Ramadan 2026: मंगलवार 24 फरवरी को रमजान का छठा रोजा रखा गया. पाक महीने रमजान में मस्दिज और घरों में इबादत का दौर जारी है. कुरआन-ए-पाक की तिलावत जारी है. सभी की जुबां पर सुब्हानअल्लाह, अलहम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर का वजीफा है. कसरत से कलमा पढ़ा जा रहा है.
पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में दुरुद ओ सलाम का नजराना पेश किया जा रहा है. अल्लाह के बंदे दिन में रोजा रख कर व रात में तरावीह की नमाज पढ़कर अल्लाह का शुक्र अदा कर रहे है.
मंगलवार की सुबह सभी ने सहरी खाई. दिनभर इबादत की और घरों में दोपहर से इफ्तार बननी शुरु हुई. शाम तक इफ्तार तैयार हो गई. लजीज पकवान दस्तरख्वान पर सजाए गए. सबने मिलकर दुआ की. तय समय पर सभी ने मिलकर रोजा खोला और अल्लाह का शुक्र अदा किया. मस्जिदों व मदरसों में तरावीह नमाज के लिए भीड़ उमड़ रही है.
तुर्कमानपुर में बिक रहा है दही बड़ा, शाही टुकड़ा, शाही खीर व बिरयानी
इशा व तरावीह नमाज खत्म होने के बाद सहरी के सामानों की खरीदारी शुरु हो रही है. बाजारों व मुस्लिम मोहल्लों तुर्कमानपुर, जाहिदा बाद, रसूलपुर, नखास आदि में देर रात तक रौनक बनी रह रही है. तुर्कमानपुर के इस्माइली दस्तरख्वान दुकान पर बिरयानी, शाही खीर, शाही टुकड़ा, ईरानी दही बड़ा खूब बिक रहा है. दही बड़ा तीस रुपए में मिल रहा है. एक डिब्बे में दो पीस दही बड़ा रहता है. दही बड़ा के सौ डिब्बे रोजाना तैयार हो रहे हैं और बिक जा रहे हैं. इसके अलावा बिरयानी वगैरह की भी डिमांड रह रही है.
इस्माइली दस्तरख्वान चलाने वाले हाफिज अशरफ रजा व हाफिज सैफ अली ने बताया कि सुबह 11 बजे से दुकान खुल रही है और देर रात 1 बजे तक लोगों की भीड़ रह रही है. इसके अलावा इनकी दुकान पर खजूर, चिप्स, ब्रेड सहित तमाम आइटम और भी बिक रहे हैं. तुर्कमानपुर, जाहिदा बाद, नखास में तमाम तरह की रोटियां, बिरयानी, चिकन बर्रा, कबाब आदि जबरदस्त तरीके से लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं. चाय खाने भी देर रात तक गुलजार रह रहे हैं.
रमजान की रातों में इबादत से गुनाह होंगे माफ: मौलाना महमूद
चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर के इमाम मौलाना महमूद रजा कादरी ने बताया कि अल्लाह तआला ने कुरआन-ए-पाक में फरमाया “ऐ ईमान वालों तुम पर रोजे फर्ज किए गए जैसे कि पिछलों पर फर्ज हुए कि तुम्हें परहेजगारी मिले”. मुसलमान सिर्फ अल्लाह की रजा के लिए साल मे एक महीना अपने खाने-पीने, सोने-जागने के समय में तब्दीली करता है. जो भी ईमान की वजह से और सवाब के लिए रमजान की रातों का कयाम (जाग कर इबादत) करेगा उसके अगले-पिछले गुनाह बख्श दिए जाते हैं. रमजान की सुबह-शाम अल्लाह व रसूल के जिक्र में गुजारें. दूसरों की मदद करें. नेक बनें और दूसरों को नेक बनने की दावत दें.
रमजान में खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत: डॉ. मुबस्सिर अली
डॉ. मुबस्सिर अली ने बताया कि रमजान में खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. ऐसी चीजें खायें जिससे जिस्म को ताकत मिले. खजूर, फल व सादा खाना खायें. सादा पानी खूब पिएं. तली भुनी चीजें खानें से परहेज़ करें. अल्लाह का एहसान है कि उसने हमें रोजे जैसी अजीम नेमत अता की. सहरी की न सिर्फ इजाजत दी, बल्कि इसमें हमारे लिए ढेरों सवाब भी रखा. सहरी में बरकत है. फज्र की अजान के दौरान खाने पीने की इजाजत नहीं है. अजान हो या न हो, आप तक आवाज पहुंचे या न पहुंचे सुबह सादिक होते ही आपको खाना-पीना बिल्कुल ही बंद करना होगा. किसी को ये गलतफहमी न हो जाए कि सहरी रोजे के लिए शर्त है. ऐसा नहीं है. सहरी के बगैर भी रोजा हो सकता है. मगर जानबूझकर सहरी न करना ठीक नहीं है. एक अजीम सुन्नत से महरूमी है और ये भी याद रहे कि सहरी में खूब डटकर खाना भी जरूरी नहीं हैं. चंद खजूरें और पानी ही अगर ब नियते सहरी इस्तेमाल कर लें तब भी सुन्नत अदा हो जाएगी.
हैज आने से रोजा टूट जाएगा: उलमा किराम
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर मंगलवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा. उलमा ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया.
सवाल: रोजे की हालत में अगर हैज (माहवारी) आ जाए तो उसके लिए क्या हुक्म है?
जवाब: रोजे की हालत में अगर मगरिब से पहले पहले किसी भी समय महिला को हैज आ जाए तो उसकी वजह से रोजा फासिद (टूट) हो जाएगा और पाक होने के बाद उस रोजे की कजा रखना जरूरी होगा.
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