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म्यूजिकल फिल्म ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ को बनाने का आइडिया अनुराधा पौडवाल ने ही गुलशन कुमार को दिया था. दिल्ली में एक पंजाबी परिवार में 1956 में जन्में गुलशन कुमार इस फिल्म के प्रोड्यूसर थे. दरियागंज इलाके में जूस की दुकान में गुलशन अपने पिता का हाथ बंटाया करते थे. फिर उन्होंने सस्ती कैसेट्स और गाने रिकॉर्ड कर उन्हें बेचने का काम शुरू किया. नए बिजनेस गुलशन ने उनकी किस्मत बदल दी. जल्द ही उन्होंने सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी बनाई. नोएडा में एक प्रोड्क्शन कंपनी खोली. शुरुआत भक्ति गीत और भजन से की. जल्द ही उन्होंने अपना बिजनेस मुंबई में शिफ्ट कर लिया.
गुलशन कुमार ही 1989 में म्यूजिक एल्बम ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ लेकर आए थे. यह एल्बम पूरे देश में छा गया. इस म्यूजिक एल्बम के 2 करोड़ से ज्यादा कैसेट बिके थे. एल्बम की सफलता के बाद गुलशन कुमार के मन में फिल्म बनाने का आइडिया आया था. गानों के आसपास एक लव स्टोरी बुनी गई. यह फिल्म बड़े पर्दे पर कभी रिलीज ही नहीं हुई. यह फिल्म सिर्फ 75 लाख रुपये में बनी थी. फिल्म का म्यूजिक आनंद-मिलिंद ने दिया था. दोनों की ‘कयामत से कयामत तक’ भी म्यूजिक हिट फिल्म रही थी.
गुलशन कुमार ने दो नए चेहरों को फिल्म में कास्ट किया था. ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ में साहिल चड्ढा और विवर्ली लीड रोल में थे. उस समय विवर्ली Allwyn फ्रिज के एड किया करती थीं. ‘चुटकी’ का जो रैपर था, उसके ऊपर जो फोटो थी, वो विवर्ली की थी. वह मॉडलिंग की दुनिया का उभरता चेहरा थीं. म्यूजिक एल्बम तो बहुत सुपरहिट रहा था लेकिन साहिल चड्ढा और विवर्ली का करियर तबाह हो गया. दोनों इस म्यूजिक एल्बम की चमक में खो गए. साहिल चड्ढा तो बहुत साल बाद बागवान फिल्म में नजर आए थे लेकिन विवर्ली गुमनामी की जिंदगी जी रही हैं.
फिल्म के निर्माण से जुड़ा किस्सा मशहूर प्लेबैक सिंगर अनुराधा पौडवाल ने शेयर किया था. उन्होंने लहरें रेट्रो को दिए अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘गुलशन जी उन दिनों जो भी एल्बम बनाते थे, हिट हो जाते थे. शिव आराधना, ममता का मंदिर, रामभजन, आशियां (गजल) सभी एल्बम हिट थे. मैंने दुर्गा सप्तशती से टी-सीरीज में एंट्री ली थी. उसके बाद तुलसी भजन, कृष्ण भजन किए. गुलशन जी ने फिर फिल्म बनाने का निर्णय लिया. फिल्म थी ममता का मंदिर. फिल्म का मुहुर्त था. जब हमने गाने तो पता चला कि वो डबल मीनिंग सॉन्ग हैं. जैसे – ‘मैं रातभर सोई, पंखा देती रही तेरी मां’, गाने सुनकर गुलशन जी बहुत नाराज हुए. फिल्म ‘माता वैष्णव देवी’ पर थी. उनका कहना था कि उन्हें कैसेट बेचना है. एक लाख कैसेट उन दिनों रोज उनकी कंपनी में बनते थे. मैंने कहा कि अगर आप पर वैष्णव देवी मां की इतनी ही कृपा है तो फिर कुछ अच्छे से सॉन्ग कैसेट में डालिए. कैसेट ही बेचना है तो एक चांस लीजिए. मैंने कहा कि कुछ नए सॉन्ग लाइये.’
अनुराधा ने आगे बताया, ‘मैंने गुलशन जी से कहा कि मुझे एक चांस दीजिए और एक एल्बम पर काम करने का मौका दीजिए. मैं म्यूजिक डायरेक्टर आनंद-मिलिंद के पास गई. मैंने उन्हें बताया कि फिल्म बनानी है. उन्होंने पूछा कि कौन हीरोइन है, कौन हीरो है. सिचुएशन क्या है? मैंने कहा कि कोई हीरोइन नहीं है. सिचुएशन वही है जो आज से 40 साल पहले से चली आ रही है. लड़का-लड़की मिले, बिछुड़ गए. यही तो होता है फिल्मों में. दुख भरे गाने बनाने हैं. इस तरह से लाल दुपट्टा मलमल का बनी.’

An accomplished digital content creator and Planner. Creating enhanced news content for online and social media. Having more than 10 years experience in the field of Journalism. Done Master of Journalism from M…और पढ़ें
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