यूरोप के कई बड़े देशों ने ग्रीनलैंड को लेकर एक संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साफ संदेश दिया है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर मर्ज, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी समेत पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क के नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि ग्रीनलैंड किसी भी तरह के सौदे या दबाव का विषय नहीं है और इससे जुड़े फैसले सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोग ही करेंगे.
यूरोपीय देशों ने अपने बयान में साफ किया कि आर्कटिक क्षेत्र यूरोप और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है और इसी वजह से इस इलाके में सुरक्षा को लेकर सामूहिक रणनीति अपनाई जा रही है.
NATO संग मिलकर सुनिश्चित की जाएगी आर्कटिक की सुरक्षा- यूरोप
यूरोपीय देशों ने कहा कि आर्कटिक की सुरक्षा NATO के साथ मिलकर सुनिश्चित की जाएगी. बयान में यह भी दो टूक कहा गया कि किसी देश की सीमाएं, उसकी जमीन और उसकी संप्रभुता अटूट होती हैं. संयुक्त राष्ट्र चार्टर (UN Charter) का हवाला देते हुए यूरोप ने कहा कि सीमाएं बदली नहीं जा सकतीं और किसी देश की जमीन पर दावा नहीं किया जा सकता है.
यूरोप ने यह भी साफ किया कि अमेरिका नाटो का एक अहम साझेदार जरूर है, लेकिन ग्रीनलैंड पर फैसले का अधिकार अमेरिका को नहीं है. ग्रीनलैंड से जुड़े मामलों में अंतिम फैसला डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही लेंगे.
यूरोप ने अमेरिका को दी चेतावनी
हालांकि, बयान में किसी नेता का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने बयानों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि यूरोप ने अमेरिका को बिना नाम लिए यह समझा दिया है कि ग्रीनलैंड कोई रियल एस्टेट डील नहीं है.
कुल मिलाकर यूरोप ने अमेरिका को साफ-साफ जता दिया है कि ग्रीनलैंड की जमीन, उसकी सीमा और उसका भविष्य गैर-मोलभाव है और इस मुद्दे पर किसी बाहरी दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
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