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Bollywood Movies with Same Title : वैसे तो हर फिल्म का टाइटल यूनिक होता है, फिर भी बॉलीवुड में सेम टाइटल पर कई फिल्में बनाई गई हैं. यह ट्रेंड बहुत पुराना है. हिंदी सिनेमा के इतिहास की कालजयी फिल्मों से मिलते-जुलते नाम पर भी मूवी के टाइटल रखे गए. कुछ फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर सफलता मिली तो कुछ डिजास्टर साबित हुईं. 45 साल में दो बार एक ही नाम से दो फिल्में रिलीज हुईं. एक जहां हिंदी सिनेमा की मास्टर पीस साबित हुई, वहीं दूसरी फिल्म सुपरफ्लॉप रही. ये दोनों फिल्में कौन सी हैं, आइये जानते हैं इनसे जुड़े दिलचस्प तथ्य……
1957 की एक मास्टरपीस फिल्म के सेम टाइटल पर 2002 में एक फिल्म बनाई गई थी. दोनों फिल्मों के कथानक अलग-अलग थे लेकिन नाम एक जैसे थे. 1957 में आई फिल्म का नाम था : प्यासा. प्यासा नाम सुनते ही गुरुदत्त साहब की छवि मन-मस्तिष्क में उभरने लगती है. प्यासा फिल्म को भारतीय सिनेमा की सार्वकालिक महान फिल्म में शामिल किया जाता है. विश्व की महान फिल्मों में इसकी गिनती होती है. प्यासा कई भारतीय कई फिल्ममेकर के लिए प्रेरणा है. प्यासा नाम से 2002 में भी एक फिल्म बनाई गई थी लेकिन बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुई थी. आइये जानते हैं दोनों फिल्में से जुड़े रोचक किस्से…..

सबसे पहले बात करते हैं 22 फरवरी 1957 को रिलीज हुई गुरुदत्त-वहीदा रहमान और माला सिन्हा, महमूद और जॉनी वॉकर स्टारर कालजयी फिल्म ‘प्यासा’ की. फिल्म की कहानी-डायरेक्शन गुरुदत्त का था. फिल्म की कहानी कोलकाता बेस्ड थी. गुरुदत्त ने विजय का रोल निभाया था. प्रोड्यूसर भी गुरु दत्त थे. म्यूजिक एसडी बर्मन का था. गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. प्यासा फिल्म की कामयाबी में उसके गीतों ने जबर्दस्त भूमिका निभाई थी. यह बात अलग है कि इस फिल्म के बाद एसडी बर्मन और साहिर लुधियानवी ने कभी एकदूसरे के साथ काम नहीं किया. फिल्म का सदाबहार गाना’सर तो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए, आजा प्यारे पास हमारे, काहे घबराए’ की धुन एसडी बर्मन के बेटे आरडी बर्मन ने बनाई थी.

‘प्यासा’ फिल्म को बनाने का आइडिया गुरुदत्त के मन में 1947-48 के दौरान आया था. गुरुदत्त की बहन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म की स्टोरी उनके पिता की लाइफ से इंस्पायर्ड थी. वो लेखक बनना चाहते थे लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के बोझ तले दब गए और उन्होंने अपना सपना छोड़ दिया. गुरुदत्त ने शुरुआत में जो कहानी लिखी थी उसका नाम कशमकश रखा था. फिर उनकी मुलाकात राइटर अबरार अल्वी से हुई. अबरार ने रेड लाइट एरिया से जुड़ी एक कहानी बताई. गुरुदत्त ने उसे जोड़कर ‘प्यासा’ फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार की. इस तरह से ‘प्यासा’ फिल्म में गुलाबो का कैरेक्टर आया.
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गुरुदत्त इस फिल्म को दिलीप कुमार, नगरिस और मधुबाला के साथ बनाना चाहते थे. मुहुर्त शॉट के दौरान डायरेक्टर गुरुदत्त दिलीप कुमार का इंतजार ही करते रह गए, फिर उन्होंने खुद ही एक्टिंग करने का मन बनाया. बताया जाता है कि दिलीप कुमार जो फीस मांग रहे थे, उसे गुरु दत्त ने कम करने का अनुरोध किया था. बात नहीं बनी. दिलीप कुमार ने गुरु दत्त से कहा कि वो फिल्म के डिस्ट्रीब्यूशन में मदद कर देंगे. गुरुदत्त ने यह बात चुभ गई. फिल्म की कहानी का कुछ हिस्सा गीतकार साहिर लुधियानवी और लेखिका अमृत प्रीतम के असफल प्रेम संबंध पर बेस्ड था. दिलचस्प बात यह है कि शुरू में ‘प्यासा’ फिल्म दर्शकों को समझ नहीं आई थी. धीरे-धीरे दर्शकों में रुझान बढ़ा.

