प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय निवासी राकेश, अमरेश, दयाशंकर दुबे और रामबृक्ष सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में फैली धूल, धुआं और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण दमा, खांसी, एलर्जी और हृदय रोग जैसी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। उनका कहना है कि वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में पेड़ों का कटान तेजी से हो रहा है, जबकि उसके अनुपात में वृक्षारोपण नहीं किया जा रहा। यदि कहीं पौधारोपण किया भी जाता है तो उचित देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाए गए तो खुले में स्वच्छ सांस लेना भी कठिन हो जाएगा। कुछ निवासियों ने तो यहां तक कहा कि अब क्षेत्र में नियमित रूप से मास्क का उपयोग करना मजबूरी बन गया है।
सड़क परिवहन को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई अनफिट वाहन सड़कों पर चल रहे हैं, जिनसे कोयला गिरता रहता है। वाहनों पर त्रिपाल का समुचित उपयोग नहीं किया जाता, जिससे धूल और राख वातावरण में फैलती रहती है। सड़कों के किनारे मनमाने ढंग से राखड़ गिरा दी जाती है, जो हवा चलने या वाहनों के गुजरने पर उड़कर वातावरण को और अधिक प्रदूषित करती है। ग्रामीणों ने ऐसे कृत्यों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ने संबंधित विभागों और प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करते हुए प्रदूषण पर तत्काल प्रभाव से अंकुश लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि औद्योगिकीकरण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि विकास और स्वास्थ्य के बीच संतुलन बना रहे।
वहीं, अधिकारियों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। खुले स्थानों पर वृक्षारोपण किया जा रहा है, सड़कों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जा रहा है तथा सफाई व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
इसके बावजूद क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि वर्तमान उपाय पर्याप्त नहीं हैं और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए और अधिक सख्त, ठोस एवं दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और क्षेत्रवासियों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में कितना सफल होता है।
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