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अलका याग्निक 90 के दशक की वो आवाज हैं, जिन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसे दिग्गजों के दौर में अपनी एक अलग पहचान बनाई. कोलकाता के संगीत प्रेमी परिवार से ताल्लुक रखने वाली अलका ने महज 6 साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था. फिल्म ‘तेजाब’ के गाने ‘एक दो तीन’ ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया, जिसके बाद उन्होंने ‘साजन’ और ‘कुछ कुछ होता है’ जैसे सैकड़ों सुपरहिट गाने दिए. 7 फिल्मफेयर और 2 नेशनल अवॉर्ड्स के साथ पद्म भूषण से सम्मानित अलका की आवाज आज भी करोड़ों दिलों पर राज करती है.
अलका याग्निक 6 साल की आयु से गायकी कर रही हैं.
नई दिल्ली: बॉलीवुड की प्लेबैक सिंगिंग में अलका याग्निक एक ऐसा नाम हैं, जिनकी आवाज सुनते ही 90 के दशक की वो मीठी यादें ताजा हो जाती हैं. कोलकाता के एक संगीत प्रेमी परिवार में जन्मी अलका को सुरों की समझ विरासत में मिली थी. उनकी मां शुभा याग्निक खुद एक क्लासिकल सिंगर थीं, जिन्होंने अलका को बचपन से ही तराशना शुरू कर दिया था. सोचिए, महज 6 साल की छोटी सी उम्र में जब बच्चे खेल-कूद में व्यस्त होते हैं, तब अलका आकाशवाणी (रेडियो) पर अपनी जादुई आवाज का जादू बिखेर रही थीं. किस्मत उन्हें मुंबई ले आई, जहां शो-मैन राज कपूर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें दिग्गज संगीतकारों से मिलवाया. हालांकि शुरुआत में उन्होंने डबिंग आर्टिस्ट के तौर पर भी काम किया, लेकिन उनकी मंजिल तो प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में अपना परचम लहराना था.
अलका याग्निक के करियर में असली मोड़ तब आया, जब ‘तेजाब’ फिल्म का गाना ‘एक दो तीन’ रिलीज हुआ. इस एक गाने ने उन्हें रातों-रात पूरे देश की धड़कन बना दिया. इसके बाद तो जैसे हिट गानों की झड़ी लग गई. ‘कयामत से कयामत तक’ की मासूमियत हो या ‘कुछ कुछ होता है’ का रोमांस, अलका की आवाज ने हर जज्बात को जीवंत कर दिया. सबसे बड़ी चुनौती तो यह थी कि उस दौर में लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी महान गायिकाओं का दबदबा था. ऐसे में अपनी एक अलग पहचान बनाना कोई मामूली बात नहीं थी. लेकिन अलका ने अपनी आवाज की मिठास और एक खास अंदाज से न केवल अपनी जगह बनाई, बल्कि नई पीढ़ी की सबसे पसंदीदा सिंगर बन गईं. उन्होंने उदित नारायण और कुमार सानू के साथ मिलकर ऐसे सदाबहार गाने दिए, जो आज भी शादियों से लेकर एफएम रेडियो तक की जान बने हुए हैं.
7 फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किए
संगीत की दुनिया में अलका का योगदान इतना बड़ा है कि उनके बिना 90 के दशक का बॉलीवुड अधूरा सा लगता है. उन्होंने हजारों गाने गाए और सिर्फ़ हिंदी ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू चलाया. उनकी इस मेहनत और टैलेंट का लोहा पूरी दुनिया ने माना, यही वजह है कि उनके नाम 7 फिल्मफेयर और 2 नेशनल अवॉर्ड्स दर्ज हैं. भारत सरकार ने भी उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित कर उनके कद को और बढ़ाया है. आज भले ही म्यूजिक इंडस्ट्री में कई नए सिंगर्स आ गए हों, लेकिन अलका की आवाज की वो सादगी और गहराई आज भी बेमिसाल है. करोड़ों फैंस आज भी उनके गानों को उतनी ही शिद्दत से सुनते हैं, जो यह साबित करता है कि असली हुनर वक्त की पाबंदियों से ऊपर होता है.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें
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