हिंदू धर्म में पैर छूना बड़ों के प्रति सम्मान प्रकट करने का प्रतीक है. पैर छूने की प्रक्रिया जितनी आस्था और विश्वास से जुड़ी हुई है उतना ही मान्यताओं से भी इसका खास संबंध हैं. हिंदू धर्म के अनुसार 7 लोगों को कभी भी अपना पैर नहीं छूने देना चाहिए। इससे दरिद्रता बढ़ती है.

कहते है 1 भांजा या भांजी 100 ब्राह्मणों के बराबर होता है. हिंदू धर्म में ब्राह्मण को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है ऐसे में भांजा या भांजी को अपने मामा-मामी के पैर नहीं छून चाहिए. इससे सामने वाला पाप का भागी बनता है, मान्यता अनुसार उनका सौभाग्य दुर्भाग्य में बदल सकता है.

कन्या को देवी का स्वरूप माना गया है. ऐसे में कुंवारी लड़कियों से कभी पैर नहीं छुवाने चाहिए. इससे व्यक्ति को दोष लगता है. ऐसा करने पर इसका उल्टा प्रभाव घर पर देखने मिलता है.

जब कोई व्यक्ति सो रहा हो तब उसके पैर नहीं छूना चाहिए. इसे अशुभ माना गया है. कहा जाता है जीवित व्यक्ति निद्रा में हो और उसके पैर छूने पर उसकी उम्र घटती है. वैदिक शास्त्रों के मुताबिक केवल मृत व्यक्ति के ही लेटे हुए अवस्था में पैर छुए जा सकते हैं.

मंदिर में कोई अपना मिल जाए तो वहां उसके पैर नहीं छूना चाहिए, मंदिर ईश्वर का स्थान है, यहां देवी-देवता से बड़ा किसी को नहीं माना जाता है.

अगर आप अशुद्ध हैं, शौच की अवस्था में हैं, श्मसान घाट से आए हैं तो किसी के पैर न छुएं इससे उल्टा प्रभाव पड़ता है.
Published at : 13 Aug 2025 06:35 AM (IST)
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