सोनभद्र/एबीएन न्यूज। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में संस्कृत भाषा और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह न केवल भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर को सहेजने का प्रयास है, बल्कि युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी एक सराहनीय पहल है।
संस्कृत भाषा को संसार की सबसे प्राचीन और समृद्ध भाषाओं में माना गया है। यह केवल भाषा ही नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, संस्कृति, साहित्य, विज्ञान और जीवन मूल्यों का भी आधार रही है। वैदिक काल से लेकर वर्तमान तक इसकी रचनाएँ मौखिक और लिखित परंपरा में अक्षुण्ण बनी हुई हैं। संस्कृत की यही अमरता और वैज्ञानिकता इसे “देववाणी” की उपाधि प्रदान करती है।
प्रदेश सरकार द्वारा संस्कृत शिक्षा को प्रोत्साहन देने हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में 1164 से अधिक संस्कृत माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जिनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। पूर्व में जहाँ केवल दो राजकीय संस्कृत विद्यालय थे, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में 15 नवीन आवासीय संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों की स्थापना करायी गई है।
वर्ष 2023 में सहायता प्राप्त 900 संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण हेतु पहली बार 100 करोड़ रुपये की धनराशि प्रदान की गई। इसके साथ ही “प्रोजेक्ट अलंकार” के अंतर्गत जीर्णोद्धार एवं सुविधाओं के विकास हेतु 13.65 करोड़ की प्रथम किश्त अवमुक्त की गई है। विद्यालयों के फर्नीचर और साज-सज्जा हेतु भी अतिरिक्त 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई।
शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिये सरकार ने पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाते हुए 1020 मानदेय शिक्षकों की तैनाती की है। संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय सेवा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया है, जिसमें वित्तीय प्रबंधन, नवाचार और आधुनिक शिक्षा पद्धतियों का समावेश किया गया।
वर्ष 2019 से प्रदेश के सभी संस्कृत विद्यालयों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम आधारित नवीन पाठ्यक्रम लागू किया गया है। परंपरागत विषयों के साथ आधुनिक विषयों को सम्मिलित करते हुए संस्कृत शिक्षा को व्यावहारिक और रोजगारपरक बनाया जा रहा है।
संस्कृत विद्यालयों में छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए गए हैं। इन पाठ्यक्रमों में पौरोहित्य (कर्मकाण्ड), व्यवहारिक वास्तुशास्त्र, व्यवहारिक ज्योतिष और योग विज्ञानम् जैसे विषय सम्मिलित हैं। ये एक वर्षीय पाठ्यक्रम दो सेमेस्टर में संचालित होते हैं, जिनमें इंटर्नशिप द्वारा व्यावहारिक अनुभव पर बल दिया गया है। इन पाठ्यक्रमों में 12वीं अथवा समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण कोई भी अभ्यर्थी बिना आयु सीमा के प्रवेश ले सकता है। अध्यापक व्यवस्था संबंधित विद्यालयों द्वारा स्वयं के संसाधनों से की जा रही है।
परीक्षा प्रणाली में भी तकनीकी सुधार किए गए हैं। ऑनलाइन आवेदन, अग्रिम पंजीकरण और सीसीटीवी निगरानी में परीक्षा संचालन जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। इसके साथ ही वर्तमान सरकार ने पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा अब तक 51 संस्थाओं को नवीन मान्यता प्रदान की है।
छात्र हित में सरकार द्वारा कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, मध्याह्न भोजन और कक्षा 12 तक के पात्र छात्रों को छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है।
प्रदेश सरकार का यह सतत प्रयास न केवल संस्कृत भाषा की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित कर रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए उन्हें आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा से सशक्त बना रहा है।
![]()












