सोनभद्र/एबीएन न्यूज। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ग्राम बावन बुजुर्ग बल्ला निवासी श्री सुजीत कुमार चौधरी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे श्री सुजीत ने जब मत्स्य पालन के क्षेत्र में कदम रखा, तब उन्होंने न केवल अपनी राह स्वयं बनाई, बल्कि प्रदेश के अन्य युवाओं को भी एक नई दिशा दी।
श्री सुजीत कुमार चौधरी ने अपने करियर की शुरुआत एक सफल आईटी प्रोफेशनल के रूप में की थी, उन्होंने लगभग 11 वर्षों तक देश-विदेश की नामचीन कंपनियों में काम किया, जिसमें डेढ़ वर्ष तक इंफोसिस और लगभग 9 वर्षों तक इंडस वैली पार्टनर्स में सेवाएं दीं, वे अमेरिका में बतौर एसोसिएट डायरेक्टर के रूप में कार्यरत रहे। वर्ष 2016 में उन्होंने अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी “इरेमेडियम” की नींव रखी, जो आज नोएडा से सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।
कोविड-19 के दौरान वर्ष 2020 में जब उनके माता-पिता अस्वस्थ हुए, तो उन्होंने नोएडा से लखनऊ स्थानांतरित होने का निर्णय लिया। इसी दौरान उनकी मुलाकात मत्स्य विभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रायबरेली से हुई, जिनसे प्रेरणा लेकर उन्होंने मत्स्य पालन के क्षेत्र में कदम रखा।
श्री सुजीत ने रायबरेली जिले के गांव बेहटा खुर्द में 3 तालाबों एवं 4 बायोफ्लॉक टैंकों के माध्यम से मत्स्य पालन आरंभ किया। उन्होंने विज्ञान और तकनीक के समन्वय से मत्स्य पालन को न केवल लाभकारी बनाया, बल्कि उसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल भी बनाया। उन्होंने अपने फार्म पर इलेक्ट्रॉनिक रिमोट सेंसर और ई-रिक्शा आधारित जीवित मछली विक्रय केंद्र “एक्वा व्हील” की स्थापना की, जिसमें ऑक्सीजन, तापमान नियंत्रण एवं जल फिल्टरिंग की संपूर्ण व्यवस्था है। अभी तक वे ऐसे तीन ई-रिक्शा लॉंच कर चुके हैं, जिससे ताजा और स्वच्छ मछलियां सीधे उपभोक्ता तक पहुंचती हैं।
वे प्रति एकड़ 2 से 3 गुना अधिक पंगेसियस मछली का उत्पादन करते हैं तथा प्रति वर्ष 1.5-2 बार फसल लेते हैं, जिससे औसतन 20 टन उत्पादन प्रति एकड़ हो जाता है। उनकी सीड रियरिंग यूनिट में मछलियों को ग्रोआउट तालाब में स्थानांतरित करने से पहले 150-200 ग्राम तक विकसित किया जाता है। वे “जीरो पॉइंट कल्चर” तकनीक का प्रयोग करते हैं, जिससे तालाब कभी खाली नहीं होते और हर हार्वेस्ट के बाद मछली के बच्चे पुनः डाले जाते हैं।
आज श्री सुजीत के मत्स्य फार्म का कुल क्षेत्रफल लगभग 350 एकड़ है, जो रायबरेली, उन्नाव और प्रतापगढ़ में फैला हुआ है। उनके मत्स्य उत्पादों में पंगेसियस का उत्पादन 10-12 टन प्रति एकड़ प्रति फसल, आईएमसी (भारतीय प्रमुख कार्प मछलियों) का 4-5 टन प्रति एकड़ प्रति वर्ष तथा समुद्री झींगा का 1.5-2 टन प्रति एकड़ प्रति फसल है।
वर्ष 2022 में उन्हें “नेशनल बेस्ट फिश फार्मर (इनलैंड)” का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ, जो उनकी मेहनत और नवाचार का प्रमाण है। उनकी कंपनी “एक्वाक्स प्राइवेट लिमिटेड” का चयन देश के प्रतिष्ठित “एग्री उड़ान 7.0 एक्सेलेरेटर प्रोग्राम” के लिए किया गया है, जो नाबार्ड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी द्वारा संचालित है। इस प्रोग्राम में देशभर की केवल 17 कृषि कंपनियों को चुना गया है।
श्री सुजीत ने रायबरेली में पहली बार समुद्री झींगा (श्रिम्प) की खेती शुरू करके खारे पानी से प्रभावित खेतों के किसानों को एक नई राह दिखाई है। वे कहते हैं कि भारत से समुद्री झींगा का लगभग 50,000 करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात होता है, और उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह अत्यंत लाभकारी अवसर हो सकता है। श्री सुजीत की इस पहल से आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और समुद्री झींगा की खेती की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
श्री सुजीत कुमार चौधरी का सफर न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह इस बात का सशक्त उदाहरण भी है कि राज्य सरकार की योजनाएं जब जमीनी स्तर पर सही व्यक्ति तक पहुँचती हैं, तो न केवल व्यक्तिगत सफलता मिलती है, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति में भी योगदान होता है। सुजीत जैसे नवप्रवर्तनकारी युवा ही आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार कर रहे हैं।
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