पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच एक अहम खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के दो गैस टैंकर (एलपीजी ले जाने वाले जहाज) जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की तैयारी कर रहे हैं। ये दोनों जहाज अभी खाड़ी के पानी में खड़े हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। बता दें कि, भारत बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करता है, और उसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। ऐसे में अगर यह रास्ता असुरक्षित होता है, तो तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम बढ़ सकते हैं, इसके साथ ही व्यापार और शिपिंग पर भी असर पड़ सकता है।
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क्यों रुकी जहाजों की आवाजाही?
पिछले 24 घंटों में कोई भी कच्चा तेल ले जाने वाला जहाज इस रास्ते से नहीं गुजरा है। जानकारी के मुताबिक, एक खाली तेल टैंकर, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है, वापस ईरान की तरफ लौट गया है। इससे साफ है कि क्षेत्र में तनाव और खतरे की वजह से जहाज कंपनियां फिलहाल सावधानी बरत रही हैं।
पूरी दुनिया क्यों चिंतित है?
क्योंकि, दुनिया का 20% तेल यहीं (होर्मुज जलडमरूमध्य) से गुजरता है। अगर यहां कोई बड़ा विवाद या हमला होता है, तो ग्लोबल तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अभी स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन भारत के जहाज फिर से इस रास्ते से गुजरने की तैयारी कर रहे हैं। इसका मतलब है कि भारत कूटनीतिक तरीके से अपने ऊर्जा परिवहन को कायम रखने में सफल हो रहा है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य क्या है?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जो खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां की हर हलचल पूरी दुनिया पर असर डालती है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष और सैन्य गतिविधि
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी। ईरान के नए सर्वोच्च नेता और अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में कहा है कि ईरान अपने मारे गए लोगों का बदला जरूर लेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की नीति जारी रहेगी और पड़ोसी देशों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी बंद करनी चाहिए।












