Last Updated:
अक्सर कहा जाता है कि कई बार हकीकत, कल्पना से कहीं ज्यादा डरावनी होती है. राजस्थान के उदयपुर और प्रतापगढ़ के सागवान के घने जंगलों में भी ऐसा ही एक खौफनाक सच सालों तक पुलिस फाइलों में दफन रहा. अब वही सच्ची घटनाएं बड़े पर्दे पर फिल्म ‘सागवान’ के जरिए सामने आने वाली हैं, जिसे देखकर दर्शकों की रूह कांप सकती है.
नई दिल्ली. कहते हैं हकीकत कई बार कल्पना से भी ज्यादा डरावनी होती है. राजस्थान के उदयपुर और प्रतापगढ़ के सागवान के घने जंगलों में भी एक ऐसा ही खौफनाक सच छिपा था, जिसे सालों तक पुलिस की फाइलों में दर्ज करके बंद कर दिया गया. अब वही सच्चाई बड़े पर्दे पर आने जा रही है. फिल्म ‘सागवान’ जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है और इसका ट्रेलर देखकर ही लोगों के रोंगटे खड़े हो गए हैं.
फिल्म ‘सागवान’ की सबसे खास बात इसके लीड किरदार हिमांशु सिंह राजावत हैं. खास इसलिए क्योंकि वह कोई प्रोफेशनल एक्टर नहीं, बल्कि राजस्थान पुलिस के एक बहादुर अफसर हैं. साल 2019 में जब वह प्रतापगढ़ और धरियावद इलाके में तैनात थे, तब उनके सामने एक ऐसा केस आया, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया.
अंधविश्वास के नाम पर खून से सना खेल
यह कहानी किसी एक घटना पर नहीं, बल्कि उन सच्ची घटनाओं पर आधारित है, जहां अंधविश्वास के नाम पर मासूम बच्चियों की बलि दी गई. जांच के दौरान जो डरावना सच सामने आया, वही अब फिल्म के जरिए लोगों तक पहुंचाया जा रहा है. दक्षिणी राजस्थान के कुछ आदिवासी इलाकों में आज भी तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास की पकड़ मजबूत है. फिल्म दिखाती है कि कैसे एक तांत्रिक के झांसे में आकर एक युवक सिद्धि पाने के लालच में मासूम जिंदगियों को खत्म कर देता है. रात के अंधेरे में सागवान के जंगलों में जो कुछ होता था, वह जानकर किसी की भी रूह कांप जाए.
ये है फिल्म का खास मकसद
फिल्म का मकसद किसी समाज या समुदाय को बदनाम करना नहीं है, बल्कि उस बीमारी को सामने लाना है, जो आज भी अंधविश्वास के रूप में जिंदा है.फिल्म में कई जाने-माने चेहरे नजर आएंगे. सयाजी शिंदे अपनी दमदार आवाज और मजबूत किरदार से कहानी को मजबूती देते हैं. मिलिंद गुणाजी रहस्य और डर का माहौल और गहरा कर देते हैं. एहसान खान और रश्मि मिश्रा ने भी अपने किरदारों से कहानी को भावनात्मक बनाया है. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा हिमांशु सिंह राजावत की हो रही है. एक असली पुलिस अफसर को उसी वर्दी में, उसी तेवर के साथ पर्दे पर देखना दर्शकों के लिए बिल्कुल नया अनुभव है. उनकी एक्टिंग में कोई दिखावा नहीं, बल्कि वही सच्चाई नजर आती है, जिसे उन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान जिया है.
बता दें कि फिल्म ‘सागवान’ को सेंसर बोर्ड से UA यानी 12 प्लस सर्टिफिकेट मिल चुका है. निर्माता प्रकाश मेनारिया और सह-निर्माता अर्जुन पालीवाल का कहना है कि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बनाई गई है. इसका मकसद समाज को अंधविश्वास के खिलाफ जागरूक करना है. फिल्म से होने वाली कमाई का एक हिस्सा समाज कल्याण के कामों में भी लगाया जाएगा.
‘सागवान’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन आवाजों की कहानी है, जो सालों तक फाइलों में दबी रहीं. सवाल यही है कि क्या कानून इस अंधेरे को हरा पाएगा और क्या समाज अंधविश्वास की जंजीरों को तोड़ पाएगा. इसका जवाब जल्द ही सिनेमाघरों में मिलेगा.
About the Author

न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार का डिजिटल मीडिया में 9 सालों का अनुभव है. एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू और इंटरव्यू में विशेषज्ञता है. मुनीष ने जामिया मिल्लिया इ…और पढ़ें
![]()










