लगातार बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी के चलते गौतमबुद्धनगर में बहने वाली यमुना और हिंडन नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। दोनों नदियों के उफान ने यमुना और हिंडन की तलहटी में रहने वाले लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। यमुना और हिंडन का जलस्तर बढ़ने से कुल 43 गांव प्रभावित हुए हैं। इनमें सदर तहसील के 12 और दादरी के छह गांवों में आबादी प्रभावित है जबकि जेवर के 25 गांवों में फसलें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं। गुरुवार को जलस्तर खतरे के लाल निशान से ऊपर चला गया, जिससे बाढ़ का संकट गहरा गया है। इस कारण 35 लोगों को रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया।

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उफान पर यमुना
– फोटो : पीटीआई
यमुना नदी लाल निशान के पार
लगातार हो रही वर्षा और नदियों के बढ़ते जलस्तर से जनपद के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। यमुना नदी का जलस्तर खतरे के लाल निशान को पार कर गया है। जबकि हिंडन नदी का जलस्तर खतरे के बिन्दु से नीचे दर्ज किया गया है। प्रशासन की ओर से बचाव और राहत कार्यों में तेजी लाई गई है। प्रभावित इलाकों में अब तक हजारों लोगों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। दोपहर 3 बजे तक यमुना का जलस्तर 200.60 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के बिन्दु पर है। दिल्ली स्थित ओखला बैराज पर यमुना का चेतावनी बिन्दु 202.17 मीटर और खतरे का बिन्दु 200.60 मीटर तय है। यानी यमुना नदी का बहाव अब सीधा खतरे के स्तर पर पहुंच चुका है। वहीं हिंडन नदी का जलस्तर 200 मीटर दर्ज हुआ है। जबकि चेतावनी बिन्दु 205.08 मीटर है। इसका मतलब है कि हिंडन नदी का पानी अभी 5.08 मीटर नीचे बह रहा है और तत्काल खतरे की स्थिति नहीं है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार 1 जून से 4 सितम्बर 2025 तक जनपद में 201.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। जबकि सामान्य वर्षा 391.7 मिलीमीटर होनी चाहिए थी। यानी लगभग 49 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई है। गुरुवार को जिले में 3 मिमी बारिश हुई। जबकि सामान्य बारिश 9 मिमी अपेक्षित थी।

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लोगों को सुरक्षित निकालती टीम
– फोटो : अमर उजाला
3800 लोगों का सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
यमुना और हिंडन की उफान से जनपद के 12 गांव तहसील सदर में, छह गांव तहसील दादरी में और 25 गांव तहसील जेवर में प्रभावित हुए हैं। इन क्षेत्रों की आबादी और खेती पर सीधा असर पड़ा है। अब तक प्रशासन की मदद से करीब 3800 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें से 2637 लोग अलग-अलग बाढ़ शरणालयों में रह रहे हैं। सभी को सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) के माध्यम से शुद्ध नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन शरणालयों पर विस्थापितों के लिए साफ पेयजल, स्वच्छता, भोजन और पशुओं के लिए चारे की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर शरणालयों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।

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बाढ़ पीड़ितों के लिए लगाए गए स्वास्थ्य शिविर
– फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य शिविर भी हुए सक्रिय
मुख्य चिकित्साधिकारी की निगरानी में छह रेस्पांस टीम गठित की गई हैं, जो अलग-अलग शरणालयों में लगातार ड्यूटी कर रही हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष में भी स्वास्थ्य कर्मियों की शिफ्टवार तैनाती की गई है। साथ ही सांप के काटने जैसी आपात स्थिति को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वैनम की व्यवस्था कर ली गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं को बचाने के लिए सेक्टर-135, ग्रीन बेल्ट, पुश्ता रोड पर पशु शिविर स्थापित किया गया है। यहां तकरीबन 1471 गौवंश को सुरक्षित पहुंचा दिया गया है। बाढ़ राहत और बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीएफ) की दो टीमें लगाई गई हैं। तहसील जेवर के मेहंदीपुर और तहसील सदर के सेक्टर-150 में टीम लगी है। इसके अलावा पीएसी की एक टीम थाना दनकौर क्षेत्र के गांव मुर्शदपुर में तैनात है। अग्निशमन विभाग की एक टीम सेक्टर-151ए (तहसील सदर) में आठ नावों के साथ मुस्तैद है। साथ ही राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की दो टीम जल्द पहुंचेगी।

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पीड़ितों को भोजन बांटते लोग
– फोटो : अमर उजाला
झुग्गियों में रह रहे तीन हजार लोग संकट में
लगातार बारिश के चलते नदी का स्तर और बढ़ने की आशंका है। वर्ष 2023 की स्थिति को याद करते हुए लोग डरे हुए हैं, क्योंकि तब यमुना में तीन लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी आ गया था, जिससे 67 गांव प्रभावित हुए थे। इस बार भी खतरा टलता नजर नहीं आ रहा। सेक्टर-91 से लेकर सेक्टर-151 और फिर सेक्टर-168 तक 16 किलोमीटर लंबे पुश्ता रोड पर झुग्गियों का बसेरा है। यहां करीब तीन हजार से अधिक लोग रह रहे हैं। जलस्तर बढ़ने से इनकी चिंता और बढ़ गई है। वहीं सेक्टर-135 स्थित नंगली वाजिदपुर के बारातघर में 600 से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं। जिला प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी होने के बाद भी लापरवाही साफ झलक रही है। डूब क्षेत्र में लोग अंदर जाकर सामान निकाल रहे हैं। यहां न तो बैरिकेडिंग की गई है और न ही आवाजाही रोकी गई है। जबकि वर्ष 2023 में इसी स्थान से सबसे ज्यादा लोगों को रेस्क्यू करना पड़ा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार सुरक्षा इंतजाम कमजोर हैं, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ गया है।
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