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परेश रावल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि 80-90 के दशक में बॉलीवुड हॉलीवुड और अन्य विदेशी फिल्मों की नकल करता था, लेकिन अब ओरिजिनल स्क्रिप्ट पर ध्यान दिया जा रहा है. साथ ही अभिनेता ने और भी बहुत सी खास ब…और पढ़ें
परेश रावल का बॉलीवुड पर खुलासा (फोटो साभार- फाइल फोटो)
हाइलाइट्स
- बॉलीवुड अब ओरिजिनल स्क्रिप्ट पर ध्यान दे रहा है.
- पहले बॉलीवुड हॉलीवुड फिल्मों की नकल करता था.
- परेश रावल ने इंडस्ट्री के बदलाव पर खुलकर बात की.
नई दिल्ली : बॉलीवुड के बारे में अक्सर कहा जाता है कि दशकों से हॉलीवुड, साउथ सिनेमा और यहां तक कि कोरियाई फिल्मों की नकल करने के लिए जाना जाता रहा है. 80 और 90 के दशक में कई ऐसी फिल्में आईं, जो विदेशों में बनी हिट फिल्मों की फ्रेम-टू-फ्रेम कॉपी थीं. हालांकि, अब ये चलन लगभग खत्म हो चुका है. हाल ही में दिग्गज अभिनेता परेश रावल ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की और बताया कि आखिर क्यों बॉलीवुड को ओरिजिनल स्क्रिप्ट पर ध्यान देना पड़ा.
पहले के समय में, जब फिल्ममेकर्स किसी नई फिल्म की प्लानिंग करते थे, तो वे ओरिजिनल कहानियों की बजाय विदेशी फिल्मों को देखकर फिल्म बनाते थे. कई फिल्में तो पूरी तरह से फ्रेम-बाय-फ्रेम कॉपी होती थीं. जैसे की- ‘दिल है के मानता नहीं’ (1991) – हॉलीवुड फिल्म It Happened One Night से प्रेरित थी, ‘सत्ते पे सत्ता’ (1982) – ये हॉलीवुड क्लासिक Seven Brides for Seven Brothers की रीमेक थी, ‘कर्ज़’ (1980) – हॉलीवुड फिल्म The Reincarnation of Peter Proud से प्रेरित थी. परेश रावल ने एक इंटरव्यू में बताया कि उस दौर में फिल्ममेकर्स बिना ज्यादा मेहनत किए स्क्रिप्ट तैयार कर लेते थे.
‘डायरेक्टर धूल से भरी कैसेट’
सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में परेश रावल ने बताया कि उस दौर में ओरिजिनल स्क्रिप्ट का महत्व बहुत कम था. उन्होंने कहा- ‘अगर आप किसी डायरेक्टर के पास जाते और कहते कि आप फिल्म बनाना चाहते हैं, तो वे आपको एक पुरानी धूल भरी कैसेट पकड़ाते और कहते – ‘ये देख लो, इसमें बाद में कुछ और जोड़ देंगे’… हम बस अच्छे चोर थे.’ परेश का मानना है कि ये मानसिक आलस और क्रिएटिविटी की कमी थी, जिसने बॉलीवुड को नकल करने के लिए मजबूर किया.
मुनाफा घटा, तो खत्म हुई नकल करने की प्रथा
अभिनेता के अनुसार, जब विदेशी स्टूडियोज ने भारत में अपने दफ्तर खोलने शुरू किए, तो हालात बदल गए.पहले जहां बॉलीवुड चोरी की स्क्रिप्ट से पैसा कमाता था, अब उन्हें इन फिल्मों के राइट्स खरीदने पड़ते थे, जिससे प्रॉफिट कम होने लगा. परेश ने कहा- ‘जब उनके ऑफिस यहीं आ गए और हमें राइट्स के लिए पूरा पैसा देना पड़ा, तब सबने सोचा कि हमें अपनी कहानियों पर ध्यान देना चाहिए. तब जाकर एहसास हुआ कि हमारी खुद की कहानियां कितनी दमदार, नई और अभिनव हैं.’
ओरिजिनल कहानियों से मिली नई पहचान
जैसे-जैसे बॉलीवुड ने ओरिजिनल कंटेंट पर फोकस किया, इंडस्ट्री को जबरदस्त सफलता मिलने लगी दर्शकों को भी ताजगी भरी कहानियां पसंद आने लगीं. परेश रावल के अनुसार, मेहनत का सीधा असर फिल्मों की क्वालिटी पर पड़ा और शानदार नतीजे देखने को मिले. ‘पहले सिर्फ चोरी का काम होता था, लेकिन जब मेहनत से कहानियां लिखी जाने लगीं, तो फिल्मों की क्वालिटी भी बेहतर हुई और इंडस्ट्री आगे बढ़ी.’
परेश रावल की आने वाली फिल्में
प्रोफेशनल फ्रंट की बात करें, तो परेश रावल के पास कई बेहतरीन प्रोजेक्ट्स हैं- ‘भूत बंगला’ – अक्षय कुमार और तब्बू के साथ प्रियदर्शन की ये हॉरर-कॉमेडी 2 अप्रैल, 2026 को रिलीज होगी. ‘वेलकम टू द जंगल’ – इसमें अक्षय कुमार, रवीना टंडन और जैकलीन फर्नांडीज के साथ नजर आएंगे और’हेरा फेरी 3′ – इस बहुप्रतीक्षित फिल्म में परेश रावल फिर से बाबू भैया के किरदार में दिखेंगे.
Mumbai,Maharashtra
February 26, 2025, 15:51 IST