प्यासा फिल्म का नेट कलेक्शन 1 करोड़ के आसपास था. नया दौर और मदर इंडिया के बाद यह 1957 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई. इस फिल्म के बजट की सटीक जानकारी नहीं मिलती. कॉमर्शियल सक्सेस के साथ-साथ इस फिल्म ने जो नाम कमाया, जो स्टेटस हासिल किया, वो किसी मूवी को विरले ही मिलता है. फिल्म मेकर्स और सिने प्रेमी इस फिल्म को पूजते हैं. इस मूवी से फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखते हैं. प्यासा दुनियाभर की महानतम फिल्मों में शुमार है.

गुरुदत्त की फिल्म प्यासा 1957 में आई थी. ठीक 45 साल बाद 2002 में ‘प्यासा’ टाइटल से एक और फिल्म बनाई गई. इसमें आफताब शिवदसानी और पूर्व मिसवर्ल्ड युक्ता मुखी, जुल्फी सैयद लीड रोल में थे. डायरेक्टर ए. मुथू थे. रमेश शर्मा फिल्म के प्रोड्यूसर थे. स्टोरी-स्क्रीनप्ले-डायलॉग संजीव दुग्गल और जलेस शेरवानी ने लिखे थे. जुल्फी सैयद का रोल पहले संजय सूरी को ऑफर हुआ था लेकिन उन्होंने फिल्म में काम करने से इनकार कर दिया था. वो डायरेक्टर ए. मुथू के साथ ‘तेरा जादू गया’ में काम कर चुके थे.

युक्त मुखी को फिल्म में काम करने के दौरान कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा. प्रोड्यूसर रमेश शर्मा ने उनका पेमेंट देने में बहुत आनाकानी की थी. फिल्म के हीरो आफताब शिवदसानी और एक्ट्रेस के बीच फिल्म की शूटिंग के दौरान कोई बातचीत नहीं होती थी. इसके चलते फिल्म डिले हो गई. दोनों के बीच कोई केमिस्ट्री भी नहीं बन पाई, इसका असर फिल्म की क्वालिटी पर भी पड़ा. 11 अक्टूबर 2002 को जब फिल्म रिलीज हुई तो डिजास्टर साबित हुई.

यह फिल्म लव स्टोरी-रोमांटिक ड्रामा थी. 2.25 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने सिर्फ 66 लाख की कमाई की थी. 2001 में आई कसूर फिल्म के बाद यह दूसरा मौका था जब आफताब शिवदसानी निगेटिव रोल में थे. 1999 में मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वाली युक्ता मुखी का भी करियर शुरू होने से पहले ही डूब गया. युक्ता मुखी की पर्सनल लाइफ भी विवादों में रही. जिस हाइट ने उन्हें ‘मिस वर्ल्ड’ का खिताब दिलाया था, वही फिल्मों में दुश्मन बन गई. 2008 में युक्ता ने उद्योगपति प्रिंस तुली से शादी कर ली. 2013 में तलाक हो गया. अब एक्ट्रेस गुमनाम जिंदगी जी रही है.
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