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Bollywood Cult Classic Movies : कुछ फिल्में ऐसी होतीहैं जो समय-काल के बंधन को तोड़ देती हैं. इन फिल्मों को चाहे जितनी बार देखें, मन प्यासा ही रह जाता है. बार-बार देखने के बावजूद दिल नहीं भरता. हिंदी सिनेमा के इतिहास में 70 के दशक में ऐसी कई फिल्में रिलीज हुईं जिन्हें आज कल्ट क्लासिक माना जाता है. इन फिल्मों की कहानी, फिल्मांकन, संवाद सबकुछ अद्वितीय है. 70 के दशक में दो साल के अंतराल में ऐसी ही दो फिल्में रिलीज हुई थीं जिनकी एंडिंग एक जैसी थी. दोनों फिल्मों में लीड एक्टर सेम था. सपोर्टिंग एक्टर अलग-अलग थे. एक फिल्म देखने के लिए तो मुंबई के कॉलेज खाली हो जाते थे. ये दोनों फिल्में कौन सी थीं, आइये जानते हैं……..
70 के दशक में जहां कॉमर्शियल फिल्में जहां राजेश खन्ना के स्टारडम को एक अलग ही स्तर प्रदान कर रही थीं, वहीं कुछ ऐसी फिल्में भी रिलीज हुईं जिनकी कहानी इतनी मार्मिक थी कि सिनेमाघरों में दर्शक खूब रोए. 1970 और 1971 में महज एक साल के अंतराल में राजेश खन्ना की दो ऐसी फिल्में रिलीज हुई जिनकी गिनती कालजयी फिल्मों में होती हैं. ये फिल्में थी : सफर और आनंद. इन दोनों फिल्मों का एक-एक सीन, एक-एक डायलॉग दिल को छू लेने वाला था. आनंद फिल्म हिंदी सिनेमा के मस्ट वॉच फिल्मों की लिस्ट में शामिल है. कहा जाता है कि हर किसी को यह फिल्म अपने जीवन में एक बार जरूर देखना चाहिए. सफर फिल्म में जहां राजेश खन्ना-फिरोज खान और शर्मिला टैगोर की जोड़ी थी तो आनंद में राजेश खन्ना के साथ अमिताभ बच्चन सहायक की भूमिका में थे. आइये जानते हैं दोनों फिल्मों की कहानी, दोनों फिल्मों से जुड़े दिलचस्प किस्से…..

सबसे पहले बात करते हैं 1 अक्टूबर 1970 को रिलीज हुई ‘सफर’ की जिसमें राजेश खन्ना, फिरोज खान, शर्मिला टैगोर और अशोक कुमार लीड रोल में थे. आराधना फिल्म से रातोंरात सुपरस्टार राजेश खन्ना की ‘सफर’ फिल्म कल्ट क्लासिक फिल्म में शुमार है. सफर एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी जिसे मुशीर-रजा ने प्रोड्यूस किया था. असित सेन डायरेक्टर थे. स्क्रीनप्ले भी उन्होंने ने ही लिखा था. यह मूवी बंगाली राइटर आशुतोष मुखर्जी के एक नॉवेल पर बेस्ड थी. यह 1970 की सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्मों में से एक थी. पहले यह फिल्म बंगाली में ‘चलाचल’ के नाम से 1965 में बनाई गई थी. बाद में असित सेन ने इसे ‘सफर’ के नाम से हिंदी में बनाया. डायरेक्टर असित सेन को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था.

सफर फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी आनंद जी ने कंपोज किया था. गीत इंदीवर ने लिखे थे. डायलॉग इंदर राज आनंद ने लिखे थे. फिल्म में कुल 5 गाने थे. सभी गाने एक से बढ़कर थे. सदाबहार गानों में ‘जिंदगी का सफर’, ‘जीवन से भरी तेरी आंखें, मजबूर करें जीने के लिए’, ‘हम थे जिनके सहारे’, ‘जो तुमको हो पसंद, वही बात करेंगे’, ‘नदिया चले चले रे धारा’ शामिल हैं. हर गाना सुपरहिट हुआ और आज भी इन्हें सुनकर लोग भावुक हो जाते हैं. फिल्म का एक सॉन्ग ‘जो तुमको हो पसंद, वही बात करेंगे’ की धुन नूर जहां के पाकिस्तानी गाने ‘किस नाम से पुकारूं’ में भी सुनाई देती है. बाद में सोनू निगम के एक सॉन्ग ‘जब उठा मेरा जनाजा’ में भी इसी तरह की ट्यून सुनाई दी थी.
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सफर फिल्म के दौरान राजेश खन्ना अपने स्टारडम के पीक पर थे. यह फिल्म उनकी 17 हिट फिल्मों में शामिल है जो उन्होंने 1969 और 1971 के बीच कीं. इस फिल्म में राजेश खन्ना को ‘कैंसर’ की बीमारी से जूझते हुए दिखाया गया था. फिल्म में राजेश खन्ना का कालजयी डायलॉग ‘मैं मरने से पहले मरना नहीं चाहता’सुनकर दर्शकों की आंखों में आंसू आ जाते हैं. फिल्म में प्यार-त्याग और भावनाओं का ऐसा संयोजन था कि जिसने दर्शकों को रुलाकर रख दिया था.

जब यह फिल्म आई तब फिरोज खान सपोर्टिंग रोल्स किया करते थे. इससे पहले उन्होंने राजेंद्र कुमार के साथ ‘आरजू’ फिल्म भी की थी. फिरोज खान की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ रही थी. फिरोज खान की एक्टिंग की खूब सराहना हुई. फिरोज खन्ना ने अपने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि सफर फिल्म में उनके राजेश खन्ना के साथ सिर्फ दो सीन थे, फिर भी वो इनसिक्योर महसूस करते थे.

फिल्म में फिरोज खान और शर्मिला टैगोर की जब पहली मुलाकात होती है तो खास तरह का बैकग्राउंड म्यूजिक बजता है. यह म्यूजिक कल्याण जी -आनंद जी के भाई बाबला ने तैयार किया था. बाद में इसी म्यूजिक को कल्याण जी -आनंद जी ने 1980 की फिरोज खान-विनोद खन्ना की फिल्म ‘कुर्बानी’ में फिर से इस्तेमाल किया. इसी ट्यून पर एक सुपरहिट गाना बना जिसके बोल थे : ‘क्या देखते हो, सूरत तुम्हारी.’ सफर फिल्म का बजट करीब 75 लाख रुपये था और मूवी ने 2.90 करोड़ से ज्यादा का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह 1970 की 9वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

सफर फिल्म में राजेश खन्ना-शर्मिला टैगोर और फिरोज खन्ना ने पहली और आखिरी बार काम किया था. राजेश खन्ना-शर्मिला टैगोर की जोड़ी पहली बार 1969 की आराधना फिल्म में नजर आई थी. फिल्म में करण जौहर के चाचा आईएस जौहर और अरुणा ईरानी ने पति-पत्नी का रोल निभाया था. सबसे दिलचस्प बात यह है कि प्रोड्यूसर मुशीर आलम और मुहम्मद रियाज दिलीप कुमार के साथ ‘बैराग’ मूवी बना रहे थे. फिल्म डिले हुई तो उन्होंने बीच में असित सेन के डायरेक्शन में सफर फिल्म बना डाली थी. बैराग 1976 में रिलीज हुई थी.

अब बात करते हैं 12 मार्च 1971 को रिलीज हुई राजेश खन्ना की फिल्म आनंद की जिसमें डायरेक्टर-गीतकार के निजी जीवन का दर्द कहानी और गीतों के जरिये झलका था. आनंद फिल्म के डायलॉग्स अमर हो गए. फिल्म में राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, सुमित संन्याल और रमेश देव लीड रोल में थे. फिल्म की कहानी हृषिकेश मुखर्जी ने लिखी थी. डायलॉग गुलजार ने लिखे थे. यह फिल्म डायरेक्टर हृषिकेश मुखर्जी और उनके दोस्त राज कपूर की निजी जिंदगी से प्रेरित थी. गाने गीतकार योगेश गौड़ की निजी जिंदगी से जुड़े हुए थे.

राज कपूर प्यार से हृषिकेश मुखर्जी को ‘बाबू मोशाय’ बोला करते थे जिसका बंगाली भाषा में अर्थ है ‘ग्रेट जेंटल मैन’. यही दो शब्द ‘आनंद’ फिल्म की पहचान बन गए. राजेश खन्ना बार-बार इस शब्द को बोलते हैं. राज कपूर 1969 में जब बहुत बीमार हुए तो उस दौरान हृषिकेश दा ने जिस दर्द को महसूस किया, उसे ही फिल्म के जरिये दर्शकों के सामने पेश किया. 30 लाख के बजट में बनी आनंद फिल्म ने करीब 1 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. लो बजट की इस की कहानी सुनकर राजेश खन्ना द्रवित हो गए थे. उन्होंने सिर्फ 7 लाख रुपये फीस ली थी. आनंद फिल्म को 8 अवॉर्ड मिले थे. फिल्म को नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. इस फिल्म को देखने के लिए मुंबई के कॉलेज खाली हो गए थे. इस मूवी में जीवन को हंसकर जीने की कला दिखाई गई है. फिल्म का क्लाइमैक्स भी उतना ही मार्मिक था कि दर्शकों की आंखों में आंसू आ गए थे.
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