सोनभद्र/एबीएन न्यूज। जिलाधिकारी बी.एन. सिंह ने नागरिकों से आह्वान किया है कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि तिरंगा भारत के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है तथा यह हमारे राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान का प्रतिनिधित्व करता है। प्रत्येक नागरिक के मन में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति प्रेम, आदर और निष्ठा की भावना होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि भारतीय झंडा संहिता, 2002 में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। 30 दिसंबर 2021 के आदेशानुसार संशोधन के बाद अब पॉलिएस्टर के कपड़े से बने और मशीन द्वारा निर्मित राष्ट्रीय ध्वज की अनुमति दी गई है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काते और बुने हुए अथवा मशीन द्वारा निर्मित सूती, पॉलिएस्टर, ऊनी, सिल्क या खादी के कपड़े से बनाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति, गैर-सरकारी संगठन या शैक्षणिक संस्था सभी दिनों और अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहरा या प्रदर्शित कर सकती है, बशर्ते उसकी मर्यादा और सम्मान का पूर्ण ध्यान रखा जाए। 20 जुलाई 2022 के संशोधन के अनुसार अब खुले स्थान या घर पर प्रदर्शित राष्ट्रीय ध्वज को दिन और रात दोनों समय फहराया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय ध्वज का आकार आयताकार होगा तथा उसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होना चाहिए। ध्वज को सदैव सम्मानजनक और पृथक स्थान पर फहराया जाए। फटा, मैला या क्षतिग्रस्त ध्वज प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही किसी अन्य झंडे के साथ एक ही ध्वज-दंड पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जा सकता।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय झंडा संहिता, 2002 के भाग-तृतीय की धारा-IX में उल्लिखित गणमान्य व्यक्तियों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल आदि को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना अनुमन्य नहीं है।
जिलाधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 तथा भारतीय झंडा संहिता, 2002 से संबंधित विस्तृत जानकारी गृह मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़ी सभी निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
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