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mohammed rafi Superhit Song : 57 साल सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म आई थी जिसके सभी गाने मोहम्मद रफी ने गाए थे. हीरो ने पहले यह फिल्म रिजेक्ट कर दी थी लेकिन जब पता चला कि मोहम्मद रफी इसके सभी गाने गाएंगे तो उन्होंने फिल्म करने के लिए हामी भर ली. इतना ही नहीं, हीरो ने मोहम्म्द रफी को एक गाने को एक सांस में गाने का भी चैलेंज दिया. रिकॉर्डिंग रूम में रफी साहब ने सांसों और स्वरों की जुगलबंदी से इतिहास रच दिया. गाना तो सुपरहिट निकला ही, मूवी भी ब्लॉकबस्टर रही. फिल्म के हर डिपार्मेंट को तारीफ मिली. इस मूवी ने उस साल 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी अपने नाम कर लिए. यह फिल्म कौन सी थी, आइये जानते हैं…….
ब्रेथलेस सॉन्ग का ट्रेंड 1970 के दशक से पहले ही आ चुका था. 1868 में सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म आई जिसका एक गाना खूब पॉप्युलर हुआ. इस दर्दभरे गाने के जरिये आज भी महबूब अपनी प्रेमिका और उसके साथ बिताए प्यारभरे पलों को याद करते हैं. मोहम्मद रफी ने एक ही सांस में यह गाना गाया था. फिल्म थी : ब्रह्मचारी. मजेदार बात यह है कि इस फिल्म को शम्मी कपूर रिजेक्ट कर चुके थे. उन दिनों प्रोड्यूसर जीपी सिप्पी इंडस्ट्री में नए थे. शम्मू कपूर स्टार थे. उन्होंने किसी तरह फिल्म के लिए हामी भरी. फिर उन्होंने रफी साहब को चैलेंज दिया था. रफी साहब ने रिकॉर्डिंग के दौरान जो जुगलबंदी और नुमाइश की, उसने हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक नई इबारत लिखी. इस गाने के बोल थे : ‘दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर, यादों को तेरी मैं दुल्हन बनाकर, रखूंगा मैं दिल के पास, मत हो मेरी जां उदास.’

ब्रह्मचारी की कहानी सचिन भौमिक ने लिखी थी. जीपी सिप्पी-रमेश सिप्पी प्रोड्यूसर थे. बप्पी सोनी ने मूवी का डायरेक्शन किया था. फिल्म में शम्मी कपूर, राजश्री, प्राण, मुमताज, जगदीप, सचिन और असित सेन अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. म्यूजिक शंकर-जयकिशन का था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी और 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीते थे. बेस्ट फिल्म का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी इसी मूवी को मिला था.

फिल्म में कुल 6 गाने रखे गए थे. तीन गाने हसरत जयपुरी ने, दो गाने शैलेंद्र ने और फिल्म का एक गाना राजेंद्र कृष्ण ने लिखा था. फिल्म के दो गाने तो आज भी दिलों पर राज कर रहे हैं. इसी फिल्म का एक गाना ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जुबान पर, सबको मालूम है और सबको खबर हो गई’ तो आज भी टीवी-एड पर सुनाई दे जाता है. इसी मूवी का एक और गाना ‘दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर, यादों को तेरी मैं दुल्हन बनाकर, रखूंगा मैं दिल के पास, मत हो मेरी जां उदास’ ब्रेथलेस सॉन्ग की फीलिंग देता है. इसी सॉन्ग को एक सांस में गाने की शर्त शम्मी कपूर ने मोहम्मद रफी से लगाई थी.
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शम्मी कपूर ने मोहम्मद रफी से कहा था कि अगर आप इस गाने का मुखड़ा और अंतरा एक ही सांस में गा देंगे तो इसमें चार चांद लग जाएंगे. हंसते हुए कहा कि मैं मान लूंगा कि आप सबसे बड़े गायक हैं. फी साहब ने तब तो शम्मी कपूर से कुछ नहीं कहा लेकिन जब वो रिकॉर्डिंग रूम में पहुंचे और स्वरों का मेल दिखाया कि हर कोई तालियां बजाने को मजबूर हो गया. कहते हैं शम्मू कपूर ने रफी साहब को गाना रिकॉर्ड होते ही गले लगा लिया था. यह गाना शिवरंजनी राग पर आधारित था.

इसी तरह इसी फिल्म के एक और गाने ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर जुबान पर, सबको मालूम है और सबको खबर हो गई’ से भी दिलचस्प किस्सा जुड़ा हुआ है. बताया जाता है कि इस गाने की ट्यून देवानंद की फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ के लिए कंपोज की गई थी लेकिन उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया. इससे शंकर-जयकिशन खासे निराश हुए. उन्होंने एक पार्टी में शम्मू कपूर को यह ट्यून सुनाई तो उन्हें खूब पसंद पाई. शम्मी कपूर ने डायरेक्टर भप्पी सोनी को इस ट्यून को फिल्म ब्रह्मचारी में रखने का सुझाव दिया. यही सॉन्ग बहुत पॉप्युलर हुआ. मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर ने इस गाने को अपनी खूबसूरत आवाज दी है. सुमन कल्याणपुर की आवाज लता मंगेशकर से बहुत मेल खाती थी. जब यह गाना सामने आया तो लता दी का चैन लुट गया.

जब यह गाना रिलीज हुआ तो पूरी दुनिया हैरान रह गई. रोमांटिक-दर्दभरा गाना इतनी तीव्रता से गाया गया कि उसने दिल की रंगत ही बदल दी. सुरों ने अपना कमाल दिखाया और रफी साहब की आवाज का जादू दिलों पर छा गया. ब्रह्मचारी फिल्म को कुल 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले. ये अवॉर्ड बेस्ट फिल्म (जीपी सिप्पी), बेस्ट एक्टर (शम्मू कपूर), बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर (शंकर जयकिशन), बेस्ट लिरिसिस्ट शैलेंद्र (मैं गाऊं तुम), बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर मोहम्मद रफी (दिल के झरोखे में), बेस्ट स्टोरी का अवॉर्ड सचिन भौमिक की झोली में आया.

सबसे दिलचस्प फैक्ट यह है कि शम्मी कपूर की ब्रह्मचारी मूवी से ही इंस्पायर्ड होकर सलीम-जावेद ने ‘मि. इंडिया’ की स्टोरी लिखी थी. इस फिल्म ने अनिल कपूर को रातोंरात स्टार बना दिया. मिस्टर इंडिया फिल्म में जिस तरह बच्चे मूवी का केंद्र हैं और अनिल कपूर उनके लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाते है, वैसी ही कुछ कहानी शम्मी की ब्रह्मचारी फिल्म की है. दोनों फिल्में सुपरहिट रहीं.
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