दुद्धी/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। कस्बा स्थित भाऊराव देवरस राजकीय महाविद्यालय में वार्षिक उत्सव एवं पुरस्कार वितरण समारोह बड़े ही भव्य और उत्साहपूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्ति पूर्व प्राचार्य डॉ. रामजीत यादव एवं उनकी धर्मपत्नी रहीं। समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राम सेवक सिंह यादव ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. रामजीत यादव ने अपने संबोधन में कहा कि यह महाविद्यालय अपने स्वर्ण जयंती वर्ष को पार कर निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि कॉलेज की स्थापना वर्ष 1973 में हुई थी और तब से यह क्षेत्र में उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। उन्होंने सफल आयोजन के लिए कॉलेज परिवार को बधाई देते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया।

समारोह के दौरान छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनमें एकल नृत्य, समूह नृत्य, हास्य प्रस्तुति और नाटक शामिल रहे। इन कार्यक्रमों ने उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को मेडल, मोमेंटो एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रभु सिंह (सिविल बार अध्यक्ष), कुलभूषण पांडे (वर्तमान अध्यक्ष, दुद्धी बार), पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद यादव, सचिव दिनेश कुमार, संतोष सिंह तथा अखिल विद्यार्थी परिषद के विवेक जी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त मुख्य शास्ता राजेश भारती, वरिष्ठ समाजसेवी रामेश्वर राय, प्रोफेसर अजय कुमार, डॉ. गीता, डॉ. सचिन, डॉ. राकेश कन्नौजिया, डॉ. राजेश यादव, डॉ. विवेकानंद, डॉ. दिनेश चंद्र, डॉ. अंकिता, डॉ. प्रियंका, कर्मचारी मृत्युंजय यादव, उमेश कुमार, संतोष कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के अभिभावक एवं क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन मिथलेश गौतम द्वारा किया गया। समारोह ने महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया।
